वर्ष 2025 में भारत में क्रिप्टो संपत्तियों के प्रति निवेशकों की सोच में एक महत्वपूर्ण बदलाव देखा गया है। प्रमुख क्रिप्टो एक्सचेंजों ने प्रणालीगत निवेश योजनाओं (SIP) में 60 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की है, जिसे विशेषज्ञ नवागत खुदरा निवेशकों की अधिक भागीदारी और लम्बी अवधि में समृद्धि की आकांक्षा से जोड़ते हैं।
क्रिप्टो SIP निवेश
क्रिप्टो SIP वह निवेश तरीका है जिसमें निवेशक समय-समय पर छोटे-छोटे धनराशि का आवंटन करते हैं, जिससे बाजार की उतार-चढ़ाव का प्रभाव कम होता है और लागत औसत बनाने की प्रक्रिया आसान होती है। इससे न केवल जोखिम प्रबंधन में मदद मिलती है, बल्कि निवेशकों को संयम के साथ संपत्ति निर्माण का अवसर भी मिलता है।
कॉइनडीसीएक्स जैसे प्लेटफार्म पर लगभग 5.72 लाख नए SIP खाते खोले गए, जिसमें प्रारंभिक मासिक निवेश मात्र ₹100 के आसपास था। यह दर्शाता है कि क्रिप्टो निवेश अब केवल उच्च आय वाले निवेशकों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि छोटे निवेशकों के लिए भी सुलभ बन चुका है।
बिटकॉइन, इथेरियम, सोलाना और रिपल
बिटकॉइन, इथेरियम, सोलाना और रिपल जैसी प्रमुख डिजिटल संपत्तियाँ SIP के तहत सबसे अधिक पसंद की जाने वाली संपत्तियाँ रहीं। कॉइनस्विच ने भी नए SIP पंजीकरणों में लगभग 59 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की है।
मुड्रेक्स (Mudrex) ने SIP की शुरुआत में 220 प्रतिशत तक उछाल देखा। Mudrex उपयोगकर्ता शुरुआत में कम राशि से शुरू करते हैं, लेकिन कई निवेशकों ने बाद में मासिक योगदान ₹4,000 से ₹6,000 तक बढ़ाया।
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दीर्घकालिक निवेश का विकल्प
इस बदलाव से यह संकेत मिलता है कि भारतीय निवेशक क्रिप्टो बाजार को केवल त्वरित लाभ के साधन के रूप में नहीं देख रहे, बल्कि इसे एक व्यवस्थित, संयमित और दीर्घकालिक निवेश विकल्प के रूप में अपनाने लगे हैं। यह परिपक्वता निवेशकों के ज्ञान में वृद्धि, जोखिम प्रबंधन की समझ और संपत्ति के मूल तत्वों की समझ के विकास के प्रतीक हैं।
यह रुझान उस वैश्विक परिवेश का भी हिस्सा है, जिसमें डिजिटल संपत्ति के बाजार धीरे-धीरे परिपक्व हो रहे हैं और कई देशों में नियमों को स्पष्ट तथा आसान बनाने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं। उदाहरण के लिए, अमेरिका व अन्य विकसित बाजारों में नियामकीय ढांचे में सुधार से निवेशकों का भरोसा बढ़ा है।
भारतीय बाजार में भी ZebPay जैसी प्रमुख क्रिप्टो एक्सचेंज 2026 की शुरुआत में SIP फीचर लॉन्च करने की योजना बना रही है, जो दर्शाता है कि यह निवेश पद्धति अब मुख्यधारा में शामिल हो रही है। इससे यह उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले वर्षों में क्रिप्टो SIP और अधिक लोकप्रिय व सुलभ होंगे।
इस प्रवृत्ति से यह भी स्पष्ट होता है कि भारत जैसे नवोदित डिजिटल निवेशक बाजार में वित्तीय साक्षरता बढ़ रही है। छोटे-छोटे निवेशक अब स्वयं को अल्पकालिक उतार-चढ़ाव से नहीं डरते बल्कि स्थिरता के साथ निवेश करने को प्राथमिकता दे रहे हैं।
साथ ही कई निवेशक ऐसे उपकरणों का उपयोग कर रहे हैं जो निवेश को स्वचालित तथा सरल बनाते हैं, जैसे कि डॉलर-कॉस्ट औसत तकनीक और नियमित खरीद विकल्प।
निष्कर्ष
भारत में क्रिप्टो SIP में 60 प्रतिशत से अधिक उछाल सिर्फ आंकड़ा नहीं है, बल्कि यह निवेशकों की सोच में बदलाव का प्रतीक है। छोटे निवेशकों से लेकर अनुभवी निवेशकों तक, सभी अब डिजिटल संपत्तियों को लम्बी अवधि की योजना में शामिल कर रहे हैं, जिससे यह बाजार अधिक स्थिर और परिपक्व बन रहा है। निवेशकों की यह मानसिकता राष्ट्रीय निवेश संस्कृति के विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
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