प्रमुख बिंदु
गांधीधाम के FCI कॉलोनी निवासी ने कच्छ ईस्ट साइबर क्राइम में FIR कराई; कुल नुकसान लगभग ₹56.47 लाख।
टेलीग्राम ग्रुप के जरिए संपर्क, व्यक्तिगत बैंकिंग-डेटा कराया गया, फर्जी अकाउंट बनाकर शुरुआती लाभ दिखाकर भरोसा कैसा गया।
निकासी रोकने के बाद 'रिकवरी शुल्क/टैक्स' का बहाना बनाकर मोटी रकम तथा बार-बार पेमेन्ट की मांग।
राजकोट-गुजरात में हाल के समय में क्रिप्टो फ्रॉड के कई मामले सामने आए हैं; साइबर सेल और वित्त मंत्रालय समय-समय पर सतर्क करते रहे हैं।
कच्छ के गांधीधाम के FCI कॉलोनी के 51 वर्षीय निवासी, मूलतः पुणे के रहने वाले हैं, ने स्थानीय कच्छ ईस्ट साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई है कि उन्हें एक क्रिप्टोकरेंसी ट्रेडिंग स्कैम में करीब ₹56.47 लाख से अधिक का चूना लगाया गया।
शिकायत में बताया गया है कि शुरुआत में शातिरों ने टेलीग्राम पर एक महिला के जरिए संपर्क किया और 'Conforge Finance' नामक ट्रेडिंग ग्रुप में शामिल किया गया।
शुरुआती कुछ निवेशों पर मामूली लाभ दिखाकर भरोसा जीतने के बाद पीड़ित को बड़ी-बड़ी राशियाँ निवेश करने के लिए उकसाया गया और बाद में राशि निकालने पर रोक लगा दी गई। आरोपितों में दीपा, अनुभव गोयल, अशुतोष कुमार और कुछ संस्थागत नाम बताए गए हैं।
घटना का तरीका - विशेषज्ञों का मॉडल
पुलिस शिकायत के मुताबिक, शिकार बनने वाले को पहले व्यक्तिगत और बैंकिंग जानकारी देने के लिए प्रेरित किया गया, जिससे अपराधियों ने उसके नाम पर फर्जी ट्रेडिंग अकाउंट सेट कर दिया।
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शुरुआती लाभ दिखाकर विश्वास जगाने के बाद निकालने पर आड़ में 'जुर्माना', 'टैक्स' या 'रिकवरी फीस' जैसे बहाने बनाकर अतिरिक्त धनतोड़ की गई। पीड़ित ने जून से सितंबर के बीच कुल 38 लेन-देनों के ज़रिए ये राशि ट्रांसफर की और जब वह पैसे वापस मांगना चाहा तो और भी अतिरिक्त रकम माँगी गई, तब उसे संदेह हुआ और FIR दर्ज कराई।
क्रिप्टो स्कैम का बढ़ता खतरा
हाल के महीनों में गुजरात और राजकोट के आसपास के क्षेत्रों में क्रिप्टो से जुड़े फ्रॉड की घटनाएँ बढ़ती दिख रही हैं; एक ही तरह की रिपोर्ट्स में युवा और मध्यम आयु वर्ग दोनों के बड़े-बड़े नुकसान दर्ज हुए हैं।
विशेषज्ञ और वित्तीय गाइडलाइंस बार-बार चेतावनी देते हैं कि वॉट्सऐप/टेलीग्राम जैसे अनौपचारिक चैनलों के माध्यम से किसी भी निवेश प्रस्ताव पर तुरंत भरोसा न करें।
कैसे बचें
1. अज्ञात लिंक/एप मत खोलें: अनजान स्रोत से मिले APK या पैसे भेजने के लिंक न खोलें; वहीं से OTP या बैंक क्रेडेंशियल्स चोरी हो सकते हैं।
2. संदिग्ध प्लेटफॉर्म की जाँच करें: किसी भी विनिमय/वॉलेट/वितरक का सत्यापन करें — क्या वह FIU-IND/PMLA के अंतर्गत दर्ज है, क्या उसके बारे में स्वतंत्र समीक्षाएँ व रेगुलेटरी जानकारी उपलब्ध है।
3. अनौपचारिक चैनलों से सौदे न करें: निवेश की पेशकश केवल वॉट्सऐप/टेलीग्राम समूहों से मिलने पर सावधान रहें; मान्य ब्रोकर्स और विनिमयों के आधिकारिक पोर्टल और KYC प्रक्रियाओं का उपयोग करें।
4. तुरंत पैसे न भेजें, प्रोसेस पढ़ें: 'गारंटीड रिटर्न' और 'तुरंत बड़ा लाभ' जैसे दावों पर शंका रखें; निकालने पर शुल्क की मांग हो तो तुरंत संबंधित बैंक/प्लेटफॉर्म से आधिकारिक संपर्क पर सत्यापित करें।
5. शिकायत दर्ज कराएँ और प्रमाण सुरक्षित रखें: किसी भी अनियमितता पर तुरंत नज़दीकी साइबर क्राइम स्टेशन या ऑनलाइन पोर्टल पर रिपोर्ट करें और सभी संदेश/लेन-देनों की स्क्रीनशॉट/बैंक स्टेटमेंट सुरक्षित रखें।
इसमामले ने फिर एक बार याद दिलाया है कि डिजिटल निवेश में सावधानी सर्वोपरि है। यदि आपको भी संदेह हो, तोतुरंत साइबर सेल से संपर्क करें और किसी भी तरह की अग्रिम भुगतान-मांग को अनदेखा करें।
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