भारत में बेरोजगारी दर दिसंबर 2025 में मामूली बढ़त के साथ 4.8 प्रतिशत पर पहुंच गई, जो नवंबर में 4.7 प्रतिशत थी। यह जानकारी सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा जारी पीरियॉडिक लेबर फोर्स सर्वे (PLFS) के मासिक आंकड़ों में सामने आई है। आंकड़ों के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी दर 3.9 प्रतिशत पर स्थिर रही, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह बढ़कर 6.7 प्रतिशत हो गयी है, जो रोजगार के अवसरों की कमी व सघन प्रतिस्पर्धा का संकेत देती है।
कठिन परिस्थितियों का संकेत
विशेषज्ञों के अनुसार बेरोजगारी दर में यह ऊँचाई महज एक अंक का बदलाव है, परंतु शहरी रोजगार बाज़ार में कठिन परिस्थितियों का संकेत देती है। युवा आबादी, विशेषकर शहरी क्षेत्रों में, रोजगार की तलाश में अधिक सक्रिय दिखायी दे रही है, जिससे लेबर फ़ोर्स भागीदारी दर (LFPR) बढ़कर 56.1 प्रतिशत तक पहुंच गयी है। इसका मतलब है कि अब पहले की अपेक्षा अधिक लोग काम या रोजगार की तलाश में है।
आंकड़ों से पता चलता है कि पुरुषों में बेरोजगारी दर 4.7 प्रतिशत तथा महिलाओं में 4.9 प्रतिशत पर आंकी गयी, जो पिछले महीने के आंकड़ों से थोड़ी बढ़ोतरी दर्शाती है। यह बदलाव मुख्य रूप से शहरी पुरुषों और युवाओं के बीच रोजगार की तलाश में बढ़ोतरी के कारण है।
श्रम शक्ति अनुपात
पीएलएफएस आंकड़ों में श्रम शक्ति अनुपात में भी बदलाव देखा गया है। ग्रामीण इलाकों में यह अनुपात 76 प्रतिशत के आस-पास रहा, जबकि शहरी पुरुषों के बीच यह थोड़ा गिरकर 70.4 प्रतिशत पर आ गया। वहीं ग्रामीण महिलाओं का अनुपात थोड़ा बढ़ा, जिससे कुल मिलाकर WPR 53.4 प्रतिशत तक पहुँचा।
विश्लेषकों का मानना है कि इन आँकड़ों के पीछे मौसम, बाजार की मौसमी मांग तथा श्रम शक्ति की भागीदारी में उतार-चढ़ाव जैसे कई कारक काम कर रहे हैं। हालांकि बेरोजगारी दर में मामूली बढ़ोतरी हुई है, परंतु LFPR में वृद्धि यह संकेत देती है कि रोजगार खोजने वालों की संख्या बढ़ रही है, जो दीर्घकालिक रोजगार रुझानों की समझ के लिए महत्वपूर्ण होता है।
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शहरी बनाम ग्रामीण रोजगार की तस्वीर
शहरी इलाकों में बेरोजगारी दर में बढ़ोतरी का मुख्य कारण है रोजगार के अवसरों की अपेक्षा से अधिक संख्या में लोगों का कार्यबल में शामिल होना, जिससे प्रतिस्पर्धा बढ़ गयी है। इसके विपरीत ग्रामीण क्षेत्रों में खेती और ग्रामीण व्यवसायों से जुड़ी रोज़गार गतिविधियों के स्थिर रहने से बेरोजगारी दर में अधिक बदलाव नहीं आया है।
आर्थिक विश्लेषकों का यह भी मानना है कि शहरी क्षेत्रों में बढ़ी शिक्षा और कौशल वाले युवाओं का कार्यक्षेत्र की तलाश में बाहर निकलना भी बेरोजगारी में बढ़ोतरी का कारण बन रहा है। कई विशेषज्ञ सुझाव देते हैं कि डिजिटल और कौशल आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रमों तथा छोटे और मध्यम उद्योगों के विस्तार से नए रोजगार सृजन के अवसर बढ़ाए जा सकते हैं।
सरकारी नीतियाँ जैसे कौशल विकास मिशन, उद्योग प्रोत्साहन योजनाएँ तथा स्थानीय रोजगार मेले श्रम बाजार को सुदृढ़ करने और बेरोजगारी को कम करने में मदद कर सकते हैं।
निष्कर्ष
दिसंबर 2025 में बेरोजगारी दर में हुई मामूली बढ़ोतरी से यह स्पष्ट होता है कि भारत के श्रम बाजार में अभी भी कुछ असंतुलन हैं, विशेषकर शहरी क्षेत्रों में। हालांकि श्रम शक्ति भागीदारी दर में वृद्धि सकारात्मक संकेत है, इन आंकड़ों को गहराई से समझने के लिए सतत निगरानी और नीतिगत हस्तक्षेप आवश्यक है ताकि नौकरी के अवसर सभी वर्गों तक प्रभावी रूप से पहुँच सके।
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