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Rajeev Ranjan Roy
लेखक: Rajeev Ranjan Royस्टाफ लेखक
Pratik Bhuyan
Pratik Bhuyan द्वारा समीक्षितस्टाफ संपादक

क्वांटम कंप्यूटिंग के बढ़ते खतरे से बिटकॉइन की सुरक्षा पर सवाल

क्वांटम कंप्यूटिंग की प्रगति से बिटकॉइन की एन्क्रिप्शन प्रणाली खतरे में है और कुछ बाजार विश्लेषक इसे बिटकॉइन की कीमत पर प्रभावकारक मानते हैं, जबकि अन्य इसे बाजार की मौजूदा कमजोरियों से जोड़ते हैं।

क्वांटम कंप्यूटिंग के बढ़ते खतरे से बिटकॉइन की सुरक्षा पर सवाल
विश्लेषण

दुनिया की प्रमुख क्रिप्टोकरेंसी बिटकॉइन के सामने क्वांटम कंप्यूटिंग से जुड़ा खतरा एक गरम विषय बन गया है। कुछ निवेश विशेषज्ञ और रणनीतिकार यह चेतावनी दे रहे हैं कि क्वांटम कंप्यूटिंग, जो परंपरागत कंप्यूटरों से कहीं अधिक तेज़ी से गणनाएँ कर सकता है, भविष्य में बिटकॉइन की सुरक्षा प्रणाली को चुनौती दे सकता है और इसके मूल्य पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है।

बिटकॉइन अपने क्रिप्टोग्राफिक एल्गोरिदम ECDSA और SHA-256 पर निर्भर करता है जो वर्तमान में क्लासिकल कंप्यूटरों के लिए बेहद सुरक्षित माने जाते हैं। लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार क्वांटम कंप्यूटर्स में प्रयुक्त शोर के जैसे विशिष्ट एल्गोरिदम इन सुरक्षा उपायों को खतरे में डाल सकते हैं।

संभावित जोखिम क्या हो सकता है?

विश्लेषकों के अनुसार, यदि क्वांटम कंप्यूटिंग पर्याप्त शक्तिशाली बनती है, तो:

  • सार्वजनिक कुंजी से निजी कुंजी निकाली जा सकती है

  • पहले इस्तेमाल किए गए बिटकॉइन पते जोखिम में आ सकते हैं

  • बड़ी मात्रा में BTC चोरी का खतरा उत्पन्न हो सकता है

एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस परिदृश्य में चार से छह मिलियन बिटकॉइन तक जोखिम में पड़ सकते हैं, जो कुल आपूर्ति का लगभग 25 प्रतिशत है।

क्या खतरा तात्कालिक है?

हालाँकि, सभी विशेषज्ञ इस खतरे को समान रूप से गंभीर नहीं मानते। कुछ बिटकॉइन समुदाय के सदस्यों और विश्लेषकों का मानना है कि क्वांटम कंप्यूटिंग का प्रत्यक्ष प्रभाव अभी दूर की संभावना है और वर्तमान में बिटकॉइन की कीमत में कमजोरी मुख्यतः लंबी अवधि धारकों द्वारा बिकवाली के कारण है, न कि क्वांटम जोखिम के कारण।

बिटकॉइन और क्वांटम कंप्यूटिंग पर बढ़ती बहस को लेकर Bybit इंडिया के कंट्री मैनेजर विकास गुप्ता ने कहा:

क्वांटम कंप्यूटिंग को अक्सर बिटकॉइन के लिए एक आसन्न (imminent) खतरे के रूप में पेश किया जाता है, लेकिन मौजूदा स्थिति में यह धारणा तथ्यात्मक जोखिम से कहीं अधिक FUD (Fear, Uncertainty, Doubt) लगती है। वर्तमान क्वांटम सिस्टम उस स्तर के नहीं हैं कि वे बिटकॉइन नेटवर्क की क्रिप्टोग्राफिक सुरक्षा को तोड़ सकें। सैद्धांतिक संभावना और व्यावहारिक वास्तविकता के बीच आज भी एक बड़ा फासला है - मौजूदा मशीनों में पैमाना, स्थिरता और एरर करेक्शन की भारी कमी है, जो इन्हें किसी भी सार्थक खतरे में बदलने से रोकती है।क्वांटम जोखिम को लेकर चल रही बहस अब भी काफी हद तक अनुमान आधारित है और दीर्घकालिक है। रिसर्च आगे बढ़ने के साथ अधिकांश विशेषज्ञ इस बात से सहमत हैं कि क्रिप्टोग्राफी को प्रभावित करने वाली क्वांटम कंप्यूटिंग तकनीक से लैस मशीनें अभी कम से कम 10–20 साल दूर हैं। ऐसे में क्वांटम कंप्यूटिंग को एक तात्कालिक और अस्तित्व को चुनौती देने वाले खतरे के रूप में पेश करना निवेशकों और उपयोगकर्ताओं के बीच अनावश्यक डर पैदा कर सकता है और चर्चा को गलत दिशा में मोड़ सकता है।दूसरी और उतनी ही महत्वपूर्ण बात यह है कि बिटकॉइन कोई स्थिर प्रणाली नहीं है। यह अपने नेटवर्क और व्यापक क्रिप्टो इकोसिस्टम के साथ निरंतर विकसित हुआ है। हमारे पास पर्याप्त समय है कि हम रिसर्च को फॉलो करें, गंभीर तकनीकी अध्ययन करें और यदि आवश्यकता हो, तो क्वांटम-रेजिस्टेंट क्रिप्टोग्राफिक मानकों की ओर संक्रमण करें। उद्योग के दृष्टिकोण से यह घबराहट का नहीं, बल्कि तैयारी का विषय होना चाहिए। जिम्मेदार चर्चा वास्तविक तकनीकी तथ्यों और समयसीमा पर आधारित होनी चाहिए - न कि ऐसे काल्पनिक परिदृश्यों पर जिनका आज की तकनीकी सच्चाई से कोई लेना-देना नहीं है।

बाजार और निवेश प्रबंधन में बदलाव

कुछ प्रमुख निवेश सलाहकारों ने बिटकॉइन की दीर्घकालिक सिफारिशों से हटकर अधिक सुरक्षित परिसंपत्तियों जैसे सोना की ओर रुख किया है, जिसका कारण क्वांटम कंप्यूटिंग संबंधित जोखिम को बताया जा रहा है। यह कदम यह संकेत देता है कि पारंपरिक वित्त (ट्रेडिशनल फाइनेंस) कुछ संभावित तकनीकी जोखिमों को गंभीरता से ले रहा है।

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दूसरी ओर, कोइनटेलीग्राफ के स्रोतों के अनुसार बिटकॉइन समर्थक विशेषज्ञ इस नैरेटिव को अतिरंजित मानते हैं और कहते हैं कि मूल तकनीकी सुरक्षा अभी भी मजबूत है और बाजार की अस्थिरता के अन्य कारणों का विश्लेषण अधिक महत्वपूर्ण है।

तकनीकी तैयारी और समाधान

ब्लॉकचेन और सुरक्षा विशेषज्ञ भी क्वांटम खतरों की तैयारी में जुटे हैं। इसके लिए पोस्ट-क्वांटम क्रिप्टोग्राफी, जैसे कि क्वांटम-प्रतिरोधी एल्गोरिदम को विकसित करने और अपनाने पर काम किया जा रहा है। अमेरिकी मानक संस्थान (NIST) ने पहले ही कुछ क्वांटम-सुरक्षित मानकों को प्रकाशित किया है ताकि भविष्य में क्वांटम खतरों का मुकाबला किया जा सके।

भारत जैसे देशों में भी नियामक संगठन क्वांटम-सेफ कंप्यूटिंग कार्य योजनाओं पर काम कर रहे हैं ताकि आने वाले वर्षों में डिजिटल परिसंपत्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। 

कुछ तकनीकी रिपोर्टों में यह भी बताया गया है कि बिटकॉइन जैसा ब्लॉकचेन जल्द ही क्वांटम-प्रतिरोधी समाधानों को अपनाकर अपनी सुरक्षा प्रणाली को मजबूत बना सकता है, जिससे भविष्य के संभावित खतरों से बचा जा सके।

निष्कर्ष

कुल मिलाकर, बिटकॉइन और क्वांटम कंप्यूटिंग के बीच जारी बहस यह स्पष्ट करती है कि तकनीकी प्रगति के साथ जोखिम भी बढ़ रहे हैं। जहाँ कुछ विश्लेषक इसे बिटकॉइन की कीमत और दीर्घकालिक सुरक्षा के लिए संभावित खतरा मानते हैं, वहीं अन्य इसे अभी दूर की संभावना कहते हैं।

विशेषज्ञों का यह सुझाव है कि समय रहते सुरक्षा उन्नयन और क्वांटम-प्रतिरोधी तकनीकों को अपनाना आवश्यक है, ताकि डिजिटल परिसंपत्तियों का भविष्य सुरक्षित रहे और निवेशकों का भरोसा बना रहे।

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