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Rajeev Ranjan Roy
लेखक: Rajeev Ranjan Royस्टाफ लेखक
Pratik Bhuyan
Pratik Bhuyan द्वारा समीक्षितस्टाफ संपादक

Federal Reserve गवर्नर: स्टेबलकॉइन की उछाल ब्याज दरें घटा सकती है

फेड अधिकारी का अनुमान है कि अगले पांच वर्षों में Stablecoins का मार्केट 3 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचेगा, जिससे वैश्विक पूंजी प्रवाह और मौद्रिक नीति दोनों पर गहरा असर पड़ेगा।

Federal Reserve गवर्नर: स्टेबलकॉइन की उछाल ब्याज दरें घटा सकती है
राय

अमेरिकी फेडरल रिजर्व के गवर्नर स्टीफन मिरान ने कहा है कि स्टेबलकॉइन की बढ़ती मांग आने वाले वर्षों में वैश्विक ब्याज दरों को नीचे धकेलने में अहम भूमिका निभा सकती है।

उनका कहना है कि जैसे-जैसे डॉलर-पेग्ड डिजिटल टोकन विश्वभर में फैल रहे हैं, वैसे-वैसे यह अमेरिकी ट्रेजरी और अन्य डॉलर-आधारित परिसंपत्तियों की मांग को और तेज करेंगे,  जिसका सीधा असर फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति पर पड़ेगा।

मिरान न्यूयॉर्क में आयोजित बीसीवीसी (BCVC) समिट में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि डॉलर से जुड़ी क्रिप्टो स्टेबलकॉइन्स न्यूट्रल रेट या आर-स्टार (R-star) पर नीचे की ओर दबाव डाल सकती है। यह वह ब्याज दर है, जिस पर अर्थव्यवस्था न तो प्रोत्साहित होती है और न ही बाधित।

“अगर न्यूट्रल रेट नीचे आता है, तो सेंट्रल बैंक को भी अपनी नीतिगत ब्याज दर घटानी पड़ सकती है,” मिरान ने कहा। उनके मुताबिक, स्टेबलकॉइन्स का यह प्रभाव केवल वित्तीय नवाचार का परिणाम नहीं होगा, बल्कि यह पूंजी बाजारों में डॉलर की बढ़ती लिक्विडिटी से जुड़ा एक दीर्घकालिक बदलाव होगा।

कॉइन गेको के ताजा आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान में सभी स्टेबलकॉइन्स का कुल बाजार पूंजीकरण करीब 310.7 बिलियन डॉलर है। लेकिन मिरान का कहना है कि फेडरल रिजर्व के अपने रिसर्च मॉडल के मुताबिक यह बाजार अगले पांच वर्षों में 3 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है।

“मेरा मानना है कि स्टेबलकॉइन्स पहले से ही अमेरिका के बाहर निवेशकों द्वारा अमेरिकी ट्रेजरी बिल्स और अन्य डॉलर-डिनॉमिनेटेड एसेट्स की मांग को बढ़ा रहे हैं। यह रुझान जारी रहेगा और संभवतः इसे और गति मिलेगी,” स्टीफन मिरान ने कहा।

उन्होंने आगे कहा कि स्टेबलकॉइन्स आने वाले वर्षों में सेंट्रल बैंकर्स के लिए मल्टीट्रिलियन-डॉलर का ‘हाथी’ साबित हो सकते हैं, जिसे अनदेखा करना मुश्किल होगा।

वित्तीय संस्थानों में बढ़ती चिंता

इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF) और कई अन्य वैश्विक वित्तीय संस्थाओं ने पहले ही चेतावनी दी है कि स्टेबलकॉइन्स पारंपरिक वित्तीय प्रणाली के लिए चुनौती बन सकते हैं। 

उनकी आशंका है कि यदि स्टेबलकॉइन इश्यूअर्स बड़ी संख्या में ग्राहक और पूंजी आकर्षित करते हैं, तो बैंकों के लिए जमा और लिक्विडिटी बनाए रखना कठिन हो सकता है।

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अमेरिकी बैंकिंग समूहों ने भी कांग्रेस से यील्ड-बेयरिंग स्टेबलकॉइन्स पर सख्त निगरानी की मांग की है। उनका तर्क है कि इस प्रकार के डिजिटल एसेट्स पारंपरिक बैंकिंग उत्पादों के साथ सीधी प्रतिस्पर्धा में आ सकते हैं, जिससे वित्तीय स्थिरता पर असर पड़ सकता है।

नियमन से खुलेगा रास्ता

हालांकि मिरान स्टेबलकॉइन की तेज़ वृद्धि को अनिवार्य आर्थिक वास्तविकता मानते हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि स्पष्ट और मजबूत नियामक ढांचा इसकी दिशा तय करेगा।

अपने भाषण में उन्होंने (GENIUS) एक्ट की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह कानून स्टेबलकॉइन उद्योग के लिए ठोस और व्यावहारिक दिशा प्रदान करता है।

“मैं नई रेगुलेशंस को सामान्यतः संदेह से देखता हूं, लेकिन जीईएनआईयूएस एक्ट से मैं बेहद उत्साहित हूं,” मिरान ने कहा।

यह कानून स्टेबलकॉइन रिज़र्व्स को पारंपरिक डॉलर एसेट्स की तरह वैधता और जवाबदेही देता है। यह पारदर्शिता सुनिश्चित करता है और उपभोक्ताओं की सुरक्षा को मजबूत बनाता है।

उन्होंने यह भी कहा कि मौद्रिक नीति के दृष्टिकोण से GENIUS एक्ट का सबसे अहम पहलू यह है कि यह यूएस में पंजीकृत इश्यूअर्स को अपने स्टेबलकॉइन्स को पूरी तरह सुरक्षित और लिक्विड अमेरिकी डॉलर-आधारित एसेट्स के साथ बैक करने की बाध्यता देता है। यह व्यवस्था स्टेबलकॉइन्स को पारंपरिक मुद्रा के समान भरोसेमंद आधार प्रदान कर सकती है।

भविष्य की दिशा

मिरान के बयान ऐसे समय में आए हैं जब दुनिया भर में स्टेबलकॉइन्स का उपयोग रेमिटेंस, ट्रेड फाइनेंसिंग और ऑन-चेन पेमेंट्स के लिए तेज़ी से बढ़ रहा है। अमेरिका, यूरोप और एशिया में कई फिनटेक कंपनियां अब इन्हें सीमा-पार भुगतान के सस्ते विकल्प के रूप में देख रही हैं। हालांकि नियामकों के लिए चुनौती यह होगी कि वे नवाचार और वित्तीय स्थिरता के बीच संतुलन कैसे बनाए रखें। 

मिरान के शब्दों में,

अगर स्टेबलकॉइन्स को सही ढंग से नियंत्रित किया जाए, तो वे न केवल डिजिटल डॉलर का भविष्य है, बल्कि वैश्विक वित्तीय संरचना के अगले अध्याय की शुरुआत भी है।

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