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Rajeev Ranjan Roy
लेखक: Rajeev Ranjan Royस्टाफ लेखक
Pratik Bhuyan
Pratik Bhuyan द्वारा समीक्षितस्टाफ संपादक

क्रिप्टो को अनिवार्य किए बिना ‘ऑनचेन इकोनॉमी’ की ओर बढ़ रहा बरमूडा

बरमूडा ब्लॉकचेन आधारित ‘onchain economy’ मॉडल विकसित कर रहा है। सरकार क्रिप्टो को अनिवार्य किए बिना स्टेबलकॉइन भुगतान और ऑनचेन सेवाओं का परीक्षण कर रही है।

क्रिप्टो को अनिवार्य किए बिना ‘ऑनचेन इकोनॉमी’ की ओर बढ़ रहा बरमूडा
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डिजिटल अर्थव्यवस्था की वैश्विक दौड़ के बीच अटलांटिक महासागर में स्थित छोटा द्वीपीय देश बरमूडा एक बड़ा वित्तीय प्रयोग कर रहा है। सरकार देश को दुनिया की पहली पूरी तरह ‘ऑनचेन इकोनॉमी’ बनाने की दिशा में कदम बढ़ा रही है, लेकिन खास बात यह है कि यहां क्रिप्टोकरेंसी को जबरन लागू नहीं किया जा रहा।

हाल ही में प्रकाशित विश्लेषण के अनुसार, बरमूडा का लक्ष्य क्रिप्टो को कानूनी मुद्रा घोषित करना या नागरिकों को डिजिटल वॉलेट अपनाने के लिए बाध्य करना नहीं है, बल्कि ब्लॉकचेन को रोजमर्रा की वित्तीय संरचना के रूप में विकसित करना है।

क्या है ऑनचेन इकोनॉमी’ मॉडल?

Onchain Economy का मतलब है कि भुगतान, सरकारी सेवाएं, बैंकिंग प्रक्रियाएं और व्यावसायिक लेनदेन ब्लॉकचेन नेटवर्क पर संचालित हों। बरमूडा इस बदलाव को अचानक लागू करने के बजाय चरणबद्ध परीक्षण मॉडल के जरिए आगे बढ़ा रहा है।

सरकार की योजना के तहत शुरुआती चरण में स्टेबलकॉइन आधारित भुगतान, सरकारी शुल्क, परमिट, रिफंड और व्यापारिक ट्रांजैक्शन को ब्लॉकचेन पर पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू किया जाएगा। पारंपरिक बैंक ट्रांसफर, कार्ड या नकद भुगतान पूरी तरह जारी रहेंगे।

क्यों नहीं अपनाया गया ‘क्रिप्टो अनिवार्यता’ मॉडल?

एल साल्वाडोर जैसे देशों ने बिटकॉइन को कानूनी मुद्रा बनाया, लेकिन बरमूडा ने इससे अलग रणनीति चुनी है। विशेषज्ञों के अनुसार, जबरन क्रिप्टो अपनाने से गोपनीयता, नियमन और वित्तीय स्थिरता को लेकर विरोध पैदा हो सकता है।

इसलिए बरमूडा पहले तकनीक की विश्वसनीयता साबित करना चाहता है। पायलट प्रोजेक्ट के जरिए सरकार ट्रांजैक्शन लागत, सुरक्षा, धोखाधड़ी जोखिम और उपभोक्ता अनुभव का डेटा जुटाएगी, जिसके बाद ही विस्तार किया जाएगा।

वैश्विक कंपनियों की भागीदारी

इस महत्वाकांक्षी परियोजना में स्टेबलकॉइन जारीकर्ता Circle और क्रिप्टो एक्सचेंज Coinbase तकनीकी सहयोग दे रहे हैं। इन कंपनियों की मदद से USDC जैसे डॉलर-समर्थित डिजिटल टोकन को भुगतान प्रणाली में शामिल किया जाएगा। 

सरकार का मानना है कि ब्लॉकचेन आधारित भुगतान से अंतरराष्ट्रीय लेनदेन तेज होंगे और व्यापारियों की लागत घटेगी। विशेष रूप से सीमा-पार भुगतान पर निर्भर अर्थव्यवस्था होने के कारण बरमूडा को इससे बड़ा लाभ मिल सकता है।

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मजबूत नियामकीय ढांचा बना आधार

बरमूडा पहले से ही डिजिटल एसेट बिजनेस एक्ट (2018) के तहत क्रिप्टो कंपनियों को लाइसेंस देने वाला अग्रणी क्षेत्र रहा है। यहां की नियामक संस्था चरणबद्ध लाइसेंस प्रणाली के माध्यम से नई तकनीकों का नियंत्रित परीक्षण करने की अनुमति देती है। छोटा देश होने के कारण सरकारी एजेंसियों, बैंकों और व्यवसायों के बीच समन्वय आसान है, जिससे नई वित्तीय तकनीकों का परीक्षण तेजी से किया जा सकता है।

वैश्विक वित्तीय प्रणाली के लिए संकेत

विश्लेषकों का मानना है कि बरमूडा का प्रयोग यह दिखा सकता है कि भविष्य की डिजिटल अर्थव्यवस्था क्रिप्टो सट्टेबाजी नहीं बल्कि इन्फ्रास्ट्रक्चर अपग्रेड पर आधारित होगी। यदि यह मॉडल सफल रहा तो अन्य देश भी बिना कानूनी जोखिम लिए ब्लॉकचेन आधारित भुगतान प्रणाली अपनाने पर विचार कर सकते हैं। 

निष्कर्ष

बरमूडा का ऑनचेन इकोनॉमी प्रयोग डिजिटल वित्त के विकास में एक संतुलित और व्यावहारिक दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है। क्रिप्टो को अनिवार्य बनाने के बजाय विश्वास, नियमन और उपयोगिता पर आधारित यह मॉडल भविष्य में वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं के लिए सुरक्षित ब्लूप्रिंट साबित हो सकता है जहां तकनीक बदलाव थोपती नहीं, बल्कि धीरे-धीरे स्वीकार्य बनती है।

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