भारत सरकार ने क्रिप्टोकरेंसी और अन्य वर्चुअल डिजिटल एसेट (VDA) लेन-देन पर निगरानी और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए एक नया नियामक ढांचा तैयार किया है। वित्त मंत्रालय और केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ऐसे नियम लागू करने की दिशा में काम कर रहे हैं, जिनके तहत 1 अप्रैल, 2026 से सभी बड़े VDA लेन-देनों की तीसरे पक्ष (थर्ड-पार्टी) द्वारा सरकार को रिपोर्टिंग अनिवार्य कर दी जाएगी।
वर्तमान में क्रिप्टोकरेंसी ट्रेडिंग भारत में पूरी तरह से कानूनी नहीं है, लेकिन इसे वर्चुअल डिजिटल एसेट के रूप में टैक्स बिलों के अंतर्गत रखा गया है और इसके ऊपर टैक्स वसूली के नियम लागू हैं। ट्रेडिंग से होने वाली कमाई पर 30 प्रतिशत टैक्स और लेन-देन पर 1 प्रतिशत टीडीएस है, जिनका पालन करना निवेशकों के लिए अनिवार्य है।
डेटा मिसमैच और संभावित टैक्स चोरी
सरकार का कहना है कि पिछले कुछ समय में आयकर विभाग ने VDA लेन-देन से जुड़े 4,500 से अधिक संदिग्ध मामलों में डेटा मिसमैच और संभावित टैक्स चोरी की पहचान की है, जिनकी जांच चल रही है। इसीलिए अब थर्ड-पार्टी रिपोर्टिंग को कानूनी रूप दे दिया गया है, ताकि बैंक, क्रिप्टो एक्सचेंज और अन्य वित्तीय संस्थान हर लेन-देन का विवरण निर्धारित प्रारूप में जमा करें।
इन नियमों के अनुसार, रिपोर्टिंग में शामिल संस्थाओं को न केवल लेन-देन की मात्रा और तिथि रिपोर्ट करनी होगी, बल्कि ट्रेडिंग करने वाले उपयोगकर्ता की पहचान, पता, पैन विवरण और अन्य आवश्यक जानकारी भी प्रदान करनी होगी। यदि रिपोर्ट में कोई गलती पाई जाती है, तो उसे सुधारने के लिये सीमित समय दिया जाएगा, अन्यथा उन पर दंडात्मक कार्रवाई हो सकती है।
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क्रिप्टो लेन-देन में पारदर्शिता बढ़ाना
इस नए प्रावधान का लक्ष्य क्रिप्टो लेन-देन में पारदर्शिता बढ़ाना, टैक्स चोरी रोकना और अवैध वित्तीय गतिविधियों से निपटना है। सरकार का मानना है कि इससे लेन-देनों का सटीक रिकॉर्ड उपलब्ध होगा और आयकर रिटर्न में किये गये खुलासों की सटीकता सुनिश्चित होगी।
विदेशी क्रिप्टो एक्सचेंजों के मामले भी सरकार की नजर में हैं। जबकि घरेलू प्लेटफॉर्म टीडीएस नियमों का पालन काफी हद तक कर रहे हैं, विदेशी प्लेटफॉर्म भारतीय ग्राहकों से जुड़ी रिपोर्टिंग पूरा नहीं कर रहे हैं, जिस पर भी नियामक दबाव बढ़ रहा है। इसके लिये भी वित्तीय खुफिया यूनिट (FIU) के तहत पंजीकरण और अनुपालन प्रक्रियाएँ सख्त की जा रही हैं।
इसके अलावा, वित्तीय खुफिया इकाई (FIU-IND) ने साइबर सुरक्षा ऑडिट, कड़े ‘अपने ग्राहक को जानें’ (KYC) नियम और उन्नत लेन-देन ट्रैकिंग जैसे दिशा-निर्देश जारी किये हैं ताकि धोखाधड़ी और मनी-लॉन्ड्रिंग जैसी समस्याओं से निपटा जा सके।
विश्लेषकों का मानना है कि ये बदलाव क्रिप्टो बाजार को पारदर्शी बनाएँगे और टैक्स अनुपालन को सुदृढ़ करेंगे, लेकिन इससे नियमित व्यापारियों और निवेशकों पर रिपोर्टिंग का भार भी बढ़ेगा। सरकार ने पहले ही ITR में VDA से जुड़े लेन-देन के खुलासे को अनिवार्य कर रखा है, इसलिए नए नियम से निवेशकों को अपनी आय-कर रिपोर्टिंग और रिकॉर्ड की तैयारी पूर्व से अधिक सतर्कता से करनी होगी।
निष्कर्ष
भारत सरकार की यह पहल क्रिप्टोकरेंसी और VDA लेन-देन पर निगरानी को सख्त बनाने और टैक्स अनुपालन को सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। 1 अप्रैल, 2026 से लागू होने वाले थर्ड-पार्टी रिपोर्टिंग नियम डिजिटल संपत्ति बाजार में पारदर्शिता बढ़ाएँगे और संभावित धोखाधड़ी से निपटने में मदद करेंगे, लेकिन साथ ही निवेशकों और सेवा प्रदाताओं के लिये अनुपालन की चुनौतियाँ भी बढ़ाएँगे।
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