डिजिटल मुद्रा Bitcoin का खनन आमतौर पर शक्तिशाली ASIC (Application-specific integrated circuit) मशीनों से जुड़ा माना जाता है, जो SHA-256 क्रिप्टोग्राफिक पहेलियों को बेहद तेज़ी से हल करने के लिए बनाई जाती हैं।
दुनियाभर में तकनीकी उत्साही लोगों ने असाधारण और अचरज भरे उपकरणों के माध्यम से बिटकॉइन और अन्य क्रिप्टोकरेंसी खनन करने के प्रयास किए हैं, जिनमें से कुछ बेहद अजीब और अविश्वसनीय हैं।
ASIC मशीनें बेहद तेज और ऊर्जाक्षम हैं और इन्हीं के कारण आज के बड़ी खनन फार्म और औद्योगिक संचालन संभव हुए हैं। परंपरागत मशीनों के अलावा, कुछ नवप्रयोगी लोगों ने अप्रत्याशित उपकरणों के साथ भी बिटकॉइन नेटवर्क के लिए गणनाएँ करने की कोशिश की है।
नीचे ऐसे ही छह सबसे अजीब और रोचक उदाहरण दिए गए हैं।
1. वीडियो गेम कंसोल (PlayStation 4)
यूक्रेन में एक छापेमारी के दौरान यह सामने आया कि हज़ारों PlayStation 4 कंसोल का उपयोग अवैध रूप से क्रिप्टो माइनिंग के लिए किया जा रहा था।
हालांकि PS4 का GPU सामान्य ग्राफिक्स कार्यों के लिए बना होता है, फिर भी सीमित स्तर पर इससे माइनिंग संभव है। बिजली की लागत और कम हैशरेट के कारण यह तरीका व्यावसायिक रूप से असफल माना गया।
2. स्मार्ट डिवाइस और CCTV कैमरे
2017 में IBM के शोधकर्ताओं ने पाया कि मैलवेयर के जरिए स्मार्ट कैमरों और इंटरनेट से जुड़े डिवाइसों को संक्रमित कर बिटकॉइन माइनिंग कराई जा रही थी।
इन डिवाइसों की कंप्यूटिंग क्षमता बेहद कम होती है, इसलिए माइनिंग आउटपुट नगण्य था, लेकिन इस प्रयोग ने IoT सुरक्षा जोखिमों को उजागर किया।
3. पुराना नीनटेंडो गेम बॉय
एक प्रोग्रामर ने 1989 के Nintendo Game Boy को Raspberry Pi Pico और कस्टम सॉफ्टवेयर के साथ जोड़कर बिटकॉइन माइनिंग का प्रयोग किया।
तकनीकी रूप से यह सफल रहा, लेकिन एक हैश निकालने में कई साल लग सकते हैं। यह प्रयोग लाभ नहीं, बल्कि तकनीकी जिज्ञासा का उदाहरण था।
4. अपोलो मिशन गाइडेंस कंप्यूटर
1960 के दशक में चंद्रमा तक इंसानों को पहुंचाने वाला Apollo Guidance Computer भी बिटकॉइन माइनिंग प्रयोग का हिस्सा बना।
2019 में एक इंजीनियर ने इसे SHA-256 गणनाओं के लिए आजमाया, लेकिन सीमित मेमोरी और धीमी प्रोसेसिंग के कारण यह केवल एक प्रतीकात्मक प्रयास बनकर रह गया।
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5. कागज़ और पेन से माइनिंग
एक शोध प्रयोग में SHA-256 एल्गोरिदम को हाथ से, कागज़ और पेन पर हल करके बिटकॉइन माइनिंग करने की कोशिश की गई।
सैद्धांतिक रूप से यह संभव है, लेकिन एक वैध ब्लॉक खोजने में ब्रह्मांड की उम्र से भी अधिक समय लग सकता है। यह प्रयोग केवल यह दिखाने के लिए था कि माइनिंग गणितीय प्रक्रिया है, मशीन-निर्भर नहीं।
6. मानव मस्तिष्क की गतिविधि
2019 में Microsoft ने एक पेटेंट दायर किया, जिसमें मस्तिष्क तरंगों और शारीरिक गतिविधि को “प्रूफ-ऑफ-वर्क” (Proof-of-Work) के विकल्प के रूप में प्रस्तावित किया गया था।
हालांकि यह पेटेंट बाद में छोड़ दिया गया, लेकिन इसने यह बहस छेड़ी कि भविष्य में माइनिंग और कंप्यूटिंग की परिभाषा कितनी बदल सकती है।
ASIC क्यों अब भी जरूरी हैं
इन सभी प्रयोगों के बावजूद, वास्तविक और लाभदायक बिटकॉइन माइनिंग आज भी ASIC मशीनों पर निर्भर है। वे:
अत्यधिक हैशरेट प्रदान करती हैं
ऊर्जा दक्ष होती हैं
नेटवर्क सुरक्षा में मुख्य भूमिका निभाती हैं
बिटकॉइन खनन की यह विविधता यह दर्शाती है कि मानव जिज्ञासा और तकनीकी कौशल कितना व्यापक हो सकता है और कैसे लोग सीमित संसाधनों में भी नए प्रयोग कर सकते हैं। इससे तकनीकी समुदाय में नवोन्मेष की भावना को बल मिलता है और यह संकेत देता है कि भविष्य में और भी नए विचार विकसित हो सकते हैं।
निष्कर्ष
आज बिटकॉइन माइनिंग केवल शक्तिशाली कंप्यूटर मशीनों तक सीमित नहीं रह गई है। चाहे वह पुराना गेम बॉय हो, अंतरिक्ष कंप्यूटर या शोधकर्ताओं के विचित्र विचार, इन सभी से यह स्पष्ट होता है कि तकनीक और कल्पना की कोई सीमा नहीं है।
हालांकि व्यावसायिक रूप से ASIC मशीनों का ही प्रयोग मुख्य रूप से होता है, ऐसे प्रयोग खनन के अनुभव को रोचक और ज्ञानवर्धक बनाते हैं।
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