भारत की सबसे बड़ी दूरसंचार कंपनी रिलायंस जियो (Reliance Jio) ने ब्लॉकचेन प्लेटफॉर्म Aptos Foundation के साथ साझेदारी की है। इस साझेदारी का उद्देश्य जियो के विशाल उपभोक्ता आधार को वेब3 और ब्लॉकचेन आधारित डिजिटल सेवाओं से जोड़ना है।
इस साझेदारी के तहत Aptos और Jio मिलकर एक ऐसा डिजिटल इनाम (रिवॉर्ड) सिस्टम विकसित कर रहे हैं जो 500M जियो ग्राहकों को उनके मोबाइल उपयोग, डेटा खर्च या रिचार्ज व्यवहार के आधार पर टोकनाइज्ड रिवॉर्ड प्रदान करेगा। यह रिवॉर्ड ब्लॉकचेन नेटवर्क पर सुरक्षित रूप से ट्रैक और उपयोग किए जा सकेंगे।
भारत के लिए बड़ा तकनीकी कदम
भारत में लगभग 50 करोड़ से अधिक Jio उपयोगकर्ता हैं। Aptos के अनुसार, यह सहयोग भारत में ब्लॉकचेन अपनाने को विश्व के सबसे बड़े स्तर पर ले जा सकता है। Aptos की टीम ने कहा कि उनका लक्ष्य “वेब3 को अदृश्य बनाना” है — यानी आम उपयोगकर्ता बिना किसी जटिल तकनीकी ज्ञान के ब्लॉकचेन तकनीक का लाभ उठा सकें।
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Aptos एक लेयर-1 ब्लॉकचेन है जिसकी नींव Diem (पूर्व में फेसबुक के Libra प्रोजेक्ट) की तकनीक पर रखी गई थी। इस साझेदारी के साथ Aptos भारत के उपभोक्ता-तकनीक क्षेत्र में प्रवेश कर रहा है, जहाँ अब तक ब्लॉकचेन अपनाने की गति अपेक्षाकृत धीमी रही है।
नियामकीय संदर्भ और संभावित प्रभाव
भारत में फिलहाल क्रिप्टो और वेब3 क्षेत्र पर नियामक स्पष्टता सीमित है, परन्तु Jio-Aptos साझेदारी इसे मुख्यधारा में लाने की दिशा में एक बड़ा प्रयोग माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम न केवल उपभोक्ता इनाम प्रणाली में पारदर्शिता लाएगा बल्कि भारतीय उपयोगकर्ताओं को वैश्विक ब्लॉकचेन इकोसिस्टम से भी जोड़ देगा।
वित्तीय विश्लेषकों के अनुसार, यदि यह परियोजना सफल होती है, तो आने वाले समय में अन्य टेलिकॉम कंपनियाँ भी ब्लॉकचेन-सक्षम योजनाएँ शुरू कर सकती हैं।
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