दो हजार पच्चीस में वैश्विक क्रिप्टो अर्थव्यवस्था का सबसे सक्रिय और उभरता हुआ केंद्र एशिया-प्रशांत क्षेत्र बन गया है। ब्लॉकचेन एनालिटिक्स फर्म चेनैलिसिस की ताज़ा रिपोर्ट ने यह साफ कर दिया है कि यह क्षेत्र न केवल तेजी से डिजिटल संपत्ति की ओर बढ़ रहा है, बल्कि वैश्विक प्रवाह को भी प्रभावित कर रहा है।
रिपोर्ट के मुताबिक, जुलाई 2022 में एशिया-प्रशांत का मासिक ऑन-चेन मूल्य लगभग 81 अरब डॉलर था, जो दिसंबर 2024 तक बढ़कर 244 अरब डॉलर पर पहुँच गया। यानी 30 महीनों में तीन गुना उछाल। दिलचस्प बात यह है कि इस चरम के बाद भी गतिविधि धीमी नहीं पड़ी। 2025 के मध्य तक हर महीने लेनदेन की मात्रा 185 अरब डॉलर से अधिक बनी रही, जो क्षेत्र की मज़बूत स्थिति को दर्शाता है।
जापान की चढ़ान और भारत की बढ़त
रिपोर्ट बताती है कि जापान ने जून 2025 तक के 12 महीनों में ऑन-चेन मूल्य में 120% वृद्धि दर्ज की, जो पूरे एशिया-प्रशांत में सबसे तेज़ थी। इसके पीछे मुख्य कारण हैं—नियामक सुधार, स्टेबलकॉइन लाइसेंसिंग और बढ़ता XRP ट्रेडिंग वॉल्यूम। जापानी निवेशक अब उन डिजिटल संपत्तियों की ओर रुख कर रहे हैं, जिनकी वास्तविक दुनिया में उपयोगिता है।
लेकिन जब बात वॉल्यूम और व्यापक अपनाने की आती है, तो भारत इस क्षेत्र का निर्विवाद लीडर है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत न केवल दो हजार पच्चीस ग्लोबल एडॉप्शन इंडेक्स में पहले स्थान पर है, बल्कि ऑन-चेन लेनदेन की मात्रा में भी सबसे आगे है। भारत का क्रिप्टो बाजार एक साथ तेज़, विविध और जटिल है—जहाँ रिटेल निवेशक से लेकर संस्थागत खिलाड़ी तक सक्रिय रूप से हिस्सा ले रहे हैं।
क्या आप जानते हैं — भारत में क्रिप्टो अपनाने की तेज़ लहर, क्या बनेगा ग्लोबल हब?
विविधता ही ताकत
एशिया-प्रशांत में हर देश का अपना अलग रास्ता है, जो इस क्षेत्र को और अधिक गतिशील बनाता है।
दक्षिण कोरिया: सट्टा व्यापार और स्थिर मुद्राओं के बढ़ते उपयोग के लिए प्रसिद्ध।
वियतनाम: धन प्रेषण और गेमिंग एकीकरण का केंद्र।
पाकिस्तान: मुद्रास्फीति से बचाव के लिए स्थिर मुद्राओं को तेजी से अपना रहा है।
ऑस्ट्रेलिया, सिंगापुर और हांगकांग: नियामक ढाँचे मजबूत कर रहे हैं ताकि वैश्विक संस्थागत पूंजी को आकर्षित किया जा सके।
यानी, जहाँ जापान तेज़ी से बढ़ते ग्रोथ ग्राफ से सबको प्रभावित कर रहा है, वहीं भारत अपने विशुद्ध मात्रा और एडॉप्शन इंडेक्स में शीर्ष स्थान के साथ पूरे क्षेत्र का नेतृत्व कर रहा है।
वैश्विक तस्वीर
रिपोर्ट के निष्कर्ष साफ बताते हैं कि एशिया-प्रशांत अब उत्तरी अमेरिका के बराबर और कई बार उससे आगे—लेन-देन की मात्रा दर्ज कर रहा है। यह क्षेत्र वैश्विक क्रिप्टो पावरहाउस बनने की दिशा में न केवल उम्मीदों पर खरा उतरा है, बल्कि कई मामलों में उन्हें पीछे छोड़ चुका है।
निष्कर्ष
क्रिप्टोकरेंसी अब केवल एक वैकल्पिक निवेश साधन नहीं रही, बल्कि यह आर्थिक प्रवाह और तकनीकी नवाचार का अहम हिस्सा बन चुकी है।एशिया-प्रशांत की तस्वीर दिखाती है कि कैसे अलग-अलग देश अपनी परिस्थितियों के अनुसार क्रिप्टो अपना रहे हैं और वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर रहे हैं।जापान की रफ्तार और भारत की पकड़मिलकर इस क्षेत्र को वह शक्ति दे रही है, जो 2025 और उसके आगे की डिजिटल वित्तीय दुनिया का भविष्य तय करेगी।
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