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Rajeev Ranjan Roy
लेखक: Rajeev Ranjan Royस्टाफ लेखक
Pratik Bhuyan
Pratik Bhuyan द्वारा समीक्षितस्टाफ संपादक

भारत में क्रिप्टो अपनाने की तेज़ लहर, क्या बनेगा ग्लोबल हब?

भारत तेजी से क्रिप्टो अपनाने में अग्रणी बन रहा है और वैश्विक हब बनने की दिशा में मजबूत कदम बढ़ा रहा है।

भारत में क्रिप्टो अपनाने की तेज़ लहर, क्या बनेगा ग्लोबल हब?
राय

चेनलिसिस (Chainalysis) के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार भारत न केवल रिटेल उपयोग में आगे है बल्कि संस्थागत और स्थिरकॉइन प्रवाह में भी प्रमुख भूमिका निभा रहा है, लेकिन अवसर और जोखिम दोनों साथ में बढ़े हैं।

चेनलिसिस (Chainalysis) की 2025 की Global Crypto Adoption Index रिपोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत अब वैश्विक क्रिप्टो परिदृश्‍य का एक महत्त्वपूर्ण केन्द्र बन चुका है। रिपोर्ट बताती है कि भारत कुल मिलाकर सर्वोच्च स्थान पर आया है और वह चारों उप-सूचकांकों — रिटेल उपयोग, केंद्रीकृत एक्सचेंज गतिविधि, DeFi और संस्थागत/बड़े प्रवाह — में मजबूती दिखा रहा है। यह केवल एक आकस्मिक उछाल नहीं, बल्कि लगातार पयंक्तियों का परिणाम है जो पिछले कुछ वर्षों से बन रहा है।

इस तेजी का एक बड़ा कारण यहाँ की जनसांख्यिकीय बनावट और डिजिटल पहुँच है। सस्ते मोबाइल डेटा, स्मार्टफोन की व्यापकता और डिजिटल पेमेंट-सहकारी पारिस्थितिकी ने क्रिप्टो तक पहुँच आसान कर दी है। छोटे-मध्यम निवेशक, युवा टेक-सैवी वर्ग और रेमिटेंस-संबंधी जरूरतों वाले परिवारों ने स्थिरकॉइन और बिटकॉइन दोनों का उपयोग बढ़ाया है — जहां स्थिरकॉइन त्वरित और सस्ता ट्रांसफर विकल्प बन रहे हैं, वहीं बिटकॉइन अक्सर फिएट-ट्रांजेक्शन का मार्ग बना हुआ है। Chainalysis यह भी रेखांकित करता है कि स्थिरकॉइन्स जैसे यूएसडीटी/यूएसडीसी (USDT/USDC) वैश्विक प्रवाह में एक केंद्रीय भूमिका निभा रहे हैं।

बायबिट इंडिया के कंट्री मैनेजर, विकास कुमार गुप्ता के अनुसार,

भारत लगातार दो वर्षों से वैश्विक क्रिप्टो अपनाने में अग्रणी रहा है, जिसमें मज़बूत खुदरा भागीदारी प्रदर्शित हुई है और देश की नवाचार की चाहत उजागर हुई है। विकास का अगला चरण स्थायी नींव के निर्माण में निहित है, और विनियमन इस यात्रा का केंद्रबिंदु होगा। एक समर्पित डिजिटल परिसंपत्ति ढाँचा, मानकीकृत संरक्षण समाधान और मज़बूत अनुपालन मानदंड बैंकों, परिसंपत्ति प्रबंधकों और वित्तीय संस्थानों की सार्थक संस्थागत भागीदारी को सुनिश्चित करते हुए उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित कर सकते हैं।

गुप्ता आगे बताते हैं: “अधिकारियों ने पहले ही उद्योग के हितधारकों के साथ बातचीत शुरू कर दी है, जो एक संतुलित और व्यावहारिक नीतिगत माहौल बनाने की दिशा में एक आशाजनक कदम है। सिंगापुर के एमएएस ढांचे के समान लाइसेंसिंग मॉडल अपनाकर, भारत विश्वास को और मज़बूत कर सकता है, संस्थागत पूंजी आकर्षित कर सकता है और घरेलू नवाचार को प्रोत्साहित कर सकता है।”

सही नियामक माहौल के साथ, भारत अल्पकालिक अटकलों से आगे बढ़कर दीर्घकालिक धन सृजन की ओर अग्रसर होने, खुद को एक वैश्विक वेब3 केंद्र के रूप में स्थापित करने और क्रिप्टो क्षेत्र के लिए एक स्थायी भविष्य को आकार देने की स्थिति में है।“

आंकड़ों में क्षेत्रीय तस्वीर भी महत्वपूर्ण है

एशिया-प्रशांत (APAC) क्षेत्र ने 12 महीनों में हुई ऑन-चेन गतिविधि में तेज़ी दिखाई — लगभग 69% सालाना वृद्धि के साथ APAC के ऑन-चेन वॉल्यूम में बड़ा इजाफा हुआ है, जिसमें भारत का योगदान प्रमुख रहा। यह संकेत देता है कि केवल व्यक्तिगत निवेशक ही नहीं बल्कि डेवलपर्स, स्टार्ट-अप्स और कुछ संस्थागत खिलाड़ी भी इस क्षेत्र में सक्रिय हो रहे हैं, जिससे इकोसिस्टम में गहराई और परिष्करण दोनों आ रहे हैं।

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हालाँकि, इस उभरती ताकत के साथ जोखिम भी बढ़े हैं। Chainalysis और अन्य संस्थागत रिपोर्टों ने धोखाधड़ी, साइबर हमलों और ठगी के मामलों में वृद्धि दर्ज की है — 2024-25 में स्कैम और हैकिंग-रिलेटेड राजस्व व हानियाँ उल्लेखनीय रूप से बढ़ी हैं। 2025 के पहले छह माह में दुनिया भर में बड़ी चोऱियों की रिपोर्टें आईं, जिनमें कुछ भारत-सम्बंधित घटना-श्रृंखलाएँ भी शामिल रहीं। इसलिए सुरक्षा-प्रोटोकॉल, एक्सचेंज-ऑडिट और रेगुलेटरी अनुपालन पर ध्यान न दिया गया तो उपयोग-वृद्धि के साथ ही दुष्परिणाम भी बढ़ सकते हैं।

नियामकीय परिदृश्य मिश्रित है

भारत में कर नीति, AML/CFT नियम और कभी-कभी सख्त प्रवर्तन ने उपयोगकर्ताओं को प्रभावित किया है, परन्तु इससे पूर्ण रूप से गतिविधि रुकती नहीं दिखती; बल्कि उपयोग के तरीके बदल रहे हैं (उदाहरण P2P, वॉलेट-आधारित पहुँच, स्थिरकॉइन उपयोग)। Chainalysis का फाइंडिंग यह संकेत देती है कि कठोर नियमों के बावजूद, अगर पारदर्शिता, उपभोक्ता-सुरक्षा और वैधानिक रूप से स्पष्ट मार्ग मिलें तो संस्थागत फंडिंग और वैध सेवा प्रदाता और तेज़ी से आ सकते हैं जिससे बाज़ार का परिमाण और परिपक्वता दोनों बढ़ेंगे।

अर्थव्यवस्था और वैश्विक वित्तीय धाराओं की दृष्टि से भारत की स्थिति दिलचस्प अवसर प्रस्तुत करती है: उभरता हुआ क्रिप्टो-इकोनॉमी पेमेंट, रेमिटेंस-लिंकेज और छोटे व्यापारों के लिए नए साधन दे सकता है। साथ ही, स्थानीय स्टेबलकॉइन उपयोग (या रेगुलेटेड डिजिटल रूपये योजनाएँ) से व्यापारिक समरूपता और आय-विकल्पों में वृद्धि संभव है। परंतु इसके साथ-साथ आवश्यक है मजबूत उपभोग्ता-शिक्षा, साइबर सुरक्षा निवेश और स्पष्ट रेगुलेटरी ढाँचा ताकि संस्थागत निवेशक भी भरोसा करके दीर्घकालिक पूँजी ला सकें।

निष्कर्ष

चेनलिसिसके नवीनतम डेटा के अनुसार भारत की तेजी केवल संख्या नहीं बल्कि विविध उपयोग-मॉडल का संयोजन है — रिटेल, DeFi, स्थिरकॉइन और बढ़ती संस्थागत रुचि।

यह स्टार्टर-किट है: यदि नीति-निर्माता, उद्योग और सुरक्षा-विकासकर्ता मिलकर पारदर्शी, सुरक्षित और समावेशी नियम बनाएँ तो भारत न केवल उपयोग में अग्रणी बना रहेगा, बल्कि वैश्विक क्रिप्टो-इनोवेशन का भी केंद्र बन सकता है।

पर यह तब तक टिकाऊ नहीं रहेगा जब तक धोखाधड़ी, चोरी और अस्पष्ट नियामकता जैसी कमजोरियाँ सक्रिय रूप से न सुलझाई जाएँ।

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