मध्य-पूर्व में बढ़ते भूराजनैतिक तनाव का असर अब वैश्विक वित्तीय बाजारों पर साफ दिखाई देने लगा है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा ईरान को दी गई कड़ी चेतावनी के बाद निवेशकों के बीच अनिश्चितता और भय का माहौल बन गया है।
ट्रम्प ने संकेत दिए हैं कि यदि ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय गतिविधियों को लेकर रुख नहीं बदला, तो अमेरिका की अगली सैन्य कार्रवाई पहले से कहीं अधिक कठोर हो सकती है।
इस बयान के बाद जोखिमपूर्ण निवेश माध्यमों में बिकवाली का दबाव बढ़ गया है। विशेष रूप से बिटकॉइन जैसी डिजिटल मुद्राएं, जिन्हें हाल के वर्षों में वैकल्पिक निवेश के रूप में देखा जा रहा था, अचानक दबाव में आ गई हैं। बाजार के आंकड़ों के अनुसार, बिटकॉइन की कीमत महत्वपूर्ण स्तरों से नीचे फिसलती हुई देखी गई, जिससे निवेशकों की चिंता और बढ़ गई।
बिटकॉइन और डिजिटल मुद्राएं दबाव में
भूराजनैतिक अनिश्चितता बढ़ते ही निवेशकों ने उच्च-जोखिम परिसंपत्तियों से दूरी बनानी शुरू कर दी। इसका सीधा असर Bitcoin सहित प्रमुख डिजिटल मुद्राओं पर पड़ा, जिनकी कीमतें महत्वपूर्ण तकनीकी स्तरों से नीचे फिसलती दिखीं।
बाजार विश्लेषकों के अनुसार, ऐसे हालात में क्रिप्टोकरेंसी अब भी “रिस्क एसेट” की तरह व्यवहार करती हैं, न कि पारंपरिक सुरक्षित निवेश की तरह। इसी कारण वैश्विक तनाव बढ़ते ही इनमें तेज़ उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है।
शेयर बाजार और डिजिटल मुद्राएं दबाव में
विशेषज्ञों का मानना है कि जब भी वैश्विक स्तर पर युद्ध या सैन्य टकराव की आशंका बढ़ती है, निवेशक जोखिम उठाने से बचते हैं और सुरक्षित निवेश की ओर रुख करते हैं। यही कारण है कि ऐसे समय में सोना, डॉलर और सरकारी ऋण पत्रों की मांग बढ़ जाती है, जबकि शेयर बाजार और डिजिटल मुद्राएं दबाव में आ जाती हैं।
मध्य पूर्व में स्थिति इसलिए भी अधिक संवेदनशील मानी जा रही है क्योंकि ईरान रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण हॉर्मुज जलडमरूमध्य के निकट स्थित है। यह जलमार्ग वैश्विक कच्चे तेल आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा संभालता है। यदि तनाव के चलते इस मार्ग में कोई व्यवधान आता है, तो तेल कीमतों में तेज उछाल संभव है। हाल के दिनों में कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी इसी आशंका को दर्शाती है।
वैश्विक महंगाई
तेल की कीमतों में वृद्धि का सीधा असर वैश्विक महंगाई पर पड़ सकता है। ऐसी स्थिति में केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख अपना सकते हैं, जिससे बाजार में तरलता घटेगी। इसका नकारात्मक प्रभाव बिटकॉइन जैसी उन परिसंपत्तियों पर पड़ता है, जिनकी कीमत काफी हद तक निवेशकों की धारणा और तरल पूंजी पर निर्भर करती है।
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हालांकि कुछ विश्लेषकों का यह भी कहना है कि प्रारंभिक झटकों के बाद डिजिटल मुद्रा बाजार स्वयं को संतुलित कर लेता है। अतीत में भी यह देखा गया है कि बड़े भू-राजनीतिक संकटों के दौरान बिटकॉइन पहले गिरावट का सामना करता है, लेकिन बाद में धीरे-धीरे स्थिरता प्राप्त कर लेता है। इसके बावजूद, अल्पकालिक निवेशकों के लिए जोखिम बना रहता है।
क्या बिटकॉइन सुरक्षित निवेश बन सकता है?
इस घटनाक्रम के बीच यह बहस फिर तेज हो गई है कि क्या बिटकॉइन वास्तव में सुरक्षित निवेश (Safe Haven) बन सकता है। समर्थकों का तर्क है कि सीमित आपूर्ति और सरकारी नियंत्रण से स्वतंत्रता इसे दीर्घकाल में मजबूत बनाती है।
वहीं आलोचकों का मानना है कि मौजूदा बाजार व्यवहार दिखाता है कि बिटकॉइन अब भी वैश्विक जोखिम भावना के साथ चलता है और भू-राजनीतिक संकटों में सबसे पहले दबाव में आता है।
इतिहास बताता है कि शुरुआती झटकों के बाद डिजिटल मुद्रा बाजार अक्सर स्वयं को स्थिर कर लेता है, लेकिन अल्पकालिक निवेशकों के लिए अस्थिरता का जोखिम बना रहता है।
निष्कर्ष
ईरान को लेकर बढ़ता भूराजनैतिक तनाव और अमेरिका की संभावित सैन्य कार्रवाई की आशंका ने बिटकॉइन सहित डिजिटल मुद्रा बाजार को अस्थिर कर दिया है। मौजूदा हालात यह स्पष्ट करते हैं कि वैश्विक राजनीतिक घटनाएं डिजिटल मुद्राओं को भी गहराई से प्रभावित करती हैं। ऐसे में निवेशकों के लिए सतर्कता, संतुलन और दीर्घकालिक दृष्टिकोण अपनाना अत्यंत आवश्यक हो गया है।
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