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Rajeev Ranjan Roy
लेखक: Rajeev Ranjan Royस्टाफ लेखक
Pratik Bhuyan
Pratik Bhuyan द्वारा समीक्षितस्टाफ संपादक

ईरान हमले में अमेरिकी सेना ने AI का किया इस्तेमाल, वैश्विक बहस तेज

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा AI कंपनी Anthropic पर प्रतिबंध लगाए जाने के कुछ घंटों बाद ही अमेरिकी सेना ने ईरान पर हमले में उसी कंपनी के Claude AI सिस्टम का उपयोग किया।

ईरान हमले में अमेरिकी सेना ने AI का किया इस्तेमाल, वैश्विक बहस तेज
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दुनिया में AI आधारित युद्ध तकनीकों को लेकर नई बहस छिड़ गई है, जब रिपोर्ट सामने आई कि अमेरिकी सेना ने ईरान पर हालिया सैन्य हमले में AI कंपनी Anthropic के Claude AI मॉडल का उपयोग किया जबकि उसी दिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इस कंपनी के साथ सभी सरकारी संबंध समाप्त करने का आदेश दिया था।

रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) सहित सैन्य इकाइयों ने Claude AI का उपयोग खुफिया विश्लेषण, संभावित लक्ष्यों की पहचान और युद्धक्षेत्र सिमुलेशन जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में किया। यह घटनाक्रम दर्शाता है कि आधुनिक सैन्य संचालन में AI सिस्टम कितनी गहराई से शामिल हो चुके हैं।

ट्रम्प प्रशासन का प्रतिबंध क्यों लगा?

ट्रम्प प्रशासन ने Anthropic को राष्ट्रीय सुरक्षा जोखिम बताते हुए संघीय एजेंसियों को कंपनी की तकनीक का उपयोग बंद करने का निर्देश दिया था। यह फैसला तब लिया गया जब कंपनी और पेंटागन के बीच अनुबंध वार्ता विफल हो गई।

Anthropic ने सेना को अपने AI मॉडल के ‘असीमित सैन्य उपयोग’ की अनुमति देने से इनकार कर दिया था। कंपनी का कहना था कि उसका AI स्वायत्त घातक हथियारों या व्यापक निगरानी जैसे उपयोगों के लिए नहीं बनाया गया है।

प्रतिबंध के बावजूद कैसे हुआ इस्तेमाल?

रिपोर्ट्स बताती हैं कि प्रतिबंध लागू होने के समय तक Claude AI पहले से ही अमेरिकी सैन्य सिस्टम में एकीकृत था। रक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इतने जटिल ऑपरेशनल नेटवर्क से AI टूल को तुरंत हटाना संभव नहीं था, जिसके कारण ईरान हमले के दौरान इसका उपयोग जारी रहा।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना सरकारी नीति और वास्तविक सैन्य आवश्यकताओं के बीच बढ़ती दूरी को उजागर करती है।

ईरान हमले में हाई-टेक युद्ध रणनीति

अमेरिका और सहयोगी बलों द्वारा किए गए हमले में B-2 स्टील्थ बॉम्बर, टॉमहॉक मिसाइलें, F-35 लड़ाकू विमान और कम लागत वाले आत्मघाती ड्रोन का भी उपयोग किया गया। पहली बार बड़े पैमाने पर AI समर्थित लक्ष्य चयन प्रणाली को सक्रिय युद्ध में शामिल किया गया। विश्लेषकों के अनुसार, यह ‘डेटा-ड्रिवन वारफेयर’ की दिशा में बड़ा बदलाव है, जहां मानव निर्णय के साथ मशीन आधारित विश्लेषण युद्ध की गति और सटीकता बढ़ा रहा है।

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AI कंपनियों के बीच नई प्रतिस्पर्धा

Anthropic विवाद के बाद पेंटागन ने वैकल्पिक AI प्रदाताओं की तलाश शुरू कर दी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, OpenAI ने अमेरिकी रक्षा विभाग के साथ नई साझेदारी कर सैन्य नेटवर्क में अपने AI सिस्टम उपलब्ध कराने की सहमति दी है। यह घटनाक्रम संकेत देता है कि आने वाले समय में वैश्विक AI कंपनियां रक्षा क्षेत्र में बड़ी भूमिका निभा सकती हैं।

क्या AI युद्ध को आसान बना रहा है?

AI के युद्ध में बढ़ते उपयोग ने नैतिक और कानूनी चिंताओं को जन्म दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि AI आधारित लक्ष्य चयन और निर्णय प्रणाली संघर्षों को तेज कर सकती है तथा मानवीय नियंत्रण कमजोर पड़ने का खतरा बढ़ा सकती है। AI नीति विशेषज्ञों का कहना है कि यदि स्पष्ट अंतरराष्ट्रीय नियम नहीं बने, तो भविष्य में एल्गोरिदमिक युद्ध वैश्विक स्थिरता के लिए चुनौती बन सकता है।

निष्कर्ष

ईरान पर अमेरिकी हमले में AI के उपयोग ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आधुनिक युद्ध अब केवल हथियारों का नहीं बल्कि डेटा और एल्गोरिद्म का भी युद्ध बन चुका है। ट्रम्प प्रशासन के प्रतिबंध और सेना की वास्तविक जरूरतों के बीच उत्पन्न विरोधाभास यह दिखाता है कि तकनीक नीति से तेज गति से आगे बढ़ रही है।

आने वाले वर्षों में सबसे बड़ा सवाल यही रहेगा कि क्या दुनिया AI को नियंत्रित करेगी या AI युद्ध की रणनीति को परिभाषित करेगा?

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