क्रिप्टो-एक्सचेंज Coinbase Global Inc. के शेयरों में 17 दिसंबर 2025 को लगभग 3–4% की गिरावट दर्ज की गई, जब कंपनी ने नियामक अस्पष्टता के बावजूद संचालन और विस्तार योजनाओं की घोषणा की।
कॉइनबेस ने पारंपरिक क्रिप्टो ट्रेडिंग से आगे निकलकर शेयर ट्रेडिंग, प्रिडिक्शन मार्केट्स और अन्य वित्तीय उत्पादों में विस्तार करने की योजना बनाई है, जिसे कंपनी एक “यूनिवर्सल एक्सचेंज” मॉडल के रूप में प्रस्तुत कर रही है। इस रणनीति का उद्देश्य ग्राहकों को एक ही प्लेटफॉर्म पर अधिक वित्तीय सेवाएँ प्रदान करना और ट्रेडिंग वॉल्यूम बढ़ाना है।
हालांकि, इस विस्तार के बीच नियामक अनिश्चितता ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया है। विशेष रूप से ऐसे उत्पादों पर स्पष्ट नियम और फ्रेमवर्क का अभाव है जो क्रिप्टोकरेंसी की परंपरागत बाजार से भिन्न हैं, जिससे कॉइनबेस के स्टॉक पर दबाव बना हुआ है।
भारत और अन्य देशों में नियामकीय स्थिति
Coinbase ने हाल ही में भारत जैसे बाजारों में नियामक मंजूरी का जिक्र करते हुए अपने विस्तार की बात कही है, लेकिन नियामक अस्पष्टता के कारण निवेशकों को यह निर्णय संदेहजनक लगा।
भारत की क्रिप्टो-नियमन नीति ने पिछले कुछ वर्षों में कई उतार-चढ़ाव देखे हैं। कंपनी ने पहले UPI आधारित सेवाएँ बंद कर दी थीं जब NPCI ने कहा कि उसे UPI पर क्रिप्टो एक्सचेंज का कोई ज्ञान नहीं था।
वैश्विक स्तर पर भी Coinbase सहित अन्य क्रिप्टो एक्सचेंजों को सामंजस्यपूर्ण नियामक ढांचे की कमी का सामना करना पड़ रहा है, जो निवेशकों की अनिश्चितता को बढ़ाता है।
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शेयर बाजार और क्रिप्टो कीमतों का असर
शेयर बाजार पर Coinbase के कदमों का प्रभाव व्यापक रूप से देखा जा रहा है। पिछले कुछ हफ्तों में बिटकॉइन और अन्य प्रमुख क्रिप्टोकरेंसी में उतार-चढ़ाव ने कॉइनबेस जैसी कंपनियों के शेयर मूल्यों को प्रभावित किया है।
क्रिप्टो मार्केट में मंदी के कारण कॉइनबेस के शेयर अन्य क्रिप्टो-एक्सपोज्ड स्टॉक्स के साथ दबाव में रहे हैं, हालांकि कुछ निवेशक जैसे ARK Invest ने गिरावट के दौरान शेयर खरीदे हैं, यह संकेत देते हुए कि वे आगामी सुधार पर दांव लगा रहे हैं।
कॉइनबेस के शेयरों व क्रिप्टो मार्केट की अस्थिरता इस बात को रेखांकित करती है कि बाजार की भावना और क्रिप्टोकरेंसी की कीमतें शेयर प्रदर्शन के प्रमुख कारक बने हुए हैं।
Coinbase का उभरता रणनीतिक कदम और प्रतिस्पर्धा
Coinbase का उद्देश्य सिर्फ क्रिप्टो ट्रेडिंग तक सीमित नहीं रहना है। कंपनी स्टॉक ट्रेडिंग, इवेंट कॉन्ट्रैक्ट और टोकनाइज्ड स्टॉक जैसी सेवाओं को भी पेश कर बाजार में अपनी जगह मजबूत करने का प्रयास कर रही है।
इसके अलावा, Coinbase ने ग्रोथ और नियामक संवाद को मजबूत करने के लिए पूर्व ब्रिटिश वित्त मंत्री जॉर्ज ऑसबोर्न को सलाहकार परिषद का नेतृत्व करने के लिए नियुक्त किया है, जो बड़ी वैश्विक नियामक नीतियों को प्रभावित करने में मदद करेगा।
इन प्रयासों के बावजूद, कॉइनबेस को Robinhood, Interactive Brokers और अन्य प्लेटफॉर्म जैसी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है, खासकर तब जब इसकी क्रिप्टो-आधारित सेवाओं को लेकर नियामक दबाव बना हुआ है।
निष्कर्ष
Coinbase का विस्तार और यूनिवर्सल एक्सचेंज मॉडल वित्तीय सेवाओं के विस्तृत प्रसार को दर्शाता है, लेकिन नियामक अनिश्चितता ने कंपनी के शेयरों पर दबाव बनाया है। भारत समेत वैश्विक बाजारों में नियमन की अस्पष्टता के चलते निवेशक सतर्क बने हुए हैं।
यदि Coinbase स्पष्ट नियमों, मजबूत ग्लोबल फ्रेमवर्क और स्थिर क्रिप्टो बाजार अस्थिरता के बीच संतुलन बना पाता है, तो यह अपनी विस्तार योजनाओं को सफल बना सकता है।
फिलहाल, वर्तमान बाजार प्रतिक्रिया यह संकेत देती है कि तकनीकी नवाचार के साथ-साथ ठोस नियामक दिशानिर्देश भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं।
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