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Rajeev Ranjan Roy
लेखक: Rajeev Ranjan Royस्टाफ लेखक
Pratik Bhuyan
Pratik Bhuyan द्वारा समीक्षितस्टाफ संपादक

भारत में क्रिप्टो टैक्स नीति पर पुनर्विचार की बहस, बजट 2026 में संशोधन की उम्मीद

भारत की क्रिप्टो उद्योग बजट 2026 से पहले 30% टैक्स और 1% टीडीएस को कम करने तथा घाटे की क्षतिपूर्ति नियमों पर पुनर्विचार की मांग कर रही है, ताकि नवाचार, पारदर्शिता और ऑनशोर निवेश को बढ़ावा मिले।

भारत में क्रिप्टो टैक्स नीति पर पुनर्विचार की बहस, बजट 2026 में संशोधन की उम्मीद
Regulations

भारत में क्रिप्टोकरेंसी (वर्चुअल डिजिटल एसेट्स) को कर की दृष्टि से नियंत्रित करने वाला ढांचा वर्ष 2022 में लागू हुआ था, जिसके तहत क्रिप्टो से होने वाले लाभ पर 30 प्रतिशत फ्लैट टैक्स और प्रत्येक लेन-देन पर 1 प्रतिशत टैक्स कटौती (टीडीएस) लागू है। फिलहाल घाटे को लाभ के खिलाफ सेट-ऑफ करने की अनुमति नहीं है, जिससे निवेशकों को भारी कर बोझ सहन करना पड़ता है।

कर व्यवस्था वैश्विक बाजार अनुरूप नहीं

क्रिप्टो एक्सचेंजों के प्रमुख अधिकारियों का कहना है कि यह कर व्यवस्था अब वैश्विक बाजार की तेज गति और डिजिटल धन की समझ के अनुरूप नहीं रही है। उनका तर्क है कि सख्त कर और लेन-देन पर टीडीएस जैसे प्रावधान तरलता को घटा रहे हैं और निवेश तथा नवाचार को सीमित कर रहे हैं। यदि यह स्थिति बनी रहती है तो प्रतिभागी अपने हितों की पूर्ति के लिए विदेशों की ओर रुख कर सकते हैं, जिससे भारत में ऑनशोर व्यापार और प्रबंधन कमजोर होगा।

वित्त वर्ष 2026-27 का केंद्रीय बजट

वित्त वर्ष 2026-27 का केंद्रीय बजट 1 फरवरी, 2026 को प्रस्तुत होने वाला है। क्रिप्टो उद्योग इसे एक महत्वपूर्ण अवसर के रूप में देख रहा है, जहां कर ढांचे में समयबद्ध संशोधन की मांग सरकार के समक्ष रखी जा सकती है। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि अगर टैक्स बोझ को सहज और न्यायसंगत बनाया जाए तो इससे पारदर्शिता, अनुपालन और निवेशकों का भरोसा मजबूत होगा।

विशेष रूप से, प्रमुख क्रिप्टो एक्सचेंजों वज़ीरएक्स (WazirX), ज़ेबपे (ZebPay) तथा बाइनेंस (Binance) के प्रतिनिधियों ने सुझाव दिया है कि 1 प्रतिशत टीडीएस को कम करना और घाटे की क्षतिपूर्ति की व्यवस्था पर पुनर्विचार करना चाहिए। इससे न केवल तरलता लौट सकती है बल्कि कर अनुपालन की दर भी सुधर सकती है। साथ ही, निवेशकों को एक पूर्वानुमेय और संतुलित निवेश माहौल उपलब्ध होगा, जिससे डिजिटल संपत्ति का विकास सुगम होगा।

नियामक नीतियाँ आर्थिक हितों के अनुरूप हों

उद्योग के अनुसार भारत क्रिप्टो बाजार में एक प्रमुख भूमिका निभा सकता है, बशर्ते कर और नियामक नीतियाँ उन मूलभूत आर्थिक हितों के अनुरूप हों जो वैश्विक स्तर पर डिजिटल संपत्ति के विकास के लिए अपनाई जा रही हैं। उदाहरण के लिए, कुछ देशों ने टैक्स दरों को संशोधित कर सभ्य निवेश और भागीदारी को प्रोत्साहित किया है, जबकि भारत में अभी भी कड़े टैक्स प्रावधानों को बरकरार रखा गया है, जिससे नवोदित क्षेत्र के लिए चुनौतियाँ बनी हुई हैं।

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हालाँकि, यह भी ध्यान रखना आवश्यक है कि कुछ सरकारी विभाग जैसे आरबीआई और इनकम टैक्स विभाग क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े जोखिमों पर सतर्क बने हुए हैं। उन्होंने निवेशकों तथा अधिकारियों को इसके नियमों व निगरानी की कठिनाइयों पर चेतावनी दी है। ये विभाग यह मानते हैं कि उच्च स्तर पर क्रिप्टो लेन-देन का निरीक्षण और नियंत्रण मुश्किल हो सकता है, जिससे कर वसूली और वित्तीय अनुशासन पर असर पड़ता है।

रुपये जैसा कानूनी मुद्रा नहीं

सरकार ने अब तक क्रिप्टोकरेंसी को भारतीय रुपये जैसा कानूनी मुद्रा का रूप नहीं दिया है, पर यह वर्चुअल डिजिटल एसेट के रूप में वैध रूप से कारोबार योग्य है और कर नियमों के दायरे में आता है। वर्तमान ढांचा अनुपालन के नियमों पर अत्यधिक जोर देता है, जिससे निवेशकों और प्लेटफार्मों पर बोझ बढ़ा है।

क्रिप्टो टैक्स नीति के संदर्भ में बजट 2026 को संभावित परिवर्तन का मंच माना जा रहा है। अगर सही संशोधन किये जाते हैं तो इससे निवेशकों को राहत मिलेगी, ऑनशोर व्यापार को बल मिलेगा और भारत को डिजिटल संपत्ति के क्षेत्र में प्रतिस्पर्धात्मक लाभ मिलेगा। इसके परिणामस्वरूप रोजगार, निवेश और तकनीकी विकास को भी बढ़ावा मिल सकता है।

निष्कर्ष

क्रिप्टोकरेंसी पर वर्तमान कर व्यवस्था को लेकर भारत में व्यापक बहस चल रही है। बजट 2026 को एक अवसर के रूप में देखा जा रहा है जहाँ सरकार और उद्योग के बीच संतुलन स्थापित किया जा सकता है। यदि कर बोझ को कम किया जाता है तथा नियमों को अधिक न्यायसंगत और पारदर्शी बनाया जाता है, तो इससे भारत का डिजिटल संपत्ति बाजार मजबूत और सुव्यवस्थित हो सकता है। लागू संशोधन न केवल निवेशकों का भरोसा बढ़ाएंगे बल्कि आर्थिक विकास को भी प्रोत्साहन देंगे।

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