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Rajeev Ranjan Roy
लेखक: Rajeev Ranjan Royस्टाफ लेखक
Pratik Bhuyan
Pratik Bhuyan द्वारा समीक्षितस्टाफ संपादक

UAE–भारत Web3 और AI बिजनेस कॉरिडोर की शुरुआत, इंडिया ब्लॉकचेन एलायंस और TheBlock की पहल

भारत ब्लॉकचेन अलायंस और The Block की पहल से शुरू हुआ UAE–भारत Web3 और AI बिजनेस कॉरिडोर तकनीकी सहयोग, नवाचार और डिजिटल साझेदारी को मजबूत करेगा।

UAE–भारत Web3 और AI बिजनेस कॉरिडोर की शुरुआत, इंडिया ब्लॉकचेन एलायंस और TheBlock की पहल
घोषणा

हाल ही में इंडिया ब्लॉकचेन अलायंस (IBA) और The Block ने UAE-India (यूएई-भारत) Web3 और AI बिजनेस कॉरिडोर नामक एक महत्वपूर्ण पहल की घोषणा की है। यह पहल तकनीकी सहयोग को नई दिशा देने के साथ ही भारत और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के बीच डिजिटल अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने का लक्ष्य रखती है। 

यह बिजनेस कॉरिडोर Web3, AI, डिजिटल संपत्तियों, साइबर सुरक्षा और गहन तकनीक  जैसे क्षेत्रों में सहयोग, अनुसंधान, निवेश और नवाचार को बढ़ावा देगा। इसमें दोनों देशों के सरकारी संस्थान, कारोबार, स्टार्टअप, निवेशक और शैक्षिक संस्थाएँ शामिल होंगी, जिससे पारस्परिक तकनीकी साझेदारी को व्यवहारिक रूप मिलेगा।

दो देशों की विशिष्ट ताकतों का संयोजन

यह पहल दोनों देशों की विशिष्ट ताकतों का संयोजन है – भारत की तकनीकी प्रतिभा और डिजिटल नवाचार क्षमता के साथ यूएई का उन्नत विनियमन, वैश्विक बाजार की पहुँच और निवेश संरचना।

इस साझेदारी से भारत वैश्विक तकनीकी मंच पर अपनी स्थिति को और मजबूत कर सकेगा तथा डिजिटल सेवाओं के निर्यात और उच्च कौशल रोजगार के अवसरों में वृद्धि संभव होगी। साथ ही, यूएई Web3 और AI के लिए वैश्विक निवेश एवं नवाचार केंद्र के रूप में अपने नेतृत्व को और सुदृढ़ करेगा।

भारत की डिजिटल क्षमता

भारत की डिजिटल क्षमता हाल के वर्षों में उल्लेखनीय रूप से विकसित हुई है। राष्ट्रीय ब्लॉकचेन ढांचा जैसे उपायों से सरकारी सेवाओं का डिजिटलीकरण, डेटा सुरक्षा और विश्वसनीयता को बढ़ावा मिला है। इस ढांचे के अंतर्गत अब तक करोड़ों दस्तावेज़ सत्यापित किये जा चुके हैं, जो देश के डिजिटल शासन और नवाचार के लिए मजबूत आधार तैयार करते हैं।

भारत और यूएई के बीच साझेदारी

इसके अलावा, भारत और यूएई के बीच आर्थिक एवं तकनीकी साझेदारी व्यापक स्तर पर बढ़ती जा रही है। दोनों देशों ने 2032 तक द्विपक्षीय व्यापार को 200 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है, जो आर्थिक सहयोग के महत्व को दर्शाता है। इस व्यापार गलियारे जैसे तकनीकी समझौतों से उस लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण गति मिलेगी। 

यूएई में तकनीकी इकोसिस्टम तेजी से विकसित हो रहा है। उदाहरण के लिए, RAK DAO जैसे Web3 उन्मुख मुक्त जोन (Free Zone) डिजिटल संपत्ति और AI कंपनियों को समर्थन प्रदान करते हैं, जिससे वैश्विक स्टार्टअप्स और उद्यमियों के लिए नए अवसर खुलते हैं।

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इस साझेदारी का एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू प्रतिचालित मानकों और निवेश कोषों के निर्माण से जुड़ा है। यह कदम Web3 और AI समाधानों को वैश्विक स्तर पर अपनाने और विस्तार करने में सहायक होगा।

साझेदारी के तहत जॉइंट कार्य समूह, पायलट कार्यक्रम, सीमा-पार निवेश प्लेटफॉर्म एवं इकोसिस्टम भागीदारी जैसे कार्यक्रम शामिल किए जाएंगे, जो व्यापार गलियारे को क्रमिक रूप से विकसित करेंगे।

भारत में तकनीकी निवेश का परिदृश्य

वहीं, भारत में वैश्विक तकनीकी कंपनियों का निवेश भी लगातार बढ़ रहा है, जैसे माइक्रोसॉफ्ट और गूगल जैसी कंपनियाँ देश में AI तथा क्लाउड इन्फ्रास्ट्रक्चर में अरबों डॉलर का निवेश कर रही हैं।

इन कदमों से भारतीय युवाओं को कौशल प्रशिक्षण के अवसर मिल रहे हैं और देश के तकनीकी विकास की गति और तेज हुई है।

निष्कर्ष

यूएई-भारत Web3 और AI बिजनेस कॉरिडोर तकनीकी सहयोग और आर्थिक साझेदारी की दिशा में एक मजबूत कदम है। यह न केवल दोनों देशों के लिए नए व्यापार अवसर, निवेश और रोजगार सृजन करेगा, बल्कि डिजिटल अर्थव्यवस्था की दुनिया में भारत की भूमिका को और सशक्त करेगा।

यह साझेदारी राष्ट्रीय तकनीकी उद्देश्यों के साथ-साथ वैश्विक तकनीकी परिदृश्य में भी भारत को एक प्रमुख भागीदार के रूप में स्थापित करेगी।

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