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Rajeev Ranjan Roy
लेखक: Rajeev Ranjan Royस्टाफ लेखक
Pratik Bhuyan
Pratik Bhuyan द्वारा समीक्षितस्टाफ संपादक

सरकार ने Anthropic से किनारा किया, OpenAI को मिला रक्षा अनुबंध

अमेरिकी सरकार ने Anthropic को राष्ट्रीय सुरक्षा जोखिम बताया, जिसके बाद OpenAI को गोपनीय सैन्य नेटवर्क में AI तैनाती का बड़ा अनुबंध मिला। इससे युद्ध, निगरानी और तकनीकी नैतिकता पर वैश्विक बहस तेज हुई।

सरकार ने Anthropic से किनारा किया, OpenAI को मिला रक्षा अनुबंध
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अमेरिका में AI तकनीक को लेकर रक्षा क्षेत्र में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। अमेरिकी रक्षा विभाग ने Anthropic नामक AI कंपनी के साथ सहयोग समाप्त करने के तुरंत बाद OpenAI को अपने गोपनीय सैन्य नेटवर्क में उन्नत AI प्रणालियों की तैनाती का अनुबंध प्रदान किया है। इस निर्णय ने तकनीक, सुरक्षा और नागरिक स्वतंत्रता के संतुलन पर वैश्विक चर्चा को तेज कर दिया है।

“राष्ट्रीय सुरक्षा आपूर्ति शृंखला जोखिम”

रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी प्रशासन ने Anthropic को “राष्ट्रीय सुरक्षा आपूर्ति शृंखला जोखिम” घोषित करते हुए सभी संघीय एजेंसियों को उसकी तकनीक के उपयोग को बंद करने का निर्देश दिया। यह कदम तब उठाया गया जब कंपनी ने अपनी AI प्रणाली के उपयोग पर कठोर शर्तें लगाने की मांग की थी, विशेष रूप से स्वायत्त हथियारों तथा व्यापक जन निगरानी में प्रयोग को लेकर।

Anthropic का तर्क था कि AI का उपयोग बिना स्पष्ट सीमाओं के सैन्य अभियानों में किया गया तो इससे नागरिक अधिकारों और वैश्विक सुरक्षा संतुलन को खतरा हो सकता है। रक्षा विभाग ने हालांकि तकनीक को सभी “कानूनी सैन्य उद्देश्यों” के लिए उपलब्ध रखने पर जोर दिया, जिसके बाद वार्ता विफल हो गई।

OpenAI ने रक्षा विभाग के साथ समझौता किया

इसी पृष्ठभूमि में OpenAI ने रक्षा विभाग के साथ समझौता किया। कंपनी के मुख्य कार्यकारी सैम ऑल्टमैन ने स्पष्ट किया कि नई व्यवस्था के तहत AI प्रणालियों का उपयोग पूर्ण सुरक्षा प्रावधानों के साथ किया जाएगा तथा बिना मानवीय नियंत्रण के स्वचालित घातक हथियार संचालन की अनुमति नहीं होगी। 

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OpenAI के अनुसार, यह तैनाती केवल सुरक्षित बादल आधारित संरचना के माध्यम से होगी, जिससे कंपनी अपने सुरक्षा मानकों की निगरानी बनाए रख सकेगी। अनुबंध में यह भी सुनिश्चित किया गया है कि निजी नागरिकों की व्यापक घरेलू निगरानी या अत्यंत संवेदनशील निर्णयों में पूर्ण स्वचालन की अनुमति नहीं दी जाएगी।

तकनीकी जगत में विवाद

हालांकि इस समझौते ने तकनीकी जगत में विवाद भी उत्पन्न किया है। अनेक विशेषज्ञों और नागरिक अधिकार समूहों का मानना है कि सार्वजनिक आंकड़ों के उपयोग की अनुमति भविष्य में निगरानी तंत्र को मजबूत कर सकती है, भले ही निजी आंकड़ों पर प्रतिबंध मौजूद हों।

इस घटनाक्रम ने AI कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा को भी नई दिशा दी है। Anthropic की लोकप्रियता कुछ क्षेत्रों में बढ़ी है, जहां उपयोगकर्ताओं ने कठोर नैतिक मानकों को प्राथमिकता देने वाली तकनीक का समर्थन किया है। वहीं रक्षा क्षेत्र में OpenAI की भागीदारी यह संकेत देती है कि वैश्विक शक्तियां अब AI को रणनीतिक सैन्य क्षमता के रूप में देख रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य के युद्धों में AI आधारित विश्लेषण, लक्ष्य चयन, खुफिया मूल्यांकन और युद्ध सिमुलेशन जैसी क्षमताएं निर्णायक भूमिका निभा सकती हैं। इसी कारण विश्व की बड़ी शक्तियां सैन्य AI विकास में तेजी से निवेश कर रही है।

निष्कर्ष

OpenAI को मिला यह गोपनीय रक्षा अनुबंध केवल एक व्यावसायिक समझौता नहीं, बल्कि वैश्विक शक्ति संतुलन में तकनीकी परिवर्तन का संकेत है। AI अब नवाचार का साधन भर नहीं रही, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा, नैतिक शासन और भविष्य के युद्ध स्वरूप को परिभाषित करने वाली निर्णायक तकनीक बन चुकी है। आने वाले समय में सबसे बड़ी चुनौती तकनीकी प्रगति और मानवीय मूल्यों के बीच संतुलन बनाए रखने की होगी।

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