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Rajeev Ranjan Roy
लेखक: Rajeev Ranjan Royस्टाफ लेखक
Pratik Bhuyan
Pratik Bhuyan द्वारा समीक्षितस्टाफ संपादक

बिटकॉइन ने 10 वर्ष में सोना-चांदी को पीछे छोड़ा, भविष्य पर बहस तेज

पिछले 10 वर्षों में बिटकॉइन का रिटर्न सोना और चांदी से कई गुना अधिक रहा है। हालांकि अस्थिरता और स्थिरता को लेकर विश्लेषकों में मतभेद बना हुआ है।

बिटकॉइन ने 10 वर्ष में सोना-चांदी को पीछे छोड़ा, भविष्य पर बहस तेज
बाज़ार विश्लेषण

बिटकॉइन (BTC) ने पिछले दस वर्षों के दौरान सोना और चांदी जैसे पारंपरिक सुरक्षित निवेश विकल्पों को रिटर्न के मामले में काफी पीछे छोड़ दिया है। विश्लेषक एडम लिविंगस्टोन के अनुसार बिटकॉइन 2015 से अब तक लगभग 27,701 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज कर चुका है, जबकि इसी अवधि में सोने में केवल 283 प्रतिशत तथा चांदी में 405 प्रतिशत का ही उछाल आया है।

यह आंकड़ा बताता है कि बिटकॉइन ने दशकीय प्रदर्शन में पारंपरिक धातुओं को बहुतेरे परिमाणों से पछाड़ दिया है। हालांकि कुछ निवेश विशेषज्ञों का कहना है कि इस तुलना को केवल दस वर्ष के व्यापक समय में ही देखना चाहिए, क्योंकि छोटे समय अवधि में बिटकॉइन की कीमतें उतार-चढ़ाव का सामना करती है।

क्या बिटकॉइन सुरक्षित निवेश बन चुका है?

विश्लेषकों के बीच यह बहस भी उभर रही है कि क्या बिटकॉइन को सुरक्षित निवेश के रूप में समान रूप से मापा जा सकता है, क्योंकि सोना और चांदी दशकों से मुद्रास्फीति तथा आर्थिक अनिश्चितता के समय निवेशकों के लिए परंपरागत आश्रय रहे हैं। कुछ आलोचक बताते हैं कि पिछले चार वर्षों में सोना और चांदी ने बेहतर स्थिरता दिखाई है, जबकि बिटकॉइन की समय-समय पर अस्थिरता अधिक रही है।

वित्तीय बाजारों में इस बहस का महत्व इसलिए बढ़ गया है क्योंकि 2025 में सोना और चांदी की कीमतों ने भी ऐतिहासिक ऊँचाइयाँ छुई हैं। सोने की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच चुकी हैं और चांदी ने कई निवेशकों को आकर्षित करते हुए अपनी मांग में तेज़ी दिखाई है।

समर्थकों और आलोचकों के तर्क

समर्थक और आलोचक दोनों अपने-अपने तर्क पेश कर रहे हैं। बिटकॉइन (BTC) समर्थकों का कहना है कि इसकी स्थिर सीमित आपूर्ति और ब्लॉकचेन तकनीक इसे मुद्रास्फीति के खिलाफ अधिक प्रभावी बनाती है। इसके विपरीत पारंपरिक धातुओं के समर्थक इसे वास्तविक संपत्ति मानते हैं और इसका उपयोग औद्योगिक व आभूषण दोनों क्षेत्रों में होने के कारण मानते हैं कि यह दीर्घकालिक निवेश के लिए अधिक विश्वसनीय है।

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हालाँकि 2025 के अंत में अमेरिकी डॉलर सूचकांक में गिरावट ने याद दिलाया है कि मुद्रास्फीति-रोधी संपत्तियों की माँग बढ़ सकती है। डॉलर के कमजोर होने से निवेशकों ने दुर्लभ संपत्तियों की तरफ रुख किया है, जिससे सोना, चांदी और डिजिटल संपत्ति बिटकॉइन, तीनों की कीमतों में वृद्धि देखने को मिली है।

2025 में बदला निवेश परिदृश्य

विश्लेषकों का कहना है कि यह रुझान आगे भी जारी रह सकता है, विशेषकर यदि वैश्विक अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता बनी रहती है। कुछ निवेशक मानते हैं कि सोना और चांदी में हाल की तेजी ने इन धातुओं को फिर से निवेशकों की प्राथमिकताओं में स्थान दिलाया है, जबकि बिटकॉइन जैसे डिजिटल संपत्ति ने जोखिम-सहमति वाले निवेशकों को आकर्षित किया है।

इसके अलावा, विश्लेषण यह भी दर्शाता है कि औद्योगिक गतिविधियों और तकनीकी उपयोग के कारण चांदी की मांग काफी बढ़ रही है, जिससे इसकी आपूर्ति-मांग में अंतर और कीमतों पर दबाव बन रहा है।

निष्कर्ष

कुल मिलाकर, बिटकॉइन ने पिछले दस वर्षों में सोना और चांदी की पारंपरिक सुरक्षित निवेश धारणा को चुनौती दी है और अपने अधिकतम रिटर्न के साथ निवेशकों का ध्यान खींचा है। हालांकि सोना और चांदी भी अपने-अपने रिटर्न और सुरक्षित संपत्ति के रूप में अपनी भूमिका को कायम रखें हुए हैं।

विशेषज्ञों का मत विभाजित है - कुछ बिटकॉइन को भविष्य का सुरक्षित निवेश मानते हैं, जबकि अन्य पारंपरिक धातुओं की दीर्घकालिक स्थिरता पर ज़ोर देते हैं। इस प्रकार, निवेशकों के लिए यह आवश्यक है कि वे अपने लक्ष्यों, जोखिम-सहनशीलता और समय-अवधि को ध्यान में रखते हुए सही निवेश निर्णय लें।

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