अमेरिका के प्रतिष्ठित Harvard (हार्वर्ड) विश्वविद्यालय ने अपने डिजिटल मुद्रा निवेश में महत्वपूर्ण रणनीतिक बदलाव किया है। विश्वविद्यालय की निवेश प्रबंधन इकाई ने बिटकॉइन आधारित विनिमय-व्यापार कोष में अपनी हिस्सेदारी कम कर दी है, जबकि पहली बार एथेरियम आधारित कोष में बड़ा निवेश किया है। इस कदम को वैश्विक संस्थागत निवेशकों की बदलती प्राथमिकताओं का संकेत माना जा रहा है।
नियामक अभिलेखों के अनुसार, विश्वविद्यालय की प्रबंधन कंपनी ने वर्ष 2025 की चौथी तिमाही में बिटकॉइन आधारित कोष में अपने हिस्से को लगभग 20% से 21% तक घटा दिया। इसके साथ ही उसने एथेरियम आधारित कोष में लगभग $86.8 मिलियन यानी करीब 720 करोड़ रुपये से अधिक का नया निवेश किया।
विश्वविद्यालय ने लगभग 39 लाख शेयर खरीदे
रिपोर्टों के अनुसार, विश्वविद्यालय ने एथेरियम आधारित कोष के लगभग 39 लाख शेयर खरीदे, जो इस डिजिटल परिसंपत्ति में उसका पहला प्रत्यक्ष निवेश है। इससे यह स्पष्ट होता है कि संस्थान अब अपने निवेश को केवल बिटकॉइन तक सीमित नहीं रखना चाहता, बल्कि अन्य प्रमुख डिजिटल परिसंपत्तियों में भी अवसर तलाश रहा है।
हालांकि हिस्सेदारी घटाने के बावजूद बिटकॉइन आधारित कोष अब भी हार्वर्ड के डिजिटल परिसंपत्ति पोर्टफोलियो का सबसे बड़ा हिस्सा बना हुआ है, जिसकी कुल अनुमानित कीमत लगभग $265.8 मिलियन बताई गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम जोखिम संतुलन और दीर्घकालिक लाभ की रणनीति का हिस्सा हो सकता है। डिजिटल मुद्रा बाजार में एथेरियम को तकनीकी उपयोगिता और स्मार्ट अनुबंधों के कारण अधिक विविध अवसरों वाला मंच माना जाता है, जिससे बड़े संस्थान इसमें रुचि दिखा रहे हैं।
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हार्वर्ड ने पहले भी कोष में भारी निवेश किया था
गौरतलब है कि हार्वर्ड ने इससे पहले भी बिटकॉइन आधारित कोष में भारी निवेश किया था। वर्ष 2025 में एक समय इस कोष में उसकी हिस्सेदारी बढ़कर $442.8 मिलियन तक पहुंच गई थी, जिससे यह उसके प्रमुख निवेशों में शामिल हो गया था।
विश्लेषकों के अनुसार, इस तरह का पुनर्संतुलन यह दर्शाता है कि बड़े संस्थागत निवेशक अब डिजिटल परिसंपत्तियों को स्थायी निवेश वर्ग के रूप में देख रहे हैं। साथ ही वे जोखिम को कम करने के लिए विभिन्न डिजिटल मुद्राओं में निवेश को विभाजित कर रहे हैं।
यह कदम वैश्विक वित्तीय बाजारों के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि हार्वर्ड जैसे प्रतिष्ठित संस्थान के निवेश निर्णय अक्सर अन्य संस्थागत निवेशकों के लिए संकेतक का काम करते हैं। इससे आने वाले समय में एथेरियम आधारित निवेश को और बढ़ावा मिल सकता है।
निष्कर्ष
हार्वर्ड विश्वविद्यालय द्वारा बिटकॉइन निवेश में कटौती और एथेरियम में पहली बार बड़ा निवेश डिजिटल मुद्रा बाजार में बदलते विश्वास और रणनीति का स्पष्ट संकेत है। यह कदम दर्शाता है कि बड़े संस्थान अब अधिक संतुलित और विविध डिजिटल निवेश की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं, जिससे भविष्य में एथेरियम की संस्थागत स्वीकार्यता और बढ़ सकती है।
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