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Rajeev Ranjan Roy
लेखक: Rajeev Ranjan Royस्टाफ लेखक
Pratik Bhuyan
Pratik Bhuyan द्वारा समीक्षितस्टाफ संपादक

Web3 और क्रिप्टो के गैर-वित्तीय उपयोग मामलों पर VCs के बीच टकराव

क्रिप्टो और वेब-3 जगत में गैर-वित्तीय उपयोगों को लेकर बड़े पूंजी निवेशकों के बीच तीखा मतभेद सामने आया है। एक पक्ष इन्हें भविष्य का आधार मानता है, तो दूसरा इन्हें बाज़ार की असफल कल्पना बता रहा है।

Web3 और क्रिप्टो के गैर-वित्तीय उपयोग मामलों पर VCs के बीच टकराव
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क्रिप्टो परिसंपत्तियों और ब्लॉकचेन आधारित प्रणालियों का दायरा अब केवल धन लेन-देन तक सीमित नहीं रहा। बीते वर्षों में विकेंद्रीकृत सामाजिक मंच, डिजिटल पहचान, ऑनलाइन खेल, मीडिया वितरण और सामग्री स्वामित्व जैसे गैर-वित्तीय प्रयोगों को वेब-3 की रीढ़ माना गया। किंतु हाल ही में वैश्विक स्तर पर प्रमुख पूंजी निवेशकों के बीच शुरू हुई बहस ने इन दावों पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।

यह विवाद तब उभरा जब प्रसिद्ध निवेश संस्था ए-16- जेड क्रिप्टो के वरिष्ठ भागीदार क्रिस डिक्सन ने कहा कि गैर-वित्तीय ब्लॉकचेन प्रयोगों की विफलता का कारण तकनीक नहीं, बल्कि अस्पष्ट नियम, धोखाधड़ी की घटनाएँ और नियामकीय अनिश्चितता है। उनके अनुसार, जैसे-जैसे सरकारें स्पष्ट और संतुलित नियम बनाएँगी, वैसे-वैसे इन प्रयोगों को अपनाने वाले लोगों की संख्या बढ़ेगी।

धैर्यपूर्ण पूंजी निवेश आवश्यक

डिक्सन का तर्क है कि विकेंद्रीकृत सामाजिक संवाद मंच, उपयोगकर्ता-नियंत्रित डिजिटल पहचान और खेलों में वास्तविक स्वामित्व जैसी अवधारणाएँ दीर्घकाल में पारंपरिक तकनीकी ढाँचों को चुनौती दे सकती है। उनका मानना है कि किसी भी नई तकनीक को समाज में जड़ जमाने में वर्षों, बल्कि दशकों का समय लगता है और इसके लिए धैर्यपूर्ण पूंजी निवेश आवश्यक होता है।

वास्तविक आवश्यकता का अभाव

हालाँकि, इस दृष्टिकोण का कड़ा विरोध ड्रैगनफ्लाई कैपिटल के वरिष्ठ भागीदार हसीब कुरैशी ने किया। उनका कहना है कि गैर-वित्तीय क्रिप्टो प्रयोगों की असफलता का कारण नियम नहीं, बल्कि आम उपभोक्ताओं की वास्तविक आवश्यकता का अभाव है। उनके अनुसार, ये प्रयोग आम लोगों की दैनिक समस्याओं का समाधान नहीं कर पाए, इसलिए बाज़ार में इनकी स्वीकृति नहीं बन सकी।

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इस बहस को और बल तब मिला जब कैसल आइलैंड वेंचर्स के संस्थापक निक कार्टर ने भी यही कहा कि पूंजी निवेशकों को सीमित समय में लाभ की दिशा स्पष्ट करनी होती है। यदि कोई परियोजना दो या तीन वर्षों में व्यवहारिक उपयोग और आमदनी नहीं दिखा पाती, तो उस पर निवेश बनाए रखना जोखिमपूर्ण हो जाता है।

पूंजी निवेश की दिशा में बदलाव

इन मतभेदों के बीच यह भी स्पष्ट हो रहा है कि पूंजी निवेश की दिशा में बदलाव आ रहा है। अब कई निवेशक गैर-वित्तीय प्रयोगों की बजाय ऐसे क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं जहाँ प्रत्यक्ष आमदनी, वित्तीय सेवाएँ और वास्तविक परिसंपत्तियों का डिजिटल रूपांतरण संभव है। यह संकेत देता है कि क्रिप्टो उद्योग धीरे-धीरे अधिक व्यावहारिक और परिपक्व चरण में प्रवेश कर रहा है।

भारतीय संदर्भ में यह बहस और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। भारत में क्रिप्टो परिसंपत्तियों को लेकर नीति अब भी स्पष्ट नहीं है। भारी कर व्यवस्था, लेन-देन पर कटौती और मनी लॉन्ड्रिंग जैसी चिंताओं ने नवाचार को सीमित किया है। ऐसे वातावरण में गैर-वित्तीय वेब-3 प्रयोगों का पनपना और भी कठिन हो जाता है।

इसके बावजूद, ब्लॉकचेन समर्थकों का मानना है कि डिजिटल पहचान, डेटा सुरक्षा और उपयोगकर्ता-नियंत्रित मंचों की आवश्यकता भविष्य में और बढ़ेगी। प्रश्न यह नहीं है कि ये प्रयोग उपयोगी हैं या नहीं, बल्कि यह है कि समाज और बाजार इन्हें अपनाने के लिए कब तैयार होंगे।

निष्कर्ष

गैर-वित्तीय क्रिप्टो और वेब-3 को लेकर पूंजी निवेशकों के बीच जारी यह टकराव इस तकनीक के भविष्य की दिशा तय करने वाला साबित हो सकता है। यदि संतुलित नियम, भरोसेमंद प्रणालियाँ और वास्तविक सामाजिक उपयोग विकसित होते हैं, तो ये प्रयोग फिर से गति पकड़ सकते हैं। अन्यथा, क्रिप्टो का दायरा सीमित होकर केवल वित्तीय उपयोगों तक सिमट सकता है।

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