दुनिया भर के क्रिप्टोकरेंसी बाजार में फरवरी 2026 की शुरुआत भारी अस्थिरता के साथ हुई है, जहां बाजार भावना 2022 के लुना क्रैश के बाद सबसे निचले स्तर तक पहुंच गई है। प्रमुख डिजिटल मुद्रा बिटकॉइन की कीमत लगभग $60,000 तक गिर गई, जो अक्टूबर 2024 के बाद का सबसे कम स्तर है। इस गिरावट के साथ ही क्रिप्टो डर-और-लोभ सूचकांक अत्यधिक डर तक आ गया, जो पिछले तीन-से-ढाई वर्षों में सबसे खराब मानी जा रही भावना को इंगित करता है।
आर्थिक और तकनीकी कारण
क्रिप्टो बाजार विश्लेषकों का कहना है कि यह गिरावट अचानक नहीं आई, बल्कि कई आर्थिक और तकनीकी कारण इसके पीछे काम कर रहे हैं। बिटकॉइन ने 2026 में अपने उच्च स्तर $97,000 से सिर्फ तीन हफ्तों में लगभग 38 प्रतिशत की गिरावट का अनुभव किया, जिससे पिछले सोलह महीनों की सभी बढ़त खराब हो गई।
विशेषज्ञों के अनुसार अमेरिकी तकनीकी शेयरों में गिरावट और आर्थिक संकेतकों पर अनिश्चितता जैसे कारक इस मंदी के मुख्य कारण हैं। अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीति, रोजगार डेटा में ढील, और निवेशकों के बीच जोखिम-से बचने की प्रवृत्ति ने बिटकॉइन और अन्य क्रिप्टोकरेंसी की मांग को प्रभावित किया है। निवेशक अब क्रिप्टो को सोने जैसे सुरक्षित आवास विकल्प के रूप में नहीं देख रहे हैं, जिससे विक्रेता दबाव और बढ़ गया।
बाजार गिरावट का बिटकॉइन तक सीमित नहीं
इस बाजार गिरावट का प्रभाव विशुद्ध रूप से बिटकॉइन तक सीमित नहीं रहा है। अल्टकॉइन और अन्य डिजिटल मुद्राओं में भी भारी गिरावट दर्ज की गई है। ट्रेडिंग डेटा से पता चलता है कि पिछले 24 घंटों में लगभग 588,000 से अधिक व्यापारी अपनी स्थिति खो बैठे, जिनमें से 85 प्रतिशत ही बिटकॉइन में लीवरेज्ड लॉन्ग पोजीशन पर निवेश किए हुए थे। कुल मिलाकर लगभग $2.7 अरब की पोजीशन समाप्त हुई, जिससे क्रिप्टो बाजार में और अस्थिरता उत्पन्न हुई।
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जहां एक ओर बिटकॉइन को लेकर बाजार में डर का माहौल है, वहीं कुछ विशेषज्ञ इसका सकारात्मक पक्ष भी देखते हैं। वे मानते हैं कि अत्यधिक डर स्थिति में खरीदारी का अच्छा अवसर भी बन सकती है, विशेषकर उन निवेशकों के लिए जो दीर्घकालिक दृष्टिकोण रखते हैं। हालांकि, इस दृष्टिकोण को अपनाने से पहले जोखिम प्रबंधन और बाजार की गहन समझ आवश्यक है।
भारतीय निवेशकों के लिए भी चिंता
भारतीय निवेशकों के लिए भी यह गिरावट चिंता का विषय बनी हुई है। भारत में क्रिप्टोकरेंसी के लेन-देन का रुख पिछले वर्षों में बदलता हुआ देखा गया है। वित्त वर्ष 2024-25 में भारतीय निवेशकों का लगभग 72 प्रतिशत क्रिप्टो ट्रेडिंग विदेशी मंचों पर हुआ, जिससे घरेलू प्लेटफॉर्म्स पीछे छूटते नजर आए।
इसके प्रमुख कारणों में उच्च कर दरें और जटिल नियम शामिल हैं, जो निवेशकों को विदेशों के मंचों की ओर धकेल रहे हैं। वर्तमान बाजार स्थितियों ने पारंपरिक निवेश विकल्पों जैसे सोने और चांदी पर भी दबाव डाला है। चांदी की कीमतों में भी भारी गिरावट दर्ज की गई है, जिससे निवेशकों के बीच जोखिम-प्रतिकूल रवैया और बढ़ा है।
बाजार में भारी उतार-चढ़ाव के बावजूद कुछ विश्लेषक मानते हैं कि क्रिप्टो बाजार की मौलिक भूमिका और प्रौद्योगिकीय विकास अभी भी मजबूत है। दीर्घकालिक निवेशक मानते हैं कि समय के साथ बाजार का संतुलन वापस आएगा, बशर्ते वैश्विक आर्थिक संकेतकों में स्थिरता कायम रहे।
निष्कर्ष
वर्तमान क्रिप्टो बाजार की स्थिति यह दर्शाती है कि डिजिटल मुद्रा निवेश अत्यधिक अस्थिर है और इससे जुड़ी भावना बाजार की दिशा को व्यापक रूप से प्रभावित कर सकती है। बिटकॉइन की गिरावट और भावना सूचकांक का सबसे निचला स्तर इस बात का संकेत है कि निवेशकों को सावधानी से निर्णय लेने की आवश्यकता है। दीर्घकालिक निवेशकों के लिए यह अवसर हो सकता है, लेकिन जोखिम-प्रबंधन और बाजार का गहन अध्ययन अभी भी आवश्यक है।
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