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Rajeev Ranjan Roy
लेखक: Rajeev Ranjan Royस्टाफ लेखक
Pratik Bhuyan
Pratik Bhuyan द्वारा समीक्षितस्टाफ संपादक

भारत सरकार ने 'Dark Net' और क्रिप्टो पर नार्को तस्करी निगरानी के लिए Task Force बनाई

भारत सरकार ने नार्को तस्करी की उभरती नेटवर्क और तकनीकी मार्गों को रोकने के लिए डार्क नेट और क्रिप्टोकरेंसी पर निगरानी रखने हेतु विशेष टास्क फोर्स का गठन किया है।

भारत सरकार ने 'Dark Net' और क्रिप्टो पर नार्को तस्करी निगरानी के लिए Task Force बनाई
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भारत में मादक पदार्थों की तस्करी से निपटने के लिए कानून प्रवर्तन एजेंसियों की चुनौतियाँ हर दिन बढ़ती जा रही हैं। पारंपरिक साधन अब काफी हद तक सीमित पड़ चुका है, क्योंकि अवैध नेटवर्क अब ‘डार्क नेट’ और क्रिप्टोकरेंसी जैसे गुमनाम तकनीकी मार्गों का उपयोग कर रहे हैं। इसी चुनौती के मद्देनजर सरकार ने डार्क नेट और क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े प्लेटफॉर्म्स की निगरानी हेतु एक टास्क फोर्स का गठन किया है।

टास्क फोर्स

गृह मामलों के राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने लोकसभा को लिखित उत्तर में बताया कि यह टास्क फोर्स मल्टी-एजेंसी सेंटर के तहत स्थापित किया गया है और इसका मुख्य उद्देश्य उन प्लेटफार्मों की पहचान करना है जो नार्को-तस्करी को सुविधाजनक बनाते हैं। टीम निरंतर ट्रेंड्स और तस्करी के तरीकों का अध्ययन करेगी तथा संबंधित नियमों और कानूनों की समीक्षा भी करेगी।

इस टास्क फोर्स का एक महत्वपूर्ण भाग इनपुट साझा करना है, जिससे विभिन्न एजेंसियाँ जैसे नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB), राज्य की एंटी-नार्को टास्क फोर्स और सीमा सुरक्षा बल एक बेहतर समन्वय स्थापित कर सकें। इसके अतिरिक्त, एक संयुक्त समन्वय समिति (JCC) भी बनाई गई है, जो बड़े मादक पदार्थ बरामदगी के मामलों की निगरानी करेगी और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करेगी।

एकीकृत डेटा बेस

सरकार ने राष्ट्रीय एकीकृत डेटा बेस ऑन अरेस्टेड नार्को-ऑफेंडर्स (NIDAAN) पोर्टल भी विकसित किया है, जिसमें मादक पदार्थों के मामलों से जुड़े अपराधियों का विस्तृत डेटा उपलब्ध रहेगा। इस डिजिटल डेटाबेस में पहचान विवरण, फ़ोटो, फ़िंगरप्रिंट और न्यायालय से जुड़ी जानकारी शामिल होगी, जिससे अभियोजन प्रक्रिया और जांच दोनों को गति मिलेगी।

डार्क नेट और क्रिप्टोकरेंसी का दुरुपयोग यूनानी चुनौती मात्र नहीं है; यह एक वैश्विक समस्या बन चुकी है। भारत में पहले भी डार्क नेट से जुड़े बड़े गिरोहों का पर्दाफाश किया जा चुका है, जिनमें व्यापक मात्रा में नशीले पदार्थ और क्रिप्टोकरेंसी दोनों जब्त किए गए। ऐसे मामलों ने यह साफ कर दिया है कि पारंपरिक जांच तकनीक पर्याप्त नहीं हैं और तकनीकी विशेषज्ञता की आवश्यकता है।

वैश्विक स्तर पर प्रयास

वैश्विक स्तर पर भी कई देश इस समस्या से निपटने के लिए निवेश और निगरानी तकनीकों को उन्नत कर रहे हैं। उदाहरण के लिये, दक्षिण कोरिया ने डार्क वेब पर क्रिप्टो से जुड़ी ड्रग तस्करी को ट्रैक करने के लिए लाखों डॉलर का बजट आवंटित किया है, जिसमें एआई और ब्लॉकचेन विश्लेषण जैसे आधुनिक उपकरण शामिल हैं। 

भारत में पहले से ही नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो की पहुंच बढ़ाई जा चुकी है और नए डाटाबेस तथा कॉल सेंटर जैसे ’मानस’ हेल्पलाइन की शुरुआत से सामूहिक प्रयासों को और बल मिला है। इन प्रयासों का लक्ष्य सामरिक रूप से ड्रग नेटवर्क को तोड़ना और गिरोहों को ट्रैक करना है।

सरकार की यह रणनीति उस समय सामने आई है जब क्रिप्टोकरेंसी के उपयोग के मामले भी बढ़ रहे हैं और उनमें अपराध से जुड़े लेन-देनों की संख्या में इजाफा हुआ है। इसी कारण एजेंसियाँ क्रिप्टो लेन-देन की मॉनिटरिंग को और अधिक सख्ती से लागू कर रही हैं ताकि अवैध गतिविधियों को बेनकाब किया जा सके।

निष्कर्ष

डार्क नेट और क्रिप्टोकरेंसी के दुरुपयोग से लड़ने के लिए भारत सरकार का यह कदम न केवल तकनीकी चुनौती से निपटने का प्रयास है, बल्कि यह संकेत भी देता है कि कानून-व्यवस्था की दुनिया में समय के साथ नई रणनीतियाँ विकसित करना आवश्यक है। समन्वित टास्क फोर्स, डिजिटल डेटाबेस और बहु-एजेंसी सहयोग जैसी पहलों से नार्को-तस्करी की रोकथाम के प्रयासों को मजबूती मिलेगी और अपराधियों को बेनकाब करने में सहायता मिलेगी।

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