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Rajeev Ranjan Roy
लेखक: Rajeev Ranjan Royस्टाफ लेखक
Pratik Bhuyan
Pratik Bhuyan द्वारा समीक्षितस्टाफ संपादक

भारत में बढ़ती AI-संचालित क्रिप्टो की मांग

Artificial Intelligence और Blockchain के संगम से उपजे टोकन्स ने भारतीय निवेशकों में नई उम्मीद जगाई है पर विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि लंबी दौड़ में केवल असली उपयोगिता ही टिकेगी।

भारत में बढ़ती AI-संचालित क्रिप्टो की मांग
विश्लेषण

पिछले एक साल में भारत का क्रिप्टो बाजार फिर से चहल-पहल से भर गया है। इस बार चर्चा में हैं ऐआई क्रिप्टो टोकन्स।

जैसे-जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की लोकप्रियता बढ़ी है, वैसे-वैसे इससे जुड़े ब्लॉकचेन प्रोजेक्ट्स और टोकन्स ने भी निवेशकों की कल्पना को पंख दिए हैं।

आंकड़े बताते हैं कि जहां एक साल पहले वैश्विक स्तर पर ऐआई टोकन्स का मार्केट कैप लगभग 2.7 बिलियन डॉलर था, वहीं अब यह करीब 30 बिलियन डॉलर के पार जा चुका है। यह केवल निवेश का नहीं बल्कि तकनीकी कल्पना और आशा का भी इशारा है।

भारतीय निवेशक, जो कभी मीम कॉइन्स की सट्टेबाजी में फंसे रहते थे, अब ऐआई क्रिप्टो को एक ज्यादा परिपक्व विकल्प के रूप में देख रहे हैं।

देश के प्रमुख एक्सचेंज कॉइन डीसीएक्स, कॉइनस्विच, मुदरेक्स और गिऑटटउस सभी ने रिपोर्ट किया है कि ऐआई से जुड़े टोकन्स अब ट्रेडिंग वॉल्यूम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है।

इनमें फेच.ऐआई (FET), बिटतेनसॉर (TAO), इंटर्नेट कंप्यूटर (ICP), रेन्डर (RNDR) और एनईऐआर (NEAR) जैसे नाम सबसे ज्यादा लोकप्रिय हैं।

कॉइन डीसीएक्स के सह-संस्थापक सुमित गुप्ता बताते हैं,

पिछले एक साल में ऐआई टोकन मार्केट कैप का इतना तेज़ बढ़ना दिखाता है कि निवेशक अब क्रिप्टो और एआई के इंटरसेक्शन में गंभीर अवसर देख रहे हैं। ये प्रोजेक्ट्स कम्प्यूटेशनल पावर, ऑटोमेशन और विकेंद्रीकृत एआई सर्विसेज जैसे वास्तविक उपयोग दिखा रहे हैं।”

कॉइनस्विच पर भी यही रुझान दिखा है। प्लेटफॉर्म के अनुसार, AI16z, वर्चुअल, गोट, पीएचए (PHALA) और फेच.ऐआई पांच सबसे अधिक ट्रेड होने वाले टोकन्स हैं, जो कुल एआई ट्रेडिंग वॉल्यूम का आधे से अधिक हिस्सा रखते हैं। पिछले साल की तुलना में इस साल एआई टोकन ट्रेडिंग 2.5 गुना बढ़ी है।

मुदरेक्स के लिए भी ये टोकन्स खासे महत्वपूर्ण हैं। उनके कुल ट्रेडिंग वॉल्यूम का लगभग 20 प्रतिशत इन्हीं से आता है। हालांकि, 2025 में रुझान स्थिर रहा है क्योंकि निवेशक अब केवल “हाइप” नहीं, बल्कि रियल-वर्ल्ड यूटिलिटी की तलाश में है।

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मुदरेक्स के सीईओ एडुल पटेल के अनुसार,

ऐआई टोकन्स की लोकप्रियता बनी हुई है, लेकिन अब निवेशक समझदारी दिखा रहे हैं। वे केवल नाम के पीछे नहीं, बल्कि असली तकनीकी उपयोग और समाधान वाले प्रोजेक्ट्स में निवेश कर रहे हैं।

दरअसल, इन टोकन्स की अपील उनके मूल वादे में है। एक ऐसा विकेंद्रीकृत एआई इकोसिस्टम जहां मशीन लर्निंग मॉडल्स को साझा रूप से ट्रेन और उपयोग किया जा सके। समर्थकों का कहना है कि यह गूगल या ओपनएआई जैसे दिग्गजों के सेंट्रलाइज्ड सिस्टम्स का बेहतर विकल्प हो सकता है।

एनईऐआर प्रोटोकॉल, फेच.ऐआई, बिटतेनसॉर (TAO) और आईसीपी जैसे प्रोजेक्ट्स की तकनीकी जड़ें भी मजबूत हैं। एनईऐआर के संस्थापक इल्या पोलोसुखिन, जिन्होंने गूगल के ऐआई ट्रांसफॉर्मर मॉडल पर काम किया था, ने इसे कुशल और सस्ते ब्लॉकचेन समाधान के रूप में विकसित किया।

फेच.ऐआई और उसके साझेदार SingularityNET तथा Ocean Protocol मिलकर एक आर्टिफिशियल सुपर इंटेलिजेंस (ASI) इकोसिस्टम बनाने की दिशा में बढ़ रहे हैं, जबकि बिटतेनसॉर ने मशीन इंटेलिजेंस को टोकनाइज करके एक विकेंद्रीकृत बाजार तैयार किया है।

इसके बावजूद, विशेषज्ञ आगाह करते हैं कि यह रैली हर टोकन के लिए स्थायी नहीं होगी। बिटिनिंग के संस्थापक काशिफ रजा कहते हैं,

कई प्रोजेक्ट्स ने सिर्फ ‘ऐआई’ शब्द जोड़कर खुद को रीब्रांड किया ताकि निवेशकों को आकर्षित किया जा सके। लेकिन लंबी अवधि में केवल वही टोकन्स बचेंगे जो असली मूल्य पैदा करेंगे।

क्रिप्टो बाजार के जानकार मानते हैं कि ऐआई टोकन्स इस दशक के सबसे दिलचस्प प्रयोग है, जहां तकनीकी नवाचार और निवेश की रणनीति एक-दूसरे से मिल रही है। लेकिन साथ ही, वे यह भी याद दिलाते हैं कि हर लहर की तरह यह भी ठहराव के बाद स्थिरता ही मांगेगी।

भारत के बढ़ते डेवलपर बेस और डिजिटल-सक्षम निवेशक वर्ग के साथ, देश के पास इस क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभाने का अवसर है। पर असली सफलता तभी मिलेगी जब ‘हाइप नहीं, हैसियत’ तय करेगी कि कौन-सा ऐआई टोकन वाकई भविष्य का निर्माण कर रहा है।

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