हाल ही में Crypto India के एक ट्वीट में दावा किया गया है कि भारत में लगभग ११९ मिलियन यानि 11.9 करोड़ क्रिप्टो उपयोगकर्ता हैं, जिससे भारत ग्लोब का एक सबसे बड़ा क्रिप्टो बाजार बन गया है।
ट्विट में आगे कहा गया है कि इस बाजार का मूल्य 2024 में लगभग २.६ बिलियन डॉलर है और यह १७% से अधिक की सालाना वृद्धि के साथ 2035 तक १५ बिलियन डॉलर तक पहुँच सकता है।
साथ ही यह भी बताया गया है कि भारत में क्रिप्टो निवेशकों का बड़ा हिस्सा Gen Z और Millennialsहैं।
यह आंकड़ा न सिर्फ आशाजनक है, बल्कि संकेत देता है कि भारत में क्रिप्टोकरेंसी अब सीमित रोचकता या ट्रेडिंग-सर्किट तक सीमित नहीं है।
यह एक व्यापक और दीर्घकालीन आर्थिक प्रवृत्ति बन रही है। जनसंख्या, युवा उत्साह और डिजिटल पहुंच इस विकास में केंद्रीय भूमिका निभा रहे हैं।
🇮🇳 India has 119M crypto users, making it one of the world’s largest markets.
— Crypto India (@CryptooIndia) November 17, 2025
💰 The market is valued at $2.6B in 2024, projected to reach $15B by 2035 (CAGR >17%).
🧑💻 Gen Z and Millennials are the biggest groups of crypto investors.
Source: The Indian Express pic.twitter.com/i9VJR37d63
भारत में क्रिप्टोविकास की पृष्ठभूमि और चुनौतियाँ
भारत में क्रिप्टोकरेंसी न कानूनी मुद्रा है, न पूरी तरह अवैध। यह वर्चुअल डिजिटल एसेट (VDA) के रूप में मान्यता प्राप्त है।
PMLA (Prevention of Money Laundering Act) के तहत VDA सेवा प्रदाताओं को FIU-IND (Financial Intelligence Unit-India) के साथ पंजीकरण करना अनिवार्य है।
हालांकि अभी तक कोई समर्पित क्रिप्टो कानून नहीं बना है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकार पूरी विनियमित संरचना की बजाय सीमित मॉनीटरिंग को प्राथमिकता दे रही है, ताकि वित्तीय जोखिमों से बचा जा सके।
क्रिप्टो आय पर 30% फ्लैट टैक्स लगता है, और लेन-देन पर 1 % TDS भी लागू है। बजट 2025 में इन नीतियों में कोई राहत नहीं दी गई है। उद्योग लगातार इस कर बोझ को हटाने या कम करने की मांग कर रहा है।
कैबिनेट ने हालांकि टैक्स नीतियों को फिर से समीक्षा करने का संकेत दिया है। CBDT (केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड) ने एक्सचेंजों से पूछा है कि क्या TDS दर बहुत ज्यादा है और क्या क्रिप्टो घाटों को समायोजित (set-off) करने की अनुमति दी जानी चाहिए।
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हाल में मद्रास उच्च न्यायालय ने क्रिप्टोकरेंसी को भारतीय क़ानून में सम्पत्ति के रूप में मान्यता दी है, जिससे निवेशकों को कानूनी संरक्षण में मजबूती मिलेगी।
यह कदम, क्रिप्टो को सिर्फ जोखिम भरी चीज़ के बजाय दीर्घकालीन संपत्ति के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा मोड़ हो सकता है।
जोखिम और वित्तीय सुरक्षा
भारत में क्रिप्टो एक्सचेंजों पर AML (मनी लॉन्डरिंग) और KYC (ग्राहक पहचान) नियम पहले से काफी सख्त हो चुके हैं।
सुरक्षा की दृष्टि से भी चिंताएं हैं। जैसे कि WazirX हैक (2024) ने निवेशकों के भरोसे को हिला दिया था।
वित्तीय प्रवाह और मनी लॉन्डरिंग के खतरे को रोकने के लिए, नियामक निगरानी बढ़ा रहे हैं, लेकिन पूर्ण प्रतिबंध की बजाय एक संतुलित दृष्टिकोण बनाए रखने की कोशिश हो रही है।
उम्मीदें और चुनौतियाँ
क्रिप्टो एक्सचेंज और स्टार्टअप टैक्स सुधारों की मांग कर रहे हैं, ताकि बाजार रोचक बना रहे और निवेश नए लोगों की ओर बढ़े।
दूसरी ओर, नियामक भी संदेह में हैं। यदि क्रिप्टो को पूरी तरह कानूनी और अधिक स्वीकार्य बना दिया जाए, तो यह वित्तीय प्रणाली में अनियंत्रित जोखिम पैदा कर सकता है।
भविष्य में नीति निर्माताओं को यह संतुलन बनाना होगा: निवेशकों और नवप्रवर्तन को बढ़ावा देना, और वित्तीय सुरक्षा व जवाबदेही बनाए रखना।
निष्कर्ष
Crypto India द्वारा साझा किया गया ११९ मिलियन उपयोगकर्ता का आंकड़ा यह स्पष्ट करता है कि भारत में क्रिप्टो केवल एक अफ़साना नहीं है, बल्कि एक यथार्थ और तेजी से विकसित हो रहा आर्थिक अध्याय है।
यह दर्शाता है कि आने वाले दशकों में यह बाजार और बड़े पैमाने पर फैलेगा। लेकिन इस विकास के साथ चुनौतियाँ भी कम नहीं हैं। कर व्यवस्था, कानूनी मान्यता और सुरक्षा की जाँच-पड़ताल अभी भी एक अहम मुद्दा हैं।
अदालतों ने क्रिप्टो को सम्पत्ति का दर्जा देकर एक सकारात्मक संकेत भेजा है और नियामक अभी भी एक संतुलन बनाने की कोशिश कर रहे हैं। यदि यह संतुलन सही ढंग से बनाया गया, तो भारत एक ग्लोबल क्रिप्टो हब बन सकता है।
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