लंदन स्थित वैश्विक निवेश बैंक स्टैण्डर्ड चार्टर्ड ने एक नई रिपोर्ट जारी कर चेतावनी दी है कि स्टेबलकॉइन नामक क्रिप्टोकरेंसी आधारित डिजिटल टोकन अगले कुछ वर्षों में अमेरिकी बैंकों से लगभग $500 अरब डॉलर की जमा राशि खींच सकते हैं, जिसे बैंकिंग क्षेत्र के लिए एक गंभीर जोखिम बताया गया है।
बैंक के डिजिटल एसेट रिसर्च विभाग के प्रमुख जियोफ़ केंड्रिक ने कहा है कि स्टेबलकॉइन, जो अमेरिकी डॉलर के समर्थन वाले डिजिटल टोकन है, पारंपरिक वित्तीय संस्थानों के लिए चुनौती बनते जा रहा है, क्योंकि इनका उपयोग भुगतान, भंडारण और निवेश के रूप में तेजी से बढ़ रहा है।
क्षेत्रीय बैंकों के लिए खतरे का संकेत
रिपोर्ट के अनुसार, यह अनुमानित $500 अरब की राशि मार्च 2028 तक अमेरिकी बैंकों से स्टेबलकॉइन नेटवर्क में स्थानांतरित हो सकती है। यह राशि खासकर क्षेत्रीय बैंकों के लिए खतरे का संकेत देती है, क्योंकि ये बैंक अपनी आय का एक बड़ा हिस्सा जमा पर ब्याज मार्जिन से कमाते हैं, जो अब डिजिटल विकल्पों की ओर स्थानांतरित हो रहा है।
स्टैण्डर्ड चार्टर्ड की विश्लेषण रिपोर्ट बताती है कि इस बदलाव का मुख्य कारण यह है कि स्टेबलकॉइन बैंकिंग प्रणाली के बाहर काम करते हैं और खास तौर पर यूएस ट्रेजरी उपकरणों का उपयोग करके कार्य करते हैं, जिससे परंपरागत बैंकिंग जमा और उधार गतिविधियों को सीधा मुकाबला मिलता है।
नेट इंटरेस्ट मार्जिन घटने का खतरा
इस बदलाव से बैंकिंग क्षेत्र में नेट इंटरेस्ट मार्जिन (उधार और जमा पर ब्याज के बीच का अंतर) घटने का खतरा है और इससे क्षेत्रीय बैंक कम लाभ कमा सकते हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि स्टेबलकॉइन का इस्तेमाल बढ़ने से भुगतान नेटवर्क और अन्य बैंकिंग गतिविधियाँ भी ब्लॉकचैन प्लेटफॉर्म की ओर बढ़ सकती हैं, जो बैंकिंग प्रणाली के पारंपरिक ढांचे को चुनौती देता है।
क्या आप जानते हैं: ट्रेडर्स के अनुसार, XRP का $10 तक पहुंचना अभी दूर की बात है
विशेषज्ञों का मत है कि यह परिदृश्य केवल तकनीकी बदलाव नहीं है, बल्कि इसे वित्तीय ढांचे में एक संरचनात्मक परिवर्तन के रूप में देखा जाना चाहिए। जैसा कि स्टेबलकॉइन के उपयोग में निरंतर वृद्धि देखी जा रही है, निवेशक और उपभोक्ता अब पारंपरिक बैंकिंग उत्पादों की तुलना में डिजिटल विकल्पों को प्राथमिकता दे रहे हैं।
नियामक प्रयास
हालांकि कुछ नियामक प्रयास हो रहे हैं, जैसे कि अमेरिकी संघीय कानून में स्टेबलकॉइन के लिए नियम कायम करने का प्रयास, लेकिन यह अभी भी विवाद का विषय बना हुआ है। बैंक समर्थक यह मानते हैं कि स्टेबलकॉइन जारी करने वाले प्लेटफॉर्म को ब्याज देने की अनुमति न देने से पारंपरिक बैंकिंग को सुरक्षात्मक लाभ मिलेगा, जबकि क्रिप्टो कंपनियाँ इसे प्रतिस्पर्धा के खिलाफ प्रतिबंधात्मक मानती हैं।
क्या स्टेबलकॉइन बैंक जमा को खतरे में डाल सकते हैं?
इस अनुमान के प्रकाशित होने के बाद से, वित्तीय बाजारों में व्यापक चर्चा शुरू हो गई है कि क्या स्टेबलकॉइन वास्तव में बैंक जमा को खतरे में डाल सकते हैं या नहीं। क्रिप्टो समर्थकों का कहना है कि जैसे-जैसे वैश्विक डिजिटल अर्थव्यवस्था बढ़ेगी, परंपरागत बैंकिंग और डिजिटल संपत्ति के बीच संतुलन बदल जाएगा।
विश्लेषकों का यह भी मानना है कि यदि क्रिप्टो नियमन स्पष्ट और संतुलित तरीके से लागू होता है, तो इससे स्टेबलकॉइन तथा डिजिटल संपत्तियों के उपयोग को स्थिर और सुरक्षित किया जा सकता है। यह बदलाव वित्तीय प्रणाली को अधिक लचीला बना सकता है और निवेशकों को नए अवसर प्रदान कर सकता है।
निष्कर्ष
स्टैण्डर्ड चार्टर्ड की इस रिपोर्ट से स्पष्ट होता है कि क्रिप्टोकरेंसी विशेषकर स्टेबलकॉइन बैंकिंग प्रणाली को बदलने की दिशा में महत्वपूर्व भूमिका निभा रहे हैं। यदि सामाजिक और नियामक रूप से संतुलित निर्णय लिए जाएँ, तो यह परिवर्तन वित्तीय व्यवस्था को और अधिक समावेशी तथा आधुनिक बना सकता है। वहीं, परंपरागत बैंकिंग में नए जोखिमों का सामना करने के लिए रणनीतियाँ बनाना आवश्यक हो गया है।
ऐसी ही और ख़बरों और क्रिप्टो विश्लेषण के लिए हमें X पर फ़ॉलो करें, ताकि कोई भी अपडेट आपसे न छूटे!

