केंद्रीय वित्त और कॉर्पोरेट कार्य मंत्री निर्मला सीतारामन ने रविवार को संसद में वर्ष 2026-27 का केंद्रीय बजट प्रस्तुत किया। कर्तव्य भवन में तैयार यह पहला बजट तीन स्पष्ट कर्तव्यों से प्रेरित है, जिनका उद्देश्य वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत की आर्थिक मजबूती, सामाजिक समावेशन और दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करना है। बजट में विकास, रोजगार, अवसंरचना, उद्योग, कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य और कर सुधारों पर संतुलित जोर दिया गया है।
उत्पादकता और प्रतिस्पर्धा
पहला कर्तव्य उत्पादकता और प्रतिस्पर्धा बढ़ाकर आर्थिक विकास को तेज करने तथा उसे बनाए रखने पर केंद्रित है। इसके अंतर्गत सात रणनीतिक क्षेत्रों में विनिर्माण को बढ़ावा देने, बायोफार्मा शक्ति कार्यक्रम के तहत भारत को वैश्विक बायोफार्मा केंद्र बनाने और सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 की शुरुआत की गई है। बायोफार्मा शक्ति के लिए अगले पांच वर्षों में दस हजार करोड़ रुपये के आवंटन की घोषणा की गई है, जिससे अनुसंधान, नवाचार और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार होगा।
सार्वजनिक पूंजी व्यय
पूंजीगत निवेश को गति देने के लिए सार्वजनिक पूंजी व्यय बढ़ाकर बारह लाख बीस हजार करोड़ रुपये किया गया है। कंटेनर विनिर्माण, पूंजी उपकरण, वस्त्र क्षेत्र, रसायन पार्क और दुर्लभ धातु गलियारों जैसी योजनाएं भारत को आत्मनिर्भर और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला का मजबूत हिस्सा बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। अवसंरचना जोखिम गारंटी फंड, समर्पित माल गलियारे, राष्ट्रीय जलमार्ग और तटीय परिवहन योजनाएं लॉजिस्टिक लागत घटाने और औद्योगिक दक्षता बढ़ाने में सहायक होंगी।
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विकसित सेवा क्षेत्र
दूसरा कर्तव्य लोगों की आकांक्षाएं पूरी करने और उनकी क्षमता बढ़ाने से जुड़ा है। सेवा क्षेत्र को विकसित भारत का मुख्य चालक बनाने के लिए शिक्षा से रोजगार एवं उद्यम पर स्थायी समिति गठित करने का प्रस्ताव किया गया है। स्वास्थ्य क्षेत्र में संबद्ध स्वास्थ्य पेशेवरों, वृद्ध देखभाल सेवाओं और आयुष संस्थानों के विस्तार से रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। शिक्षा, पर्यटन, खेल और रचनात्मक अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने वाली घोषणाएं युवाओं के कौशल विकास और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को मजबूत करेंगी।
सबका साथ, सबका विकास
तीसरा कर्तव्य सबका साथ–सबका विकास की भावना के अनुरूप है। किसानों की आय बढ़ाने के लिए उच्च मूल्य कृषि, मत्स्य पालन, पशुपालन और क्षेत्रीय फसल योजनाओं को प्रोत्साहन दिया गया है। भारत-विस्तार जैसे बहुभाषी कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित मंच से कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को तकनीकी समर्थन मिलेगा। मानसिक स्वास्थ्य, पूर्वोदय राज्यों, उत्तर-पूर्व और बौद्ध सर्किट विकास पर विशेष ध्यान देकर क्षेत्रीय संतुलन को मजबूत किया गया है।
बजट अनुमान के अनुसार गैर-ऋण प्राप्तियां छत्तीस लाख पचास हजार करोड़ रुपये और कुल व्यय तिरेपन लाख पचास हजार करोड़ रुपये रहने का अनुमान है। राजकोषीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद का चार दशमलव तीन प्रतिशत रहने का अनुमान है, जबकि ऋण से सकल घरेलू उत्पाद अनुपात में भी सुधार दर्शाया गया है। कर सुधारों के तहत नया आय कर अधिनियम, सरलीकृत नियम, छोटे करदाताओं के लिए राहत और व्यापार सुगमता बढ़ाने वाले प्रावधान किए गए हैं।
निष्कर्ष
केंद्रीय बजट 2026-27 आर्थिक विकास, सामाजिक न्याय और संस्थागत सुधारों का संतुलित रोडमैप प्रस्तुत करता है। तीन कर्तव्यों पर आधारित यह बजट भारत को आत्मनिर्भर, समावेशी और विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में निर्णायक कदम साबित होगा, जो वर्ष 2047 के विकसित भारत के लक्ष्य को साकार करने में अहम भूमिका निभाएगा।
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