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Rajeev Ranjan Roy
लेखक: Rajeev Ranjan Royस्टाफ लेखक
Pratik Bhuyan
Pratik Bhuyan द्वारा समीक्षितस्टाफ संपादक

क्रिप्टो ने पाकिस्तान को अमेरिकी नरमी की ओर लौटने का मौका दिया

कैसे डिजिटल संपत्ति और भू-राजनीति का मेल इस्लामाबाद को वॉशिंगटन के करीब ला रहा है।

क्रिप्टो ने पाकिस्तान को अमेरिकी नरमी की ओर लौटने का मौका दिया
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पाकिस्तान और अमेरिका के रिश्तों में पिछले कुछ वर्षों से ठंडक रही है। आतंकवाद पर दोहरे रवैये, चीन पर बढ़ती निर्भरता, अफगानिस्तान से अमेरिकी वापसी और कश्मीर मसले पर पाकिस्तान की आक्रामक कूटनीति ने वॉशिंगटन को उससे दूरी बनाने पर मजबूर किया। लेकिन भू-राजनीतिक परिदृश्य में एक नया तत्व तेजी से उभरा है — क्रिप्टोकरेंसी।

यह केवल आर्थिक साधन नहीं रहा, बल्कि अब यह वैश्विक शक्ति समीकरण में भी जगह बना रहा है। पाकिस्तान, जो भारी वित्तीय संकट और विदेशी मुद्रा भंडार की तंगी से जूझ रहा है, धीरे-धीरे समझ रहा है कि क्रिप्टो अमेरिका के साथ रिश्तों को सुधारने का एक नया और अप्रत्याशित पुल बन सकता है।

पाकिस्तान की मजबूरी और क्रिप्टो की गुंजाइश

पाकिस्तान का चालू खाता घाटा, बढ़ता कर्ज और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) पर निर्भरता किसी से छिपी नहीं है। अमेरिकी प्रभाव वाले IMF से हर पैकेज लेने के लिए पाकिस्तान को कठोर शर्तें माननी पड़ती हैं। इस बीच, डॉलर की कमी ने व्यापार और उद्योग को बुरी तरह प्रभावित किया।

ऐसे परिदृश्य में क्रिप्टो पाकिस्तान के लिए बचाव का साधन बनकर उभरा है। देश के भीतर बड़े पैमाने पर अनौपचारिक रूप से बिटकॉइन और अन्य डिजिटल करेंसी का उपयोग हो रहा है। अनुमान है कि पाकिस्तान एशिया के शीर्ष क्रिप्टो अपनाने वाले देशों में शामिल है।

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प्रवासी पाकिस्तानी भी हवालों की जगह अब क्रिप्टो ट्रांसफर का उपयोग करने लगे हैं। इससे न केवल डॉलर पर दबाव कम होता है बल्कि वैकल्पिक वित्तीय पारिस्थितिकी तंत्र भी विकसित होता है।

अमेरिका की दिलचस्पी यहीं से शुरू होती है। वॉशिंगटन जानता है कि ब्लॉकचेन तकनीक और डिजिटल संपत्ति का वैश्विक भविष्य उसके नियंत्रण में रहना चाहिए। चीन पहले ही डिजिटल युआन के जरिए चुनौती पेश कर रहा है। अगर पाकिस्तान इस क्षेत्र में अमेरिकी कंपनियों और नीतिगत ढांचे के करीब आता है तो यह दोनों के लिए लाभकारी साबित हो सकता है।

अमेरिका की सामरिक दृष्टि

अमेरिका के लिए पाकिस्तान केवल एक आर्थिक साझेदार नहीं है, बल्कि रणनीतिक भूगोल वाला देश है। अफगानिस्तान, चीन, ईरान और भारत से घिरा पाकिस्तान अमेरिकी नीतियों में विशेष महत्व रखता है। क्रिप्टो को लेकर अमेरिकी थिंक-टैंक यह मानने लगे हैं कि पाकिस्तान को डिजिटल संपत्ति के विनियमन, माइनिंग और सुरक्षा ढांचे में शामिल करना वॉशिंगटन की दीर्घकालिक रणनीति के लिए लाभकारी रहेगा।

इसके अलावा, अमेरिका पाकिस्तान के क्रिप्टो-उपयोग को दो दृष्टियों से देख रहा है:

  1. आर्थिक स्थिरता – यदि पाकिस्तान क्रिप्टो को औपचारिक चैनलों में लाकर पारदर्शी ढांचा अपनाता है तो अमेरिकी निवेशक और कंपनियां वहां प्रवेश कर सकती हैं।

  2. भूराजनीतिक दबाव – पाकिस्तान को क्रिप्टो क्षेत्र में साथ लेकर अमेरिका चीन के डिजिटल युआन प्रयोग का संतुलन साध सकता है।

पाकिस्तान की चालाकी

इस्लामाबाद भी अमेरिका की इस नरमी का लाभ उठाने की कोशिश कर रहा है। क्रिप्टो को वह दोहरा औजार बना रहा है:

  • घरेलू स्तर पर यह आर्थिक संकट से राहत का रास्ता है।

  • अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह अमेरिका से दूरी घटाने का बहाना है।

पाकिस्तान सरकार ने हाल के महीनों में क्रिप्टो विनियमन पर नरमी दिखाना शुरू किया है। केंद्रीय बैंक और नियामकों ने पहले जिस सख्ती से पाबंदी लगाई थी, अब वही संस्थाएं ‘संभावनाओं की जांच’ की भाषा बोल रही हैं। अमेरिका इसे सकारात्मक संकेत मान रहा है।

चुनौतियाँ और संदेह

हालांकि तस्वीर इतनी सरल नहीं है। क्रिप्टो का दुरुपयोग आतंकवाद और मनी लॉन्ड्रिंग में भी आसानी से हो सकता है। अमेरिका इस खतरे को भली-भांति समझता है। यदि पाकिस्तान इस क्षेत्र में पारदर्शिता और अंतरराष्ट्रीय मानकों को अपनाने में विफल रहा तो यह नया पुल तुरंत ढह सकता है।

इसके अतिरिक्त, पाकिस्तान की राजनीति अस्थिर है और सत्ता बदलने के साथ नीतियाँ अक्सर पलट जाती हैं। ऐसे में यह भरोसा कायम करना कि क्रिप्टो को लेकर पाकिस्तान लंबे समय तक अमेरिका के अनुरूप चलेगा, अभी कठिन लगता है।

निष्कर्ष

पाकिस्तान और अमेरिका के रिश्तों में क्रिप्टो एक नया अध्याय खोल रहा है। एक ओर पाकिस्तान इसे आर्थिक राहत और अंतरराष्ट्रीय वैधता पाने के साधन के रूप में देख रहा है, तो दूसरी ओर अमेरिका इसे चीन की डिजिटल चुनौती का संतुलन और रणनीतिक साझेदारी का अवसर मान रहा है। यह रिश्ता अभी शुरुआती दौर में है और कई जोखिमों से भरा हुआ है, लेकिन इतना तय है कि क्रिप्टो ने दोनों देशों को फिर से बातचीत की मेज पर बैठने का एक ठोस बहाना दे दिया है।

संक्षेप में कहा जाए तो क्रिप्टो पाकिस्तान के लिए जीवनरेखा और अमेरिका के लिए रणनीतिक औजार बन चुका है। आने वाले वर्षों में यह देखा जाएगा कि यह नया पुल रिश्तों को स्थायी मजबूती देता है या केवल अस्थायी सहारा साबित होता है।

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