NSO का GDP अनुमान क्या कहता है?
भारत की आर्थिक सेहत को लेकर एक सकारात्मक संकेत सामने आया है। सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के अंतर्गत राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के प्रथम अग्रिम अनुमान जारी कर दिए हैं।
इन अनुमानों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में देश की वास्तविक GDP 7.4% की मजबूत वृद्धि दर्ज करेगी, जो वित्त वर्ष 2024-25 की 6.5% की वृद्धि दर से अधिक है।
एनएसओ द्वारा जारी प्रेस नोट में स्थिर (2011-12) और वर्तमान कीमतों पर जीडीपी के साथ-साथ विभिन्न आर्थिक क्षेत्रों के लिए सकल मूल्य वर्धन (GVA), व्यय घटक, सकल एवं शुद्ध राष्ट्रीय आय तथा प्रति व्यक्ति आय के वार्षिक अनुमान भी साझा किए गए हैं।
स्थिर और वर्तमान कीमतों पर GDP का अनुमान
NSO के आंकड़ों के अनुसार:
स्थिर कीमतों पर भारत की वास्तविक GDP
वित्त वर्ष 2025–26 में ₹201.90 लाख करोड़ रहने का अनुमान है
जबकि वित्त वर्ष 2024–25 में ₹187.97 लाख करोड़ रुपये थी।
वर्तमान कीमतों पर नॉमिनल GDP
2025–26: ₹357.14 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है
2024–25: ₹330.68 लाख करोड़ रुपये।
अनुमानित वृद्धि: 8.0%
ये आंकड़े अर्थव्यवस्था के आकार और मूल्य दोनों में विस्तार को दर्शाते हैं।
सेवा क्षेत्र बना विकास का मुख्य इंजन
इस मजबूत आर्थिक प्रदर्शन के पीछे सेवा क्षेत्र की निर्णायक भूमिका मानी जा रही है। वित्त वर्ष 2025–26 में वास्तविक GVA में 7.3% वृद्धि का अनुमान है।
विशेष रूप से:
वित्तीय सेवाएं, रियल एस्टेट और पेशेवर सेवाएं
लोक प्रशासन, रक्षा और अन्य सेवाएं
इन क्षेत्रों में स्थिर कीमतों पर 9.9% की तेज वृद्धि अनुमानित है।
इसके अलावा, व्यापार, होटल, परिवहन, संचार और प्रसारण सेवाओं में भी 7.5% की वृद्धि देखी जा सकती है।
उद्योग और कृषि का योगदान
द्वितीयक क्षेत्र भी अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करता नजर आ रहा है। विनिर्माण और निर्माण क्षेत्र के लिए वित्त वर्ष 2025-26 में स्थिर कीमतों पर 7.0% की वृद्धि दर का अनुमान है। हालांकि, कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र में 3.1 प्रतिशत और बिजली, गैस, जल आपूर्ति एवं अन्य उपयोगिता सेवाओं में 2.1% की अपेक्षाकृत मध्यम वृद्धि दर्ज होने का अनुमान है।
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मांग और निवेश संकेतक
व्यय पक्ष की बात करें तो, वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान वास्तविक निजी अंतिम उपभोग व्यय (पीएफसीई) की वृद्धि दर 7.0% रहने का अनुमान है, जो घरेलू मांग में मजबूती को दर्शाता है। वहीं, स्थिर कीमतों पर सकल स्थिर पूंजी निर्माण (जीएफसीएफ) में 7.8% की वृद्धि का अनुमान है, जो निवेश गतिविधियों में निरंतर सुधार की ओर इशारा करता है।
NSO के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में वास्तविक जीवीए 184.50 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है, जबकि नॉमिनल GVA 323.48 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि भारतीय अर्थव्यवस्था वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भी स्थिरता और गति बनाए रखने में सक्षम है।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर, वित्त वर्ष 2025-26 के प्रथम अग्रिम अनुमान भारत की अर्थव्यवस्था के लिए उत्साहजनक तस्वीर पेश करते हैं। सेवा क्षेत्र की तेज वृद्धि, मजबूत घरेलू मांग और निवेश में सुधार के चलते 7.4% की अनुमानित GDP वृद्धि यह संकेत देती है कि भारतीय अर्थव्यवस्था विकास के पथ पर मजबूती से आगे बढ़ रही है। साथ ही, विनिर्माण, निर्माण और उपभोग आधारित गतिविधियों में सकारात्मक रुझान यह भरोसा दिलाते हैं कि आने वाले समय में रोजगार सृजन, आय स्तर और समग्र आर्थिक स्थिरता को भी बल मिलेगा।
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