संयुक्त राज्य अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को की एक संघीय अदालत में अंतरराष्ट्रीय व्हाट्सऐप उपयोगकर्ताओं ने मेटा प्लेटफॉर्म्स और व्हाट्सऐप के खिलाफ एक बड़ा मुकदमा दायर किया है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि कंपनी ने अपने संदेश सेवा की गोपनीयता के दावों को भ्रामक तरीके से पेश किया है।
प्राथमिकी के अनुसार कंपनी अपनी “एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन” तकनीक सिर्फ दिखावे के लिए इस्तेमाल करती है, जबकि वास्तविकता में मेटा कर्मचारी उपयोगकर्ताओं के निजी संदेशों को पढ़ तथा विश्लेषण कर सकते हैं।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि मेटा के अंदरूनी उपकरणों द्वारा संदेश सामग्री तक पहुँच संभव है और कंपनी संदेशों को संग्रहीत तथा विश्लेषित भी करती है। यह आरोप व्हाट्सऐप पर लगे “पूर्ण गोपनीयता” के वादों के विपरीत है, जो यह कहता है कि केवल प्रेषक और प्राप्तकर्ता ही संदेश पढ़ सकते हैं।
मेटा का कड़ा जवाब
मेटा ने इन सभी आरोपों को “बिल्कुल निराधार और अवास्तविक” बताया है। कंपनी के संचार निर्देशक एंडी स्टोन ने स्पष्ट किया कि कोई भी दावा कि व्हाट्सऐप संदेश सुरक्षित नहीं हैं, वह पूरी तरह से गलत है और यह मुकदमा “बेमतलब की कहानी” है। उन्होंने यह भी कहा कि व्हाट्सऐप ने पिछले कई वर्षों से एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन का उपयोग कर रहा है, जिससे संदेश सिर्फ उपयोगकर्ताओं के उपकरणों पर ही पढ़े जा सकते हैं।
व्हाट्सऐप प्रमुख विल कैथकार्ट ने भी इस विवाद पर अपनी प्रतिक्रिया दी और कहा कि यह मामला “कोई योग्यता नहीं रखता” तथा फर्जी समाचार फैलाने के उद्देश्य से बनाया गया है। कैथकार्ट ने यह भी बताया कि व्हाट्सऐप उन तकनीकी कुंजियों को उपयोग करता है जो केवल प्रेषक और प्राप्तकर्ता के फ़ोन पर ही मौजूद रहती हैं, जिससे कंपनी के पास संदेश को डिक्रिप्ट करने का कोई साधन नहीं है।
टेक समुदाय और सार्वजनिक प्रतिक्रियाएँ
इस विवाद के बीच, अलग-अलग तकनीकी समुदायों और विशेषज्ञों ने भी अपने विचार व्यक्त किए हैं। कुछ व्यक्तियों और प्रतिस्पर्धी प्लेटफार्मों के प्रमुखों ने व्हाट्सऐप की संरक्षित एन्क्रिप्शन तकनीक पर सवाल उठाए हैं और कहा है कि तकनीकी प्रणाली में कुछ कमजोरियाँ हो सकती हैं।
वहीं, सोशल मीडिया पर भी यह मामला जनता और उपयोगकर्ताओं के लिए चिंता का विषय बन गया है, क्योंकि लाखों लोग रोज़ाना व्हाट्सऐप पर निजी और संवेदनशील जानकारी साझा करते हैं। ऐसे में यह विवाद गोपनीयता और डेटा सुरक्षा के मुद्दों पर एक बड़ा बहस का कारण बन गया है।
विशेषज्ञों का दृष्टिकोण
तकनीकी विश्लेषकों का कहना है कि व्हाट्सऐप की “एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन” प्रणाली विश्वभर में व्यापक रूप से उपयोग की जाती है और इसे एक मानक के रूप में माना जाता है। यह प्रणाली संदेशों को केवल भेजने और प्राप्त करने वाले उपकरणों तक ही पहुँचने देती है और किसी मध्यस्थ को पढ़ने की अनुमति नहीं देती। हालांकि, यह भी कहा जाता है कि किसी भी तकनीक में पूरी सुरक्षा की गारंटी नहीं होती और उपयोगकर्ताओं को सतर्क रहना चाहिए।
निष्कर्ष
वर्तमान विवाद यह स्पष्ट करता है कि डिजिटल युग में गोपनीयता और डेटा सुरक्षा अत्यंत महत्वपूर्ण मुद्दे बन चुके हैं। जबकि व्हाट्सऐप और उसकी मूल कंपनी मेटा ने अपने संदेश सुरक्षा ढांचे का समर्थन करते हुए आरोपों को खारिज किया है, यह मुकदमा तकनीकी और कानूनी स्तर पर लंबी लड़ाई का रूप ले सकता है। उपयोगकर्ताओं के लिए यह समय है कि वे अपनी ऑनलाइन गोपनीयता के अधिकारों और सुरक्षा उपायों पर अधिक जागरूक और सतर्क बनें।
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