केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने रविवार को संसद में केंद्रीय बजट 2026-27 प्रस्तुत करते हुए देश के बुनियादी ढांचे को आर्थिक विकास का प्रमुख आधार बताया। उन्होंने कहा कि अस्थिर वैश्विक परिस्थितियों के बीच भारत की उत्पादकता, प्रतिस्पर्धात्मकता और गतिशीलता को मजबूत करना सरकार का पहला कर्तव्य है। इसी उद्देश्य से वित्त वर्ष 2026-27 में सार्वजनिक पूंजीगत व्यय को बढ़ाकर 12.2 लाख करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव रखा गया है।
सार्वजनिक पूंजीगत व्यय
वित्त मंत्री ने बताया कि वित्त वर्ष 2014-15 में सार्वजनिक पूंजीगत व्यय मात्र 2 लाख करोड़ रुपये था, जो वर्ष 2025-26 के बजट अनुमान में बढ़कर 11.2 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया। इस निरंतर वृद्धि को बनाए रखने के लिए आगामी वित्त वर्ष में इसे और बढ़ाया जा रहा है। सरकार ने पिछले एक दशक में सार्वजनिक बुनियादी ढांचे के लिए नवोन्मेषी वित्त पोषण साधनों और संस्थागत व्यवस्थाओं को सुदृढ़ किया है, जिससे परिसंपत्ति पुनर्चक्रण और निवेश को बढ़ावा मिला है।
बुनियादी ढांचा जोखिम गारंटी कोष
बजट में बुनियादी ढांचा जोखिम गारंटी कोष स्थापित करने का प्रस्ताव किया गया है। इसका उद्देश्य निर्माण और विकास चरण के दौरान जोखिमों को कम कर निजी विकासकर्ताओं और ऋणदाताओं का विश्वास बढ़ाना है। यह कोष विवेकपूर्ण आंशिक ऋण गारंटी प्रदान करेगा, जिससे निजी क्षेत्र की भागीदारी में तेजी आने की उम्मीद है।
पर्यावरणीय रूप से सतत माल परिवहन को बढ़ावा देने के लिए पूर्व में डानकुनी और पश्चिम में सूरत को जोड़ने वाला एक नया समर्पित मालवाहक गलियारा प्रस्तावित है। इसके साथ ही अगले पांच वर्षों में बीस नए राष्ट्रीय जलमार्गों को परिचालन में लाने की योजना है। यह पहल ओडिशा के खनिज समृद्ध क्षेत्रों को प्रमुख बंदरगाहों से जोड़कर औद्योगिक गतिविधियों और निर्यात क्षमता को मजबूत करेगी।
अंतर्देशीय जलमार्ग और तटीय नौवहन
वित्त मंत्री ने अंतर्देशीय जलमार्गों और तटीय नौवहन के हिस्से को वर्ष 2047 तक छह प्रतिशत से बढ़ाकर बारह प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए रेल और सड़क से जलमार्गों की ओर परिवहन स्थानांतरण को प्रोत्साहित करने हेतु तटीय माल संवर्धन योजना आरंभ की जाएगी। साथ ही वाराणसी और पटना में जहाज मरम्मत पारिस्थितिकी तंत्र की स्थापना तथा जलमार्ग क्षेत्र के लिए क्षेत्रीय प्रशिक्षण संस्थान विकसित किए जाएंगे।
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यात्री परिवहन में पर्यावरणीय स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए सात उच्च गति रेल गलियारों के विकास का प्रस्ताव किया गया है। इनमें मुंबई–पुणे, पुणे–हैदराबाद, हैदराबाद–बेंगलूरु, हैदराबाद–चेन्नई, चेन्नई–बेंगलूरु, दिल्ली–वाराणसी और वाराणसी–सिलीगुड़ी शामिल हैं। इन मार्गों को विकास संयोजक के रूप में देखा जा रहा है, जो प्रमुख आर्थिक केंद्रों को आपस में जोड़ेंगे।
जलविमान के स्वदेशी विनिर्माण
समग्र और दूरस्थ संपर्क तथा पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए जलविमान के स्वदेशी विनिर्माण को प्रोत्साहन देने की घोषणा की गई है। जलविमान परिचालन को व्यवहार्य बनाने हेतु व्यवहार्यता अंतर सहायता योजना लागू की जाएगी, जिससे दुर्गम क्षेत्रों में आवागमन और पर्यटन गतिविधियों को नई गति मिलेगी।
हरित विकास के तहत कार्बन को पकड़ने, उपयोग और भंडारण की प्रौद्योगिकियों को भी बढ़ावा दिया गया है। बिजली, इस्पात, सीमेंट, शोधनालय और रसायन जैसे पांच औद्योगिक क्षेत्रों में इसके उपयोग के लिए अगले पांच वर्षों में 20 हजार करोड़ रुपये के परिव्यय का प्रस्ताव है।
इसके अतिरिक्त बजट में शहरी आर्थिक क्षेत्रों की अवधारणा प्रस्तुत की गई है। छोटे और मध्यम शहरों तथा तीर्थ नगरों को आधुनिक अवसंरचना और सुविधाओं से सुसज्जित कर उनकी आर्थिक क्षमता बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए अगले पांच वर्षों में प्रत्येक शहरी आर्थिक क्षेत्र पर 5,000 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
निष्कर्ष
बजट 2026-27 में बुनियादी ढांचे, हरित प्रौद्योगिकी और क्षेत्रीय संतुलित विकास पर केंद्रित प्रावधान यह दर्शाते हैं कि सरकार दीर्घकालिक, समावेशी और सतत आर्थिक वृद्धि के लिए ठोस आधार तैयार कर रही है। ये पहलें भारत को भविष्य की अर्थव्यवस्था के रूप में सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
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