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Rajeev Ranjan Roy
लेखक: Rajeev Ranjan Royस्टाफ लेखक
Pratik Bhuyan
Pratik Bhuyan द्वारा समीक्षितस्टाफ संपादक

क्रिप्टो क्रांति की अगुवाई: भारत लगातार तीसरे वर्ष शीर्ष पर

दो हज़ार पच्चीस की रैंकिंग में अमेरिका दूसरे और पाकिस्तान तीसरे स्थान पर रहा।

क्रिप्टो क्रांति की अगुवाई: भारत लगातार तीसरे वर्ष शीर्ष पर
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भारत ने 2025 में Chainalysis के ‘Global Crypto Adoption Index’ में लगातार तीसरे वर्ष शीर्ष स्थान हासिल कर, वैश्विक क्रिप्टोरोधता पटल पर अपनी पकड़ और भी मज़बूत कर ली है।

इस रिपोर्ट में 151 देशों के डेटा के आधार पर देशों को रैंक किया गया है, जिसमें ऑन-चेन मूल्य प्राप्ति, खुदरा लेनदेन, P2P ट्रेडिंग वॉल्यूम और अलग-अलग आय वर्गों में उपयोग शामिल थे। दो हज़ार पच्चीस की रैंकिंग में अमेरिका दूसरे और पाकिस्तान तीसरे स्थान पर रहा।

भारत के इस लगातार शीर्ष स्थान का श्रेय रिटेल और संस्थागत प्रवाह की बढ़ती भागीदारी को जाता है, जहाँ छोटे निवेशक से लेकर बड़ी संस्थाएँ तक इस डिजिटल संपत्ति की ओर आकर्षित हुई हैं। राष्ट्रीय स्तर पर इसे भारत की तेज़ डिजिटल भुगतान प्रणाली, बड़ी जनसंख्या और Web3 नवाचारों की बढ़ती मांग से जोड़ा जाता है।

लेकिन यह सफर चुनौती मुक्त नहीं रहा। क्रिप्टो लेनदेन पर तीस प्रतिशत कैपिटल गेन टैक्स और एक प्रतिशत टीडीएस (TDS) लागू है, जिससे यह एक कठिन नियामकीय क्षेत्र बना हुआ है। दिसंबर 2023 में नौ विदेशी एक्सचेंजों, जैसे Binance और Kraken, को गैर-अनुपालन के लिए FIU द्वारा नोटिस दिए गए थे — बावजूद इसके निवेशकों ने मंचों का उपयोग जारी रखा।

बाद में कुछ प्रमुख विदेशी एक्सचेंज जैसे Binance और KuCoin ने जुर्माना भरकर भारत में फिर से कार्य करना शुरू किया, जिससे संकेत मिला कि नियामकों ने धीरे-धीरे थोड़ी नरमी दिखाई है।

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भारत में Web3 स्टार्ट-अप्स और ब्लॉकचेन डेवलपमेंट का व्यापक परिदृश्य भी उभर रहा है, जिसने पारंपरिक वित्तीय प्रणाली से परे नए अवसरों की नींव रखी है।

वहीं, इस क्रिप्टो रोमांच का आलोचनात्मक पक्ष भी है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि रैंकिंग में जो “adoption” दिखता है, वह हमेशा व्यावहारिक उपयोग को नहीं दर्शाता।

उदाहरण के तौर पर, निवेशकों को ऐप डाउनलोड करने या KYC पूरा करने पर मामूली राशि की क्रिप्टो देकर आंकड़े बढ़ाए जा रहे हैं, लेकिन यह वास्तविक उपयोगिता को प्रतीकात्मक रूप से ही बढ़ाता है ।

ऐसे में भारत की यह उपलब्धि — लगातार तीसरा वर्ष शीर्ष पर बने रहने की — सिर्फ एक रिपोर्टिंग आंकड़ा नहीं, बल्कि एक डिजिटल भविष्य का संकेत है, जिसमें जनता, संस्थाएँ और तकनीकी दूरदर्शिताएँ एक साथ क्रिप्टो को अपनाने की राह पर अग्रसर हैं।

निष्कर्ष

भारत ने अपने व्यापक डिजिटल पारिस्थितिक तंत्र, युवा और तकनीकी-सक्षम जनसंख्या तथा खुदरा से लेकर संस्थागत स्तर तक की मज़बूत भागीदारी के बल पर Chainalysis की वैश्विक क्रिप्टो एडॉप्शन इंडेक्समें लगातार तीसरे वर्ष शीर्ष स्थान प्राप्त किया है।

हालांकिऊँची कर दरें, नियामकीय अनिश्चितताएँ और आँकड़ों की पद्धति को लेकर वास्तविक उपयोगिता पर कुछ प्रश्न बने हुए हैं, फिर भी यह उपलब्धि स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि भारत डिजिटल मुद्रा की दुनिया में एक सशक्त और उभरता हुआ अग्रणी खिलाड़ी है, जो आने वाले समय में और भी निर्णायक भूमिका निभाने की क्षमता रखता है।

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