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Rajeev Ranjan Roy
लेखक: Rajeev Ranjan Royस्टाफ लेखक
Pratik Bhuyan
Pratik Bhuyan द्वारा समीक्षितस्टाफ संपादक

सरल कर ढांचा जल्द, जीएसटी काउंसिल 3–4 सितंबर को लेगी फैसला

जीएसटी काउंसिल (GST Council) की 56वीं बैठक 3–4 सितंबर को होगी। बैठक में दो-स्लैब जीएसटी ढांचे पर फैसला लिया जाएगा।

सरल कर ढांचा जल्द, जीएसटी काउंसिल 3–4 सितंबर को लेगी फैसला
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देश की अप्रत्यक्ष कर प्रणाली में व्यापक सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के तहत जीएसटी काउंसिल की 56वीं बैठक 3 और 4 सितंबर को आयोजित की जाएगी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में होने वाली इस बैठक में मंत्रियों के समूह (जीओएम) की उस सिफारिश पर निर्णय लिया जाएगा, जिसके अंतर्गत मौजूदा चार-स्लैब कर ढांचे को सरल बनाकर दो स्लैब में समेटने का प्रस्ताव रखा गया है।

वर्तमान में भारत में जीएसटी की चार दरें लागू हैं — 5 प्रतिशत, 12 प्रतिशत, 18 प्रतिशत और 28 प्रतिशत। इसके अतिरिक्त, विलासिता एवं हानिकारक वस्तुओं पर उपकर (सेस) भी वसूला जाता है।

जीओएम की सिफारिशें

बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता वाले छह सदस्यीय मंत्रियों के समूह ने काउंसिल को अपनी सिफारिशें सौंप दी हैं। प्रस्ताव के प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं:

  • ‘मेरिट’ वस्तुएं और सेवाएं: 5% जीएसटी

  • सामान्य वस्तुएं और सेवाएं: 18% जीएसटी

  • हानिकारक (‘सिन’) वस्तुएं: 40% कर

जीओएम ने मौजूदा 12% और 28% स्लैब को समाप्त करने का सुझाव दिया है। अनुमान के अनुसार, 12% दर के अंतर्गत आने वाली लगभग 99% वस्तुएं 5% स्लैब में और 28% स्लैब की लगभग 90% वस्तुएं 18% श्रेणी में स्थानांतरित हो जाएंगी। तंबाकू, शराब, जुआ, पान मसाला, शीतल पेय, फास्ट फूड, कॉफी और चीनी जैसी वस्तुओं को ‘सिन गुड्स’ श्रेणी में रखते हुए उन पर 40% कर लगाने का प्रस्ताव है।

सरकार की मंशा और संभावित लाभ

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जीओएम बैठक में कहा कि सरल कर ढांचा आम नागरिकों, किसानों, मध्यम वर्ग और लघु उद्यमों के लिए लाभकारी सिद्ध होगा। उनके अनुसार, दरों में कमी और सरलीकरण से उपभोक्ताओं का बोझ घटेगा, अनुपालन प्रक्रिया आसान होगी और कर प्रणाली अधिक पारदर्शी बनेगी।

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नीति विशेषज्ञों का मानना है कि प्रस्तावित बदलाव न केवल कर संरचना को विकासोन्मुख बनाएंगे, बल्कि कर संग्रहण क्षमता को भी मजबूत करेंगे।

प्रधानमंत्री की घोषणा से जुड़ा कदम

जीएसटी सुधार की यह प्रक्रिया प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस संबोधन के बाद तेज हुई है। प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में संकेत दिया था कि इस बार दीवाली से पहले जनता को “जीएसटी सुधार” के रूप में बड़ा उपहार मिलेगा।

स्वास्थ्य बीमा पर कर छूट की संभावना

मंत्रियों के समूह ने केंद्र सरकार के उस प्रस्ताव पर भी विचार किया है, जिसके तहत व्यक्तिगत स्वास्थ्य और जीवन बीमा प्रीमियम को जीएसटी से मुक्त करने की सिफारिश की गई है। इस संबंध में अंतिम निर्णय सितंबर में होने वाली काउंसिल बैठक में लिया जाएगा। यदि यह प्रस्ताव स्वीकृत होता है तो स्वास्थ्य बीमा की उपयोगिता और पहुंच दोनों में वृद्धि की संभावना है।

आधिकारिक पुष्टि

भारत सरकार के सचिव एवं जीएसटी काउंसिल के पदेन सचिव अरविंद श्रीवास्तव द्वारा जारी अधिसूचना में कहा गया है, “जीएसटी काउंसिल की 56वीं बैठक 3 और 4 सितंबर, 2025 को आयोजित की जाएगी। बैठक का स्थान और विस्तृत एजेंडा शीघ्र ही साझा किया जाएगा।”

निष्कर्ष

56वीं जीएसटी काउंसिल बैठक कर प्रणाली को सरल और पारदर्शी बनाने की दिशा में ऐतिहासिक साबित हो सकती है। दो-स्लैब ढांचे से जहां उपभोक्ताओं को राहत मिलने की संभावना है, वहीं कारोबारियों के लिए अनुपालन आसान होगा। साथ ही, 40% ‘पाप कर’ से समाज में हानिकारक वस्तुओं की खपत नियंत्रित करने का प्रयास होगा। अब सभी की निगाहें सितंबर की बैठक पर टिकी हैं, जहां अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

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