वित्त वर्ष 2024-25 में भारतीय क्रिप्टो निवेशकों ने बड़ी संख्या में अपने लेन-देन का रुख विदेशी यानी ऑफशोर मंचों की ओर मोड़ लिया। यह बदलाव देश के डिजिटल संपत्ति बाजार के लिए एक अहम संकेत माना जा रहा है। हाल ही में जारी ‘कॉइनएक्स’ नामक क्रिप्टो कर अनुपालन मंच की रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय कारोबारियों का करीब 72.66% लेन-देन विदेशी मंचों पर दर्ज हुआ, जबकि घरेलू मंच पीछे छूटते नजर आए।
रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में कुल 70,536 करोड़ रुपये के क्रिप्टो कारोबार में से 51,252 करोड़ रुपये का लेन-देन विदेशी मंचों पर हुआ। इससे साफ है कि निवेशकों ने घरेलू विकल्पों के बजाय अंतरराष्ट्रीय मंचों को ज्यादा भरोसेमंद और सुविधाजनक माना।
सबसे बड़ा कारण
विशेषज्ञों का कहना है कि इसका सबसे बड़ा कारण क्रिप्टो संपत्तियों पर लागू सख्त कर व्यवस्था है। मौजूदा नियमों के तहत 30 प्रतिशत पूंजीगत लाभ कर और हर लेन-देन पर 1 प्रतिशत कर कटौती (टीडीएस) ने कारोबारियों पर भारी दबाव डाला है। घरेलू मंचों पर कर कटौती को अतिरिक्त बोझ के रूप में देखा जा रहा है, जिससे बाजार की तरलता प्रभावित हुई है।
‘कॉइनएक्स’ के आंकड़ों के मुताबिक, इस अवधि में भारतीय कारोबारियों ने करीब 6,394 करोड़ रुपये का मुनाफा, जबकि 4,781 करोड़ रुपये का नुकसान दर्ज किया। इसके बावजूद लगभग नौ लाख से अधिक उपयोगकर्ताओं ने वर्ष भर क्रिप्टो लेन-देन किया, जो बाजार में सक्रियता को दर्शाता है।
कर और शुद्ध नुकसान
रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि करीब 49.09 प्रतिशत उपयोगकर्ताओं को कर योग्य लाभ पर कर देना पड़ा, जबकि उनका कुल शुद्ध नुकसान लगभग 1,178 करोड़ रुपये रहा। इसकी बड़ी वजह यह है कि मौजूदा कर व्यवस्था में नुकसान को मुनाफे से समायोजित करने की अनुमति नहीं है, जिससे कई निवेशक दोहरी मार झेल रहे हैं।
कर प्रशासन ने 1 प्रतिशत टीडीएस को लेन-देन पर नजर रखने का जरिया माना था, लेकिन व्यवहार में यह कई कारोबारियों के लिए बाधा बन गया। जिन विदेशी मंचों पर टीडीएस की सख्ती कम है, वहां भारतीय निवेशकों ने तेजी से अपने सौदे शिफ्ट कर दिए।
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बाजार विश्लेषकों के मुताबिक, इस प्रवृत्ति से घरेलू क्रिप्टो उद्योग को कड़ी प्रतिस्पर्धात्मक चोट पहुंची है। विदेशी मंच बेहतर तरलता और कर कटौती से राहत का विकल्प दे रहे हैं, जिससे देश के भीतर क्रिप्टो कारोबार का भरोसा कमजोर पड़ा है।
नियामकीय स्तर पर बदलाव के संकेत भी मिल रहे हैं। कुछ विदेशी मंचों ने भारत की वित्तीय खुफिया इकाई के साथ पंजीकरण कराना शुरू किया है, ताकि वे भारतीय नियमों के दायरे में रहकर सेवाएं दे सकें। हालांकि यह प्रक्रिया अभी शुरुआती दौर में ही है।
अब नजरें वित्त वर्ष 2026-27 के बजट पर टिकी हैं। क्रिप्टो उद्योग को उम्मीद है कि सरकार कर ढांचे में सुधार, नुकसान की भरपाई की अनुमति और टीडीएस दर में बदलाव जैसे कदम उठा सकती है। इससे घरेलू मंचों को संजीवनी मिलने और बाजार में स्थिरता लौटने की उम्मीद जताई जा रही है।
निष्कर्ष
वित्त वर्ष 2024-25 में क्रिप्टो कारोबार का बड़ा हिस्सा विदेशी मंचों पर जाना यह दिखाता है कि मौजूदा कर और नियामकीय ढांचा निवेशकों को देश से बाहर विकल्प तलाशने को मजबूर कर रहा है। यदि सरकार आने वाले बजट में संतुलित सुधार करती है, तो घरेलू क्रिप्टो उद्योग को दोबारा मजबूती मिल सकती है और निवेशकों का भरोसा लौट सकता है।
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