अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियाँ और बयानबाजियां अब क्रिप्टो बाजार के लिए एक महत्त्वपूर्ण कारक बन गई है, खासकर बिटकॉइन जैसी प्रमुख डिजिटल संपत्ति की कीमत को प्रभावित करने में प्रमुख भूमिका निभा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार ट्रंप के हर फैसले से बिटकॉइन की कीमत पर पारा ऊपर-नीचे होता रहा है, जिससे वैश्विक बाजार में निवेशकों को कई बार आश्चर्य भी हुआ है।
World Liberty Financial की खरीदारी का प्रभाव
ट्रंप के सत्ता में लौटने के बाद जनवरी 2025 में उनके समर्थित समूह World Liberty Financial ने बिटकॉइन (BTC) सहित कई डिजिटल टोकनों में भारी खरीदारी की।
इस कदम के 24 घंटों के भीतर बिटकॉइन कीमत में लगभग 4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इससे संकेत मिला कि राजनीतिक रूप से जुड़े निवेश भी बाजार भावना को प्रभावित कर सकते हैं।
डिजिटल एसेट कार्यसमूह का गठन
जनवरी 2025 में ट्रंप प्रशासन ने डिजिटल संपत्तियों के लिए राष्ट्रपति कार्यसमूह के गठन पर हस्ताक्षर किए। इस कदम को क्रिप्टो नियमन में स्पष्टता की दिशा में सकारात्मक माना गया, जिसके बाद Bitcoin में सीमित लेकिन सकारात्मक प्रतिक्रिया देखी गई।
क्रिप्टो रिजर्व प्रस्ताव और मिश्रित प्रतिक्रिया
मार्च 2025 में संयुक्त डिजिटल संपत्ति भंडार या क्रिप्टो रिजर्व के प्रस्ताव की घोषणा की गई।
हालांकि घोषणा के तुरंत बाद बिटकॉइन कीमत में मिश्रित प्रतिक्रिया देखने को मिली। यह स्पष्ट हुआ कि नीतिगत घोषणाएं तत्काल स्थिरता की गारंटी नहीं देतीं।
ट्रेड टैरिफ और आर्थिक प्रभाव
अप्रैल 2025 में ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए नए ट्रेड टैरिफ के बाद वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बढ़ी।
इस दौरान बिटकॉइन सहित कई क्रिप्टोकरेंसी की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। हाल के हफ्तों में बिटकॉइन 65,000 डॉलर से नीचे फिसलकर फिर रिकवर करता दिखा, जिससे राजनीतिक निर्णयों और बाजार भावना के बीच सीधा संबंध सामने आया।
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राजनीतिक निर्णय से क्रिप्टो बाजार भी प्रभावित
हाल ही में, ट्रंप प्रशासन की नई ट्रेड नीति और वैश्विक अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता के बीच बिटकॉइन की कीमत कुछ दिनों के अंतराल में 65,000 डॉलर से नीचे तक गिरते और फिर वापसी करते हुए देखा गया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि राजनीतिक निर्णय सीधे आर्थिक बाजारों के साथ-साथ क्रिप्टो बाजार को भी प्रभावित कर रहे हैं।
क्रिप्टो विशेषज्ञों का मानना है कि जब ट्रंप या उनके समर्थक समूह बिटकॉइन जैसी डिजिटल संपत्तियों के बारे में सकारात्मक संकेत देते हैं तो बाजार में तेजी आती है, और जब सरकारी नीतियों या वैश्विक व्यापार तनाव जैसी स्थितियाँ उत्पन्न होती हैं तो निवेशक सुरक्षित परिसंपत्तियों की ओर रुख करते हैं, जिससे बिटकॉइन की कीमत में गिरावट दिखाई देती है।
क्या दीर्घकालिक असर होगा?
विश्लेषकों का मानना है कि Bitcoin केवल राजनीतिक बयानबाजी पर निर्भर एसेट नहीं है। इसके मूल्य निर्धारण में वैश्विक तरलता, ब्याज दरें, संस्थागत निवेश, जोखिम भावना और आर्थिक संकेतक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
हालांकि, राजनीतिक स्थिरता या अस्थिरता अल्पकालिक मूल्य चाल में महत्वपूर्ण कारक बन सकती है।
निष्कर्ष
ट्रंप प्रशासन के निर्णय और बयानबाज़ियाँ बिटकॉइन की कीमत को प्रभावित करने वाले एक महत्वपूर्ण तत्व बन चुके हैं। हालांकि कभी सकारात्मक प्रभाव से बाजार में तेजी आई है, वहीं कुछ नीतिगत निर्णयों से कीमत में गिरावट और अनिश्चितता भी देखी गई है। विशेषज्ञों के अनुसार निवेशकों को सिर्फ राजनीतिक संकेतों के आधार पर निर्णय लेने के बजाय व्यापक आर्थिक संकेतकों और बाजार विश्लेषण पर ध्यान देना चाहिए ताकि वे बेहतर निवेश रणनीति तैयार कर सकें और क्रिप्टो बाजार की अस्थिरता से सुरक्षित रह सकें।
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