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Rajeev Ranjan Roy
लेखक: Rajeev Ranjan Royस्टाफ लेखक
Pratik Bhuyan
Pratik Bhuyan द्वारा समीक्षितस्टाफ संपादक

Jane Street पर भारत के बाद अब वैश्विक क्रिप्टो जगत में गंभीर आरोप

Jane Street भारत के शेयर बाजार विवाद के बाद अब Terra-Luna मामले में अमेरिकी अदालत में घिरी। अंदरूनी कारोबार और बाजार हेरफेर के आरोपों से वैश्विक बहस तेज।

Jane Street पर भारत के बाद अब वैश्विक क्रिप्टो जगत में गंभीर आरोप
समाचार

वैश्विक वित्तीय बाजारों में अत्यधिक प्रभाव रखने वाली निवेश एवं व्यापारिक संस्था जेन स्ट्रीट इस समय दो महाद्वीपों में कानूनी और नियामकीय संकट का सामना कर रही है। भारत के पूंजी बाजार में कथित हेरफेर के आरोपों के बाद अब डिजिटल मुद्रा क्षेत्र में भी संस्था पर अंदरूनी जानकारी के दुरुपयोग और निवेशकों को भारी नुकसान पहुंचाने के गंभीर आरोप लगे हैं।

Terra-Luna मामले में नया विवाद

संयुक्त राज्य अमेरिका की एक संघीय अदालत में दायर मुकदमा Terra-LUNA तंत्र के पतन से जुड़ा है। मई 2022 में इस प्रणाली के ध्वस्त होने से लगभग 40 अरब डॉलर की परिसंपत्तियां नष्ट हो गई थीं।

मुकदमे में आरोप है कि Jane Street को संभावित जोखिमों की गोपनीय जानकारी पहले से उपलब्ध थी, जिसके आधार पर उसने बाजार से समय रहते बाहर निकलकर लाभ अर्जित किया।

टेरा मंच से बड़ी मात्रा में स्टेबलकॉइन की निकासी

मामले के अनुसार, मई 2022 में टेरा मंच से बड़ी मात्रा में स्टेबलकॉइन निकाले जाने के तुरंत बाद जेन स्ट्रीट से जुड़ा एक डिजिटल बटुआ भी उसी परिसंपत्ति से बाहर निकल गया। आरोप है कि इस संयुक्त निकासी से बाजार की तरलता कमजोर हुई और कुछ ही दिनों में पूरा तंत्र ध्वस्त हो गया। हालांकि संस्था ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए मुकदमे को धन वसूली का प्रयास कहा है।

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भारत में SEBI की कार्रवाई

भारत में विवाद इससे पहले शुरू हो चुका था। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (Securities and Exchange Board of India) ने 2025 में जेन स्ट्रीट की चार संबद्ध इकाइयों पर कार्रवाई करते हुए उन्हें प्रतिभूति बाजार से अस्थायी रूप से प्रतिबंधित कर दिया था।

नियामक संस्था का आरोप था कि बैंक निफ्टी और निफ्टी 50 जैसे प्रमुख सूचकांकों में समाप्ति दिवस पर सुनियोजित खरीद-फरोख्त कर कृत्रिम उतार-चढ़ाव पैदा किया गया।

जांच के अनुसार:

  • सुबह बड़े पैमाने पर शेयर और वायदा अनुबंध खरीदकर सूचकांक को ऊपर ले जाया जाता था।

  • और बाद में भारी बिकवाली कर कीमत गिराई जाती थी।

  • इससे विकल्प सौदों में पहले से ली गई स्थितियां अत्यधिक लाभ में बदल जाती थीं।

भारतीय अधिकारियों ने कथित अवैध लाभ के रूप में हजारों करोड़ रुपये जब्त किए थे। संस्था ने इन आरोपों को चुनौती दी है।

अवैध लाभ के रूप में हजारों करोड़ रुपये जब्त

भारतीय अधिकारियों ने कथित अवैध लाभ के रूप में हजारों करोड़ रुपये की राशि जब्त भी की थी। यद्यपि संस्था ने धन जमा कर प्रतिबंध हटाने की प्रक्रिया शुरू की, लेकिन उसने आरोपों को पक्षपातपूर्ण बताते हुए कानूनी चुनौती दी।

इसी बीच क्रिप्टो बाजार में भी जेन स्ट्रीट की भूमिका पर बहस तेज हो गई है। कुछ व्यापारियों ने डिजिटल मुद्रा कीमतों में अचानक गिरावट के लिए संस्था की व्यापारिक गतिविधियों को जिम्मेदार ठहराया, हालांकि कई विश्लेषकों ने इसे सामान्य बाजार संरचना और जोखिम संतुलन प्रक्रिया का हिस्सा बताया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह पूरा विवाद आधुनिक वित्तीय बाजारों की उस चुनौती को उजागर करता है, जहां उच्च गति वाले एल्गोरिद्मिक व्यापार, जटिल व्युत्पन्न उत्पाद और सीमापार निवेश ढांचे पारंपरिक नियमन से आगे निकल चुके हैं।

निष्कर्ष

जेन स्ट्रीट से जुड़े भारत और क्रिप्टो जगत के मामले अभी प्रारंभिक चरण में हैं, लेकिन इन घटनाओं ने वैश्विक वित्तीय प्रणाली की पारदर्शिता, डिजिटल परिसंपत्तियों के नियमन और बड़े व्यापारिक संस्थानों की जवाबदेही पर गंभीर बहस छेड़ दी है। आने वाले समय में इन मुकदमों का परिणाम न केवल एक संस्था बल्कि पूरे वैश्विक निवेश ढांचे की दिशा तय कर सकता है।

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