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Rajeev Ranjan Roy
लेखक: Rajeev Ranjan Royस्टाफ लेखक
Pratik Bhuyan
Pratik Bhuyan द्वारा समीक्षितस्टाफ संपादक

भारत में 49 क्रिप्टो एक्सचेंज FIU के साथ पंजीकृत, मनी लॉन्ड्रिंग पर सख़्ती

भारत में 2024–25 के दौरान 49 क्रिप्टो एक्सचेंज FIU के साथ पंजीकृत हुए। सरकार का फोकस मनी लॉन्ड्रिंग, अवैध लेन-देन और वित्तीय अपराध रोकने पर है।

भारत में 49 क्रिप्टो एक्सचेंज FIU के साथ पंजीकृत, मनी लॉन्ड्रिंग पर सख़्ती
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भारत में क्रिप्टो एक्सचेंजों पर निगरानी क्यों बढ़ी?

डिजिटल संपत्ति या क्रिप्टोकरेंसी की बढ़ती लोकप्रियता के बीच भारत सरकार ने Financial Intelligence Unit (FIU) के साथ पंजीकरण की प्रक्रिया को सख़्त करते हुए वित्तीय वर्ष 2024–25 में 49 क्रिप्टो एक्सचेंजों को पंजीकृत किया। इस पंजीकरण का मुख्य उद्देश्य धन शोधन, आतंकवादी गतिविधियों के वित्त पोषण और अन्य गंभीर आपराधिक गतिविधियों का त्वरित पता लगाकर रोक लगाना है।

क्रिप्टोकरेंसी को कानूनी रूप में Virtual Digital Asset (VDA) कहा जाता है और जिन प्लेटफॉर्मों पर व्यापार होता है उन्हें वीडीए सेवा प्रदाता (वीडीए एसपी) कहा जाता है। भारत में इन सेवा प्रदाताओं को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्डरिंग एक्ट (PMLA) के तहत रिपोर्टिंग इकाई के रूप में शामिल किया गया है, जिससे वित्तीय लेन-देन की निगरानी और पारदर्शिता बढ़ सके।

अधिकारियों की समीक्षा के अनुसार, FIU को भेजी गई संदिग्ध लेन-देन रिपोर्ट (STR) में कई उच्च-जोखिम वाले मामलों की पहचान हुई, जिनमें अवैध हवालों के लेन-देन, जुए से जुड़े व्यापार, धोखाधड़ी और घोटाले, यहां तक कि अवैध सामग्री वाली वेबसाइटों से जुड़े मामलों का भी संकेत मिला। ये संकेत इस बात को दर्शाते हैं कि क्रिप्टो परिसंपत्तियों का दुरुपयोग गंभीर आपराधिक गतिविधियों के लिए किया जा रहा है। 

पंजीकृत एक्सचेंजों में से 45 प्लेटफॉर्म भारत में

रिपोर्ट के अनुसार, कुल 49 पंजीकृत एक्सचेंजों में से 45 प्लेटफॉर्म भारत में आधारित है, जबकि 4 विदेशी नियामक क्षेत्र (ऑफशोर) से संचालित है। पंजीकरण के तहत इन इकाइयों को नियमों के पालन के अलावा अपनी बैंक और वित्तीय संस्थानों के खाते, नामित निदेशक तथा मुख्य अधिकारी की जानकारी और संपर्क विवरण FIU को उपलब्ध कराना आवश्यक है। इसके अलावा आंतरिक लेखा जांच, जोखिम आधारित ग्राहक पहचान प्रक्रिया तथा नियमित जोखिम मूल्यांकन जैसी प्रक्रियाओं को अपनाना भी अनिवार्य कर दिया गया है।

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FIU की रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि इन प्लेटफॉर्मों द्वारा भेजी गई एसटीआर की भौगोलिक जांच से यह पता चला कि कुछ क्षेत्रों में ऐसी गतिविधियों की संख्या अधिक है और उपयोग किए जाने वाले डिजिटल संपत्ति के प्रकार भी एक समान रूप से पहचाने गए हैं। इस विश्लेषण से स्पष्ट होता है कि क्रिप्टो स्थानांतरण की गतिशीलता और उसकी पारदर्शिता की कमी आपराधिक तत्वों के लिए अवसर प्रदान कर रही है।

निरंतर निगरानी और सख्ती

इसके अलावा, कुछ एक्सचेंजों के नियमों के उल्लंघन के मामले में कुल 28 करोड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है, जिससे संकेत मिलता है कि नियामक संस्थाएँ निरंतर निगरानी और सख्ती से दिशा निर्देश लागू कर रही हैं। पंजीकरण के बाद, ये एक्सचेंज अपेक्षित भीतरी समीक्षाएं और जोखिम मूल्यांकन रिपोर्टें समय-समय पर साझा करेंगे, जिससे वित्तीय प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित हो सके।

क्रिप्टो करेंसी की वैश्विक प्रकृति और तीव्र लेन-देन क्षमता ने इसे आर्थिक रूप से आकर्षक बनाया है, लेकिन इसके साथ जुड़े पारदर्शिता के अभाव और पहचान छिपाने के जोखिम को देखते हुए भारत जैसे बड़े बाजारों में इसके नियंत्रण की आवश्यकता और बढ़ गई है। इसी कारण से भारत ने FIU को एकल प्राधिकरण के रूप में जिम्मेदार सौंपा है, जो क्रिप्टो प्लेटफॉर्मों के क्रियाकलाप पर निगरानी रखता है और समय-समय पर रिपोर्टिंग की आवश्यकता तय करता है।

निष्कर्ष

भारत में क्रिप्टो परिसम्पत्ति बाजार में तेजी से वृद्धि के साथ संभावित जोखिम भी बढ़े हैं। इस संदर्भ में 49 एक्सचेंजों का FIU के साथ पंजीकरण एक सकारात्मक कदम है, जो वित्तीय अपराधों को रोकने में मदद करेगा। हालांकि, इससे जुड़े निगरानी तंत्र को और अधिक प्रभावी बनाना तथा प्रयोगकर्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी आवश्यक होगा, ताकि डिजिटल संपत्ति का उपयोग कानूनी और सुरक्षित तरीके से हो सके।

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