केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने भारत के स्थायी मिशन, जिनेवा में सरकारी धन से लगभग दो लाख स्विस फ्रैंक (लगभग ₹2 करोड़) के गबन की गहराई से जांच शुरू कर दी है। इस मामले में मिशन के एक पूर्व अकाउंट्स ऑफिसर मोहित पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं कि उन्होंने इस राशि को अपने क्रिप्टो सम्बंधित जुआ और ऑनलाइन गेमिंग गतिविधियों में लगाने के लिए हड़पा था।
जिनेवा स्थित भारत के स्थायी प्रतिनिधित्व कार्यालय की यह ठगी तब उजागर हुई जब वित्तीय ऑडिट के दौरान खातों में दोहरी भुगतान का संकेत मिला। इससे संदेह पैदा हुआ कि कुछ लेन-देन असामान्य हैं और आगे की छानबीन की आवश्यकता है।
कैसे हुआ घोटाला?
मोहित को 17 दिसंबर 2024 को सहायक अनुभाग अधिकारी के रूप में मिशन में तैनात किया गया था, जहाँ उस पर Union Bank of Switzerland (UBS) में रखे मिशन के खातों के लिए भुगतान निर्देश सौंपने की जिम्मेदारी थी। इन खातों में अमेरिकी डॉलर (USD) और स्विस फ़्रैंक (CHF) दोनों शामिल थे।
मिशन द्वारा स्विस विक्रेताओं को भुगतान आमतौर पर उनके चालानों पर प्रिंटेड QR कोड के जरिये होता था, जिनमें बैंक विवरण और भुगतान जानकारी कोडित रहती थी। इन QR कोडों को भुगतान स्लिप के साथ बैंक को सौंपा जाता था। यही प्रक्रिया मोहित के नियंत्रण में थी।
जाँचकर्ताओं के अनुसार, मोहित ने कुछ असली विक्रेताओं के QR कोडों को छिपा कर स्वयं बनाये गए QR कोड लगा दिये। इसके परिणामस्वरूप, भुगतान सीधे उसकी निजी CHF खाते में ट्रांसफर हो गये, न कि सही विक्रेताओं के खातों में। उसने मासिक बैंक स्टेटमेंट्स में भी फेरबदल किया, जिनमें उसने अपना नाम असली विक्रेताओं के स्थान पर डाल दिया, ताकि कोई भी अनियमितता तुरंत पकड़ी न जा सके।
घोटाला कब और कैसे पकड़ा गया?
ऑडिट प्रक्रिया के दौरान यानी दोहरी भुगतान प्रविष्टियाँ देखी गईं, विशेषकर स्थानीय विक्रेता एजे ट्रेवल्स के नाम पर। इन संदिग्ध लेन-देन से जांच टीम ने विस्तृत विश्लेषण किया और यह पता चला कि CHF 200,000 का नुकसान हुआ है।
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जब अधिकारियों ने मोहित से सख्ती से पूछताछ की, तो उसने लिखित स्वीकारोक्ति में अपने अपराध को स्वीकार कर लिया। उसने बताया कि उसने धनराशि का उपयोग अपने क्रिप्टो जुए और ऑनलाइन गेमिंग गतिविधियों के लिए किया।
CBI की प्राथमिकी और आरोप
CBI ने मोहित के खिलाफ आस्था का दुरुपयोग, जालसाज़ी, खातों में गड़बड़ी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। जांच एजेंसी ने बताया कि यह मामला कई अन्य प्रकरणों में से एक है, जिसमें सरकारी कर्मियों ने जनता के धन का दुरुपयोग किया और उसे ऑनलाइन ट्रेडिंग, क्रिप्टो-ट्रेडिंग तथा जुआ गतिविधियों के लिए लगाया।
इस साल ही सीबीआई ने एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) के एक वरिष्ठ वित्त प्रबंधक राहुल विजय को भी Rs 232 करोड़ के गबन मामले में गिरफ्तार किया था, जबकि बैंक ऑफ इंडिया के एक अधिकारी हितेश सिंगला पर भी ₹16 करोड़ से अधिक की धनराशि को क्रिप्टो और ऑनलाइन ट्रेडिंग में लगाने के आरोप लगे थे।
व्यापक तस्वीर और नीति पर प्रभाव
विशेषज्ञों का मानना है कि विदेश में स्थित सरकारी मिशनों में वित्तीय अनुशासन और पारदर्शिता बनाए रखना अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहाँ न केवल देश का आर्थिक संसाधन होता है, बल्कि भारत की अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा भी दांव पर लगती है।
ऐसे मामलों से यह भी स्पष्ट होता है कि डिजिटल और क्रिप्टो आधारित सुविधाओं का दुरुपयोग किस प्रकार बढ़ रहा है और इसके खिलाफ केंद्रीय जांच एजेंसियों को सतर्क रहना आवश्यक है।
सीबीआई की जांच अभी जारी है और आरोपियों के खिलाफ आगे के साक्ष्यों की तलाश, वित्तीय स्ट्रीम्स का विश्लेषण तथा अन्य संभावित सहयोगियों की पहचान पर काम चल रहा है।
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