भारत में क्रिप्टोकरेंसी और वर्चुअल डिजिटल एसेट (VDA) व्यापार पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ा है और युवा निवेशकों के बीच इसका उत्साह स्पष्ट रूप से देखा जा रहा है। हालांकि, टैक्स और नियामक स्पष्टता की कमी के कारण इस उद्योग को कई बाधाओं का सामना करना पड़ा है, जिसके चलते अब बजट 2026 को लेकर उद्योग जगत में खास उम्मीदें पनप रही हैं।
वर्तमान में भारत में VDA पर जो टैक्स ढाँचा लागू है उसके अंतर्गत ट्रेडिंग पर 30 प्रतिशत की सीधी आयकर दर लागू होती है और प्रत्येक बड़े लेन-देन पर 1 प्रतिशत की टैक्स कटौती (TDS) की व्यवस्था है। यह TDS दर उद्योग के अनुसार बहुत अधिक है और इससे व्यापार में तरलता कम होती है तथा छोटे निवेशकों पर अप्रत्यक्ष बोझ बढ़ता है।
क्रिप्टो पर कम TDS की मांग
क्रिप्टो उद्योग के नेताओं का कहना है कि बजट 2026 में TDS दर को 1 प्रतिशत से घटाकर मात्र 0.01 प्रतिशत करने की जरूरत है। इससे निवेशकों की कर अनुपालन क्षमता में सुधार होगा और घरेलू एक्सचेंजों पर व्यापार को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही, TDS लागू होने वाली सीमा को भी वर्तमान न्यून स्तर से बढ़ाकर लगभग पाँच लाख रुपये तक किए जाने की मांग उठ रही है, ताकि छोटे निवेशकों को अतिरिक्त बोझ से बचाया जा सके।
घाटे की समायोजन अनुमति
उद्योग की एक अन्य बड़ी मांग VDA से होने वाले घाटों को लाभ के मुकाबले सेट-ऑफ करने की अनुमति प्रदान करना है। वर्तमान नियमों के तहत किसी भी नुकसान को अन्य लेन-देन के लाभ के विरुद्ध समायोजित नहीं किया जा सकता, जिससे निवेशकों को भारी कर बोझ का सामना करना पड़ता है। यदि यह अनुमति दी जाती है तो यह अन्य परिसंपत्तियों के समान कर व्यवहार सुनिश्चित करेगा और निवेशकों के लिए एक न्यायसंगत ढाँचा तैयार करेगा।
टैक्स नियमों और नियमन के क्षेत्र में स्पष्ट दिशा-निर्देश
इसके अतिरिक्त, उद्योग यह भी चाहता है कि सरकार वर्चुअल डिजिटल एसेट्स के टैक्स नियमों और नियमन के क्षेत्र में स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करे। वर्तमान में VDAs को लेकर अस्पष्टता है और कई निवेशक तथा कंपनियाँ यह नहीं समझ पातीं कि उन्हें किन नियमों के तहत आना है। इससे निवेशकों में विश्वास की कमी बनी हुई है और कई लोग विदेशी एक्सचेंजों की ओर रुख कर लेते हैं।
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लगभग 90 प्रतिशत क्रिप्टो ट्रेडिंग विदेशी प्लेटफार्मों पर
क्रिप्टो सेक्टर के प्रतिनिधियों का यह भी मानना है कि यदि बजट 2026 में इन मांगों को शामिल किया जाता है तो यह न केवल घरेलू व्यापार को प्रोत्साहित करेगा, बल्कि सरकार के लिए कर राजस्व में भी समग्र वृद्धि कर सकता है। उदाहरण के लिए, कुछ रिपोर्टों के अनुसार, वर्तमान टैक्स नियमों के कारण लगभग 90 प्रतिशत क्रिप्टो ट्रेडिंग विदेशी प्लेटफार्मों पर हो रही है, जिससे भारत को अनुमानित आय में भारी गिरावट का सामना करना पड़ रहा है।
हालांकि यह भी ध्यान देने योग्य है कि सरकार और वित्त विभाग की तरफ से अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है कि बजट में इन मांगों को शामिल किया जाएगा या नहीं। कुछ सरकारी अधिकारियों ने क्रिप्टो को लेकर सतर्कता भी व्यक्त की है और इसे वित्तीय स्थिरता तथा अपराध वित्तपोषण से जुड़े जोखिमों के कारण संदेह की निगाह से देखा है। इन प्रतिबंधों और चिंता के कारण बजट में कुछ कटौती या नियमों में संशोधन की संभावना पूरी तरह सुनिश्चित नहीं कही जा सकती।
पिछले वर्ष के बजट 2025 में क्रिप्टो उद्योग को कोई विशिष्ट राहत नहीं मिली थी, जिससे उद्योग निराश हुआ था। उस समय भी कई उद्योग विशेषज्ञों ने यह कहा था कि टैक्स नियमों में समानता और घरेलू एक्सचेंजों तथा अंतर्राष्ट्रीय प्लेटफार्मों के बीच संतुलन की कमी ने निवेशकों और व्यापारियों के लिए कठिनाइयाँ उत्पन्न कीं।
क्रिप्टो निवेशकों की अपेक्षाएँ देश की डिजिटल अर्थव्यवस्था के भविष्य से जुड़ी हुई हैं। यदि बजट 2026 में उपरोक्त सुधार लागू होते हैं, तो इससे न केवल निवेशकों के बीच विश्वास बढ़ेगा बल्कि नए निवेशकों को आकर्षित करने में भी मदद मिलेगी। इससे भारत वैश्विक डिजिटल एसेट बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक रूप से बेहतर स्थिति में आ सकता है।
निष्कर्ष
बजट 2026 क्रिप्टो उद्योग के लिए एक मोड़ साबित हो सकता है यदि सरकार TDS में कमी, घाटे की समायोजन अनुमति और स्पष्ट कर तथा नियामक नियमों की ओर कदम बढ़ाती है। यह न केवल निवेशकों की आशाओं को सशक्त करेगा बल्कि देश को इस क्षेत्र में वैश्विक प्रतिस्पर्धा मेंमजबूती प्रदान करेगा।
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