दुनिया भर में क्रिप्टोकरेंसी धारकों के खिलाफ शारीरिक हमलों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिन्हें आमतौर पर ‘रेंच अटैक’ कहा जाता है। इन हमलों में अपराधी बलपूर्वक पीड़ित से उसकी डिजिटल संपत्ति या निजी कुंजी छीनने के लिए हिंसा का सहारा लेते हैं। हाल ही में प्रकाशित विश्लेषण में यह स्पष्ट हुआ है कि न केवल इन घटनाओं की संख्या बढ़ी है, बल्कि इनकी गंभीरता और उग्रता भी बढ़ी है।
रेंच हमला क्या है?
‘रेंच अटैक’ एक अभिव्यक्ति है जिसका अर्थ है क्रिप्टो मालिक से फिजिकल हिंसा के ज़रिये उनकी निजी जानकारी या कोड जबरन प्राप्त करना, जिससे अपराधी सीधे उनके डिजिटल बटुए तक पहुँच प्राप्त कर सकें। मूलतः यह नाम एक इंटरनेट कार्टून से प्रेरित है जिसमें एक व्यक्ति को पेचकश दिखाकर पासवर्ड खुलवाया जाता है।
हमलों में वृद्धि और उनका स्वरूप
विश्लेषण के अनुसार पिछले कुछ वर्षों में रेंच हमलों की संख्या निरंतर बढ़ी है और अब ये हमले पूर्व की तुलना में काफ़ी हिंसक होने लगे हैं। अपराधियों ने अब सिर्फ हथियार दिखाने तक सीमित नहीं रखा, बल्कि चोरी, अपहरण, धमकी और शारीरिक चोट तक का इस्तेमाल किया है। यूरोप और एशिया प्रशांत क्षेत्र में इन घटनाओं की संख्या विशेष रूप से तेज़ी से बढ़ी है, जबकि उत्तर अमेरिका में भी संख्या में वृद्धि दर्ज हुई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि क्रिप्टो संपत्ति का मूल्य और हमलों की संख्या के बीच सीधा संबंध है। जब क्रिप्टो बाजार का कुल मूल्य बढ़ता है, तो अपराधी अधिक उत्साहित होकर इन हमलों को अंजाम देते हैं, जिससे हिंसा भी बढ़ती है।
2025 में, कम से कम 52 रेंच हमलों की रिपोर्ट दर्ज की गई है, जिसमें इज़राइल में एक बड़े मामले में लगभग $600,000 (करीब 5 करोड़ रुपये से अधिक) मूल्य की क्रिप्टो चोरी भी शामिल है, जहाँ हमलावरों ने क्रिप्टो के साथ हार्डवेयर वॉलेट और अन्य मूल्यवान वस्तुएँ भी लूट लीं।
लक्षित व्यक्ति कौन हैं?
पहले ऐसे हमले आमतौर पर केवल बहुत अमीर या प्रसिद्ध क्रिप्टो निवेशकों को निशाना बनाते थे, लेकिन अब अपराधी मध्यम और छोटे निवेशकों को भी अपनी फेहरिस्त में शामिल कर रहे हैं। कुछ मामलों में तो कम मूल्य की क्रिप्टो रखने वाले निवेशक भी गंभीर हमलों का शिकार बने हैं।
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हमलों के कारण
विश्लेषणकर्ताओं का कहना है कि क्रिप्टो संपत्ति की अप्रत्यक्ष प्रकृति और इसकी पारदर्शिता के बावजूद, डिजिटल दुनिया के बाहर हुए डेटा उल्लंघन और पता संबंधी जानकारी से अपराधियों को आसान लक्ष्य मिल रहे हैं। उदाहरण के लिए, उपयोगकर्ता की पहचान, होम पता और सकारात्मक जानकारी जब ऑनलाइन उपलब्ध होती है तो अपराधी यह पता लगा सकते हैं कि किसके पास कितना क्रिप्टो संपत्ति है।
गंभीरता और प्रभाव
इन घटनाओं ने क्रिप्टो समुदाय में भय की भावना पैदा कर दी है और व्यक्तिगत सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। अपराधियों द्वारा बाल, परिवार, पहचान और निजी संपत्ति को निशाना बनाकर ब्लैकमेल करना अब सामान्य बात हो गई है। मीडिया रिपोर्टों में यह भी सामने आया है कि कुछ मामलों में पीड़ितों को अपहरण के बाद गिरफ़्तार कर धौंस दी जाती है जब तक कि वे क्रिप्टो को सौंप नहीं देते।
सुरक्षा उपाय और समाधान
विशेषज्ञों का सुझाव है कि क्रिप्टो निवेशकों को अपनी संपत्ति की सुरक्षा के लिए अब केवल डिजिटल सुरक्षा पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। उन्हें अपनी पहचान और संपत्ति को सार्वजनिक रूप से प्रचारित करने से बचना चाहिए, अज्ञात स्रोतों से व्यक्तिगत जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए, और वांछित सुरक्षा उपाय जैसे बहु-हस्ताक्षर वाले बटुए, केंद्रीकृत संरक्षित सेवा प्रदाता और आनुपातिक सुरक्षा उपाय को अपनाना चाहिए।
निष्कर्ष
वैश्विक स्तर पर क्रिप्टोधारकों पर हो रहे रेंच हमलों की बढ़ती संख्या और हिंसक प्रकृति ने यह स्पष्ट कर दिया है कि डिजिटल दुनिया की संपत्ति सुरक्षित होकर भी वास्तविक जीवन में जोखिम में हो सकती है। निवेशकों के लिए आवश्यक है कि वे न केवल अपने डिजिटल सुरक्षा उपायों को सुदृढ़ करें, बल्कि अपनी व्यक्तिगत सुरक्षा को भी प्राथमिकता दें। सुरक्षा जागरूकता, गोपनीयता बनाए रखना और प्रभावी सुरक्षा प्रथाओं को अपनाना अब क्रिप्टो निवेश का एक अनिवार्य हिस्सा बन चुका है।
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