चीन ने डिजिटल संपत्तियों को लेकर अपने कठोर रुख को और मजबूत करते हुए स्टेबलकॉइन और वास्तविक दुनिया की संपत्तियों से जुड़े टोकन जारी करने पर व्यापक प्रतिबंध लागू कर दिया है।
चीन के पीपुल्स बैंक और सात अन्य प्रमुख नियामक विभागों द्वारा संयुक्त रूप से जारी दिशा-निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि युआन से जुड़े किसी भी प्रकार के स्टेबलकॉइन या वास्तविक संपत्ति टोकन को बिना सरकारी अनुमति जारी करना अवैध माना जाएगा।
क्रिप्टो आधारित वित्तीय प्रयोगों पर किसी भी तरह की ढील नहीं
नए निर्देशों के अनुसार यह प्रतिबंध केवल चीन के भीतर संचालित संस्थाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि विदेशों में पंजीकृत वे कंपनियाँ भी इसके दायरे में आएंगी जो किसी भी रूप में युआन आधारित डिजिटल टोकन जारी करती हैं। इससे यह साफ हो गया है कि चीन अब क्रिप्टो आधारित वित्तीय प्रयोगों पर किसी भी तरह की ढील देने के मूड में नहीं है।
नियामकों का कहना है कि स्टेबलकॉइन, जो मूल्य स्थिरता का दावा करते हैं, व्यवहार में पारंपरिक मुद्रा जैसे कार्य करने लगते हैं। इससे मौद्रिक नीति, भुगतान प्रणाली और पूंजी नियंत्रण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। चीन का मानना है कि यदि ऐसे टोकन बिना निगरानी के प्रचलन में आते हैं तो इससे वित्तीय प्रणाली में अस्थिरता, सट्टेबाज़ी और धोखाधड़ी बढ़ सकती है।
वास्तविक संपत्ति टोकन अवैध वित्तीय गतिविधियों की श्रेणी में
इसी तरह वास्तविक संपत्ति टोकन, जिन्हें आम तौर पर भवन, ऋण, बांड या अन्य भौतिक संपत्तियों से जोड़ा जाता है, को भी अवैध वित्तीय गतिविधियों की श्रेणी में रखा गया है यदि वे बिना स्वीकृति के जारी किए जाते हैं। चीनी अधिकारियों का तर्क है कि इस प्रकार के टोकन आम निवेशकों को भ्रमित कर सकते हैं और बड़े पैमाने पर वित्तीय जोखिम पैदा कर सकते हैं।
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विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम चीन की डिजिटल युआन रणनीति से भी सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है। चीन लंबे समय से राज्य-समर्थित डिजिटल मुद्रा को बढ़ावा दे रहा है और निजी या अर्ध-निजी स्टेबलकॉइन को उसके विकल्प के रूप में उभरने नहीं देना चाहता। स्टेबलकॉइन पर सख्ती से डिजिटल युआन के लिए मार्ग और अधिक स्पष्ट हो जाता है।
वैश्विक डिजिटल संपत्ति बाजारों में हलचल
नए नियमों में यह भी कहा गया है कि चीनी कंपनियाँ अपनी विदेशी सहायक इकाइयों के माध्यम से भी युआन आधारित स्टेबलकॉइन या वास्तविक संपत्ति टोकन जारी नहीं कर सकती। इससे पहले कई कंपनियाँ विदेशी ढांचे का उपयोग कर ऐसे प्रोजेक्ट शुरू करने की कोशिश कर रही थी, लेकिन अब उस रास्ते को भी बंद कर दिया गया है।
इस घोषणा के बाद वैश्विक डिजिटल संपत्ति बाजारों में हलचल देखी गई। निवेशकों में अनिश्चितता बढ़ी और कई विश्लेषकों ने इसे एशिया से निकलने वाले क्रिप्टो पूंजी प्रवाह के लिए एक बड़ा झटका बताया। हालांकि चीन का रुख स्पष्ट है कि वह वित्तीय नियंत्रण और मुद्रा संप्रभुता के मामले में किसी तरह का समझौता नहीं करेगा।
निष्कर्ष
चीन द्वारा स्टेबलकॉइन और वास्तविक संपत्ति टोकन पर लगाया गया यह प्रतिबंध उसके सख्त वित्तीय नियमन की दिशा को और मजबूत करता है। यह फैसला न केवल देश की आंतरिक आर्थिक सुरक्षा को प्राथमिकता देता है, बल्कि वैश्विक डिजिटल संपत्ति बाजार को भी स्पष्ट संकेत देता है कि चीन राज्य-नियंत्रित डिजिटल युआन के अलावा किसी समानांतर डिजिटल मुद्रा व्यवस्था को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है।
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