मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच ईरान के क्रिप्टो बाजार को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। हाल ही में प्रकाशित एक विश्लेषण में ब्लॉकचेन एनालिटिक्स फर्म TRM Labs ने कहा है कि ईरान के सबसे बड़े क्रिप्टो एक्सचेंज नोबिटेक्स (Nobitex) से बड़े पैमाने पर पूंजी पलायन के स्पष्ट प्रमाण नहीं मिले हैं, हालांकि संघर्ष की खबरों के बाद गतिविधि में अस्थायी उछाल जरूर दर्ज किया गया।
हमलों के बाद गतिविधि में अचानक बढ़ोतरी
अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर हमलों की खबर सामने आने के तुरंत बाद ईरानी क्रिप्टो बाजार में हलचल बढ़ गई। ऑनचेन डेटा के अनुसार कुछ समय के लिए निकासी और ट्रांसफर गतिविधि में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई। कुछ रिपोर्टों में बताया गया कि ईरान के प्रमुख एक्सचेंज से निकासी पहले के मुकाबले कई गुना बढ़ गई और कुछ घंटों में लाखों डॉलर की क्रिप्टो परिसंपत्तियां स्थानांतरित की गईं।
हालांकि TRM Labs का कहना है कि यह वृद्धि लंबे समय तक जारी रहने वाली उपयोगकर्ता घबराहट का संकेत नहीं है। कंपनी के विश्लेषण में पाया गया कि हमलों के बाद एक्सचेंज से लगभग 3.5 करोड़ डॉलर से अधिक की कुछ ट्रांसफर गतिविधियां हुईं, लेकिन इनका बड़ा हिस्सा एक्सचेंज की आंतरिक फंड प्रबंधन प्रक्रिया से जुड़ा हो सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार कई बार एक्सचेंज अपने हॉट वॉलेट से कोल्ड वॉलेट में फंड स्थानांतरित करते हैं ताकि सुरक्षा और तरलता प्रबंधन बेहतर बनाया जा सके। इसलिए ऐसे ट्रांसफर को सीधे पूंजी पलायन के रूप में देखना उचित नहीं माना जाता।
इंटरनेट प्रतिबंध से घटा लेनदेन
TRM के विश्लेषण में यह भी सामने आया कि हमलों के बाद ईरान में इंटरनेट प्रतिबंध लगाए गए, जिससे क्रिप्टो गतिविधि पर सीधा असर पड़ा। लेनदेन की मात्रा में तेज गिरावट देखी गई और कई ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर व्यापारिक गतिविधि धीमी पड़ गई।
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डेटा के अनुसार कुछ दिनों के भीतर क्रिप्टो ट्रेडिंग वॉल्यूम में लगभग 80 प्रतिशत तक की कमी देखी गई। विशेषज्ञों का कहना है कि यह गिरावट बाजार के ढहने का संकेत नहीं है बल्कि तकनीकी पहुंच में बाधा और सरकारी नियंत्रण का परिणाम हो सकती है।
नोबिटेक्स की भूमिका
नोबिटेक्स ईरान के क्रिप्टो इकोसिस्टम का सबसे बड़ा प्लेटफॉर्म माना जाता है। यह देश के भीतर डिजिटल संपत्तियों को खरीदने और बेचने का प्रमुख माध्यम है और ईरानी उपयोगकर्ताओं को वैश्विक क्रिप्टो बाजार से जोड़ता है।
ब्लॉकचेन विश्लेषण के अनुसार 2025 से अब तक इस प्लेटफॉर्म पर लगभग 5 अरब डॉलर से अधिक का लेनदेन दर्ज किया गया है। अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के कारण ईरान की पारंपरिक बैंकिंग प्रणाली वैश्विक वित्तीय नेटवर्क से काफी हद तक अलग हो चुकी है, ऐसे में क्रिप्टोकरेंसी कई लोगों के लिए वैकल्पिक वित्तीय माध्यम बन गई है।
पूंजी पलायन को लेकर मतभेद
जहां कुछ विश्लेषण फर्मों ने शुरुआती डेटा के आधार पर संभावित पूंजी पलायन की आशंका जताई, वहीं TRM Labs ने अधिक सावधानी बरतने की सलाह दी है। कंपनी का कहना है कि अभी उपलब्ध आंकड़ों से बड़े पैमाने पर देश से धन निकलने का स्पष्ट निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।
विशेषज्ञों के अनुसार मौजूदा परिस्थितियों में क्रिप्टो बाजार अस्थिर जरूर है, लेकिन यह सामान्य जोखिम प्रबंधन की स्थिति हो सकती है।
भविष्य पर क्या असर पड़ सकता है
विश्लेषकों का मानना है कि ईरान में क्रिप्टो गतिविधि आने वाले समय में भू-राजनीतिक घटनाओं, इंटरनेट पहुंच और सरकारी नीति पर काफी हद तक निर्भर करेगी। यदि इंटरनेट सेवाएं सामान्य होती हैं और बाजार स्थिर रहता है, तो डिजिटल संपत्तियों का उपयोग फिर से बढ़ सकता है।
फिलहाल उपलब्ध डेटा यह संकेत देता है कि संघर्ष के बाद बाजार में तनाव जरूर बढ़ा है, लेकिन ईरान के सबसे बड़े क्रिप्टो एक्सचेंज से व्यापक पूंजी पलायन का ठोस प्रमाण अभी सामने नहीं आया है।
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