केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने रविवार को संसद में केंद्रीय बजट 2026-27 प्रस्तुत करते हुए कहा कि भारत का आर्थिक परिदृश्य सशक्त घरेलू मांग, ढांचागत सुधारों और अपेक्षाकृत स्थिर वैश्विक आर्थिक वातावरण के चलते सकारात्मक बना हुआ है। उन्होंने बताया कि बीते वर्ष भारत ने तीन प्रमुख रेटिंग हासिल की हैं, जो देश की आर्थिक स्थिरता और नीति विश्वसनीयता को दर्शाती हैं।
वित्त मंत्री ने कहा कि वृहद आर्थिक ढांचागत रिपोर्ट, मध्यम अवधि वित्तीय नीति तथा वित्तीय नीति रणनीति रिपोर्ट के अनुसार मुद्रास्फीति तटस्थ स्तर पर बनी हुई है। निजी निवेश में वृद्धि, श्रम बाजार सुधार, गैर-नियामक सुधार, डिजिटल परिवर्तन और नागरिकों द्वारा पूंजी निवेश जैसे कदमों ने अर्थव्यवस्था को उच्च स्तर पर पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। निजी क्षेत्र की सक्रिय भागीदारी से वित्तीय और कॉर्पोरेट क्षेत्र को भी मजबूती मिली है, जो समग्र विकास का प्रमुख आधार बन रही है।
आर्थिक विकास
राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय के पहले अग्रिम अनुमानों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद 7.4 प्रतिशत की दर से बढ़ने का अनुमान है, जबकि नाममात्र सकल घरेलू उत्पाद में लगभग 8 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई है। सेवा क्षेत्र 9.1 प्रतिशत विस्तार के साथ विकास का मुख्य चालक बना हुआ है। विनिर्माण और निर्माण क्षेत्रों में 7 प्रतिशत की वृद्धि अनुमानित है, वहीं कृषि क्षेत्र में 3.1 प्रतिशत की बढ़ोतरी का अनुमान लगाया गया है। बजट 2026-27 में वित्त वर्ष 2025-26 के अग्रिम अनुमानों से ऊपर, सकल घरेलू उत्पाद में 10 प्रतिशत वृद्धि का लक्ष्य रखा गया है।
उपभोग और निवेश
घरेलू मांग अर्थव्यवस्था के विस्तार का सबसे बड़ा आधार बनी हुई है। सकल घरेलू उत्पाद में 61.5 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ निजी अंतिम उपभोग व्यय में 7 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान है, जो पिछले बारह वित्त वर्षों में सर्वाधिक है। सरकार का कुल उपभोग व्यय भी वित्त वर्ष 2026 में 5.2 प्रतिशत बढ़ने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष की तुलना में कहीं अधिक मजबूत है।
यूपीआई लेनदेन, हवाई और रेल यातायात तथा ई-वे भुगतान जैसे संकेतक शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में उपभोग की सतत गति को दर्शाते हैं। निवेश गतिविधियों में भी मजबूती आई है। वित्त वर्ष 2026 में कुल स्थायी पूंजीगत संरचना में 7.8 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान है। बजट में बताया गया है कि पिछले दस वर्षों से जीएफसीएफ का हिस्सा लगभग 30 प्रतिशत पर स्थिर बना हुआ है, जो दीर्घकालिक निवेश विश्वास को दर्शाता है।
बाहरी क्षेत्र
भारत का कुल निर्यात वित्त वर्ष 2025 में 825.3 बिलियन अमरीकी डॉलर तक पहुंच गया और वित्त वर्ष 2026 में भी इसने निरंतर गति बनाए रखी है। अमरीका द्वारा विभिन्न शुल्क लगाए जाने के बावजूद अप्रैल से दिसंबर 2025 के बीच कपड़ा निर्यात में 2.4 प्रतिशत और सेवा निर्यात में 6.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इसी अवधि में कपड़ों के आयात में 5.9 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।
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कुल प्रत्यक्ष विदेशी निवेश वित्त वर्ष 2025 में 81.0 बिलियन अमरीकी डॉलर रहा और वित्त वर्ष 2026 में यह और मजबूत हुआ, जो किसी भी वित्त वर्ष के पहले सात महीनों में सर्वाधिक है। चालू खाता घाटा भी घटकर सकल घरेलू उत्पाद का 0.8 प्रतिशत रह गया है।
मध्यम अवधि वित्तीय नीति और व्यय
बजट 2026-27 में कुल कर राजस्व 44.04 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है। केंद्र सरकार का कुल व्यय 53.47 लाख करोड़ रुपये रखा गया है, जिसमें पूंजीगत व्यय के लिए 12.22 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। प्रभावी पूंजीगत व्यय 17.15 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है, जो आर्थिक क्षमता और बुनियादी ढांचे को मजबूत करेगा।
राज्यों के लिए कर विकेंद्रीकरण में 41 प्रतिशत हिस्सेदारी बरकरार रखी गई है। वित्त आयोग के माध्यम से राज्यों को कुल 16.56 लाख करोड़ रुपये के संसाधन उपलब्ध कराए जाने का अनुमान है, जिससे संघीय ढांचे को और मजबूती मिलेगी।
निष्कर्ष
केंद्रीय बजट 2026-27 भारत की आर्थिक मजबूती, संरचनात्मक सुधारों और दीर्घकालिक वित्तीय अनुशासन को स्पष्ट रूप से दर्शाता है। घरेलू मांग, निवेश और पूंजीगत व्यय पर केंद्रित यह बजट न केवल वर्तमान विकास को गति देगा, बल्कि आने वाले वर्षों में विकसित भारत के लक्ष्य को साकार करने की मजबूत नींव भी तैयार करेगा।
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