पिछले कुछ हफ़्तों में बिटकॉइन की तेज़ और चौंकाने वाली गिरावट ने क्रिप्टो मार्केट में गहरी चिंता पैदा कर दी है। अक्टूबर की शुरुआत में 1,26,000 डॉलर का स्तर छूने के बाद बिटकॉइन 82,200 डॉलर से नीचे फिसल गया। 

अब लगभग 88,500 डॉलर के आसपास मामूली रिकवरी दिखा रहा है। इस भारी गिरावट के साथ लगभग 1 ट्रिलियन डॉलर का मार्केट कैप मिट गया, जिसने निवेशकों को हिला कर रख दिया है।

डॉयचे बैंक के विश्लेषकों ने इस गिरावट को “सिस्टमेटिक और गहरी” बताते हुए इसके पाँच प्रमुख कारण गिनाए हैं।

उनका कहना है कि यह गिरावट पहले वाली रिटेल-सट्टेबाजी या सामान्य करेक्शन जैसी नहीं है, बल्कि यह क्रिप्टो बाज़ार की संरचनात्मक कमज़ोरियों को उजागर करती है।

बैंक ने चेतावनी दी है कि बिटकॉइन की कीमतें अभी जल्द स्थिर होने की संभावना नहीं दिखती।

बिटकॉइन पर भारी दबाव

डॉयचे बैंक का कहना है कि गिरावट के पीछे सबसे बड़ा कारण वैश्विक मार्केट में बना “रिस्क-ऑफ” माहौल है। दिलचस्प यह है कि जहाँ बिटकॉइन अक्सर “डिजिटल गोल्ड” कहलाता है, वहीं इस दौर में उसने ‘हाई-ग्रोथ टेक स्टॉक्स’ की तरह व्यवहार किया है।

विश्लेषकों के अनुसार, इस साल बिटकॉइन का नैस्डैक 100 इंडेक्स से 46% और एसएंडपी 500 से 42% सह-संबंध रहा, जो 2022 के कोविड-क्रैश जैसे स्तर हैं। इसके विपरीत, सोना व अमेरिकी ट्रेजरी जैसी सुरक्षित संपत्तियों ने बेहतर प्रदर्शन किया है।

इससे निवेशकों का विश्वास कमजोर हुआ और उन्होंने जोखिम वाली परिसंपत्तियों से दूरी बनानी शुरू कर दी।

दरों में कटौती की उम्मीद धुंधली

फेड चेयर जेरोम पॉवेल और फेड गवर्नर लिसा कुक के हालिया बयानों ने दिसंबर में संभावित ब्याज दर कटौती की उम्मीदों पर पानी फेर दिया।

डॉयचे बैंक के मुताबिक, इस अनिश्चितता ने बिटकॉइन को और कमज़ोर कर दिया क्योंकि इस साल बिटकॉइन का फेड की ब्याज दरों से सह-संबंध 13% रहा है।

जब दरों में कटौती की उम्मीद बढ़ती है, तो बिटकॉइन को सपोर्ट मिलता है, लेकिन इस समय विपरीत स्थिति दिखाई दे रही है।

नियामक स्पष्टता में देरी

इस साल की शुरुआत में अमेरिका में ‘GENIUS Act’ पास होने से स्टेबलकॉइन बाजार में नियमन की उम्मीद बढ़ी थी। लेकिन क्लैरिटी एक्ट, जो मार्केट स्ट्रक्चर और व्यापक क्रिप्टो नियमन तय करने वाला था, आगे नहीं बढ़ पाया है।

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इस देरी ने संस्थागत निवेशकों का भरोसा कमजोर किया है। बड़े निवेशकों ने सुरक्षित रास्ता चुना, जिससे बिटकॉइन को सपोर्ट मिलना धीमा पड़ा है।

संस्थागत निवेशकों की वापसी

10 अक्टूबर को बाज़ार में लगभग 19 अरब डॉलर की विशाल लिक्विडेशन हुई। इसके बाद से संस्थागत निवेशक एक बार फिर सतर्क हो गए।

डॉयचे बैंक का कहना है कि बड़े पैमाने पर पोजीशन बंद होने से एक्सचेंजों पर तरलता कमजोर पड़ी।

कई फ्यूचर्स ट्रेडर्स ने भी अपनी पोज़ीशन काट दीं, जिससे बाज़ार में अस्थिरता और बढ़ गई।

जब मार्केट मेकर्स पीछे हटते हैं, तो रिकवरी में और समय लगता है, यही स्थिति फिलहाल बिटकॉइन में दिख रही है।

लॉन्ग-टर्म होल्डर्स की मुनाफ़ा वसूली ने बढ़ाया दबाव

अक्टूबर की रैली के दौरान बिटकॉइन के 1,26,000 डॉलर पार करने के बाद पुराने मजबूत धारकों (लॉन्ग-टर्म होल्डर्स) ने भी मुनाफ़ा बुक करना शुरू कर दिया।

सिर्फ एक महीने में लगभग 8 लाख BTC बाज़ार में बिके, जो जनवरी 2024 के बाद सबसे बड़ी बिक्री है। इससे कीमत पर सीधा दबाव पड़ा और गिरावट तेज़ हो गई।

तरलता अभी भी कमजोर

डॉयचे बैंक ने काइको डेटा का हवाला देते हुए बताया कि अक्टूबर की दुर्घटना ने एक्सचेंजों पर बड़े पैमाने पर लिक्विडिटी खाली कर दी। कई एक्सचेंजों पर कुछ मिनटों तक बिक्री तरफ़ तरलता लगभग पूरी तरह गायब थी।

इस ‘लिक्विडिटी शॉक’ के कारण मार्केट मेकर्स डर गए, जिससे कीमत और नीचे चली गई। बैंक का कहना है कि यह नकारात्मक चक्र अभी भी खत्म नहीं हुआ है।

निष्कर्ष

बिटकॉइन की हालिया गिरावट सिर्फ एक सामान्य बाजार सुधार नहीं है। इसमें वैश्विक आर्थिक माहौल, फेड की नीति, नियामक देरी, बड़ी लिक्विडेशन और पुरानी वॉलेट्स की भारी बिक्री जैसे कई जटिल कारक शामिल हैं।

हालांकि हल्की रिकवरी दिखने लगी है, लेकिन मार्केट में अब भी तरलता की भारी कमी, नियामक अनिश्चितता और रिस्क-ऑफ सेंटिमेंट जारी है।

डॉयचे बैंक के अनुसार, दर्द अभी ख़त्म नहीं हुआ है और बिटकॉइन की स्थिरता में समय लग सकता है।

निवेशकों के लिए यही सचेत सलाह है कि बाज़ार की उथल-पुथल अभी खत्म नहीं हुई। इसलिए निर्णय सोच-समझ कर लें।

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