गुजरात के अमरेली जिले के नवानिया गाँव के 52 वर्षीय व्यापारी महेश भयानी एक परिष्कृत क्रिप्टो निवेश धोखाधड़ी का शिकार हो गए, जिसमें उनके करीब 93 लाख रुपये की कमाई समय से पहले गायब हो गई। उन्होंने स्थानीय साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में एक व्यापक शिकायत दर्ज कराई है।
महिला ने व्हाट्सएप संदेश भेजा
भयानी के अनुसार, उन्हें एक अज्ञात महिला ने व्हाट्सएप संदेश भेजा था, जो शुरू में गलती से भेजा गया बताया गया। इसके बाद नियमित रूप से संवाद स्थापित करते हुए उस महिला ने स्वयं को एक व्यवसायिक पृष्ठभूमि वाली व्यक्ति बताया और भयानी से उनके व्यापार के बारे में जानकारी पूछी।
बाद में उन्होंने ‘कनकधाम एक्सचेंज’ नामक ऑनलाइन ट्रेडिंग मंच के जरिए क्रिप्टो निवेश का प्रस्ताव रखा और भयानी को उच्च लाभ का आश्वासन देकर निवेश के लिए प्रेरित किया।
शुरुआत में भयानी ने सिर्फ 51,000 रुपये का निवेश किया था, लेकिन समय के साथ उन्हें मंच पर नकली लाभ का ब्यौरा दिखाया गया जिसमें चार लेन-देन में 7 लाख रुपये से अधिक का “लाभ” बताया गया।
यह झूठी प्रगति भयानी का विश्वास बढ़ाने का माध्यम बनी और उन्होंने बड़े निवेश के लिए बैंक से 25 लाख रुपये तथा फाइनेंस कंपनी से 17 लाख रुपये का ऋण भी लिया। अतिरिक्त धनराशि उन्होंने अपने फर्म के खाते से जमा की।
धोखाधड़ी का तरीका और पहचान
भयानी ने बताया कि 11 अक्टूबर 2025 से 3 जनवरी 2026 के बीच उन्होंने विभिन्न खातों में कुल ₹92.75 लाख स्थानांतरित कर दिए, किन्तु कभी भी उनका मूलधन या लाभ वापस नहीं आया।
जब उन्होंने धन निकासी का प्रयास किया तो उन्हें “कर और शुल्क” जैसे विभिन्न अतिरिक्त भुगतान का झूठा कारण बताया गया। अंततः यह स्पष्ट हुआ कि निवेश मंच और उससे जुड़ी संचार प्रणाली एक व्यापक साइबर फ्रॉड योजना का हिस्सा थी, जिसके बाद उन्होंने साइबर क्राइम पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
देश में बढ़ती क्रिप्टो धोखाधड़ियाँ
यह केवल एक व्यक्तिगत घटना नहीं है। देश भर में क्रिप्टो और ऑनलाइन निवेश से जुड़ी धोखाधड़ी की घटनाएँ बढ़ रही हैं। उदाहरण के तौर पर, आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में एक दंपत्ति को लगभग ₹1.5 करोड़ का क्रिप्टो निवेश धोखाधड़ी के कारण नुक़सान हुआ था, जिसमें झूठे ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म और नकली सुरक्षा शुल्क का हवाला देकर निवेशकों को फंसाया गया था।
इसी तरह पूर्व में मुंबई, कोलकाता और अन्य बड़े शहरों में साइबर फ्रॉड रैकेट और नकली निवेश मंचों पर आधारित धोखाधड़ी के मामले सामने आए हैं, जिनमें पुलिस ने बड़े पैमाने पर व्हाट्सएप समूह, नकली एप और झूठे लाभ के दावों का इस्तेमाल देखा है।
विशेषज्ञों की सलाह
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में निवेशकों को सतर्क रहना चाहिए और सत्यापित प्लेटफार्मों, लाइसेंस और मान्यता प्राप्त संस्थाओं पर ही ध्यान देना चाहिए। विशेषज्ञ यह भी चेतावनी देते हैं कि “असामान्य रूप से उच्च लाभ” के वादे अक्सर धोखाधड़ी का सामान्य संकेत हैं और किसी भी अनजान या संदिग्ध संपर्क से निवेश में तुरंत विश्वास नहीं करना चाहिए।
निष्कर्ष
क्रिप्टोकरेंसी और डिजिटल निवेश में बढ़ती रुचि के साथ ही निवेशकों की सुरक्षा और जागरूकता आवश्यक हो गई है। महेश भयानी जैसे निर्मल निवेशकों के साथ हुई धोखाधड़ी यह दर्शाती है कि केवल तकनीकी समझ या शुरुआती लाभ की झलक से विश्वास करना सुरक्षित नहीं होता।
समय रहते सावधान रहकर, सत्यापित जानकारी प्राप्त करके और किसी भी संदेहास्पद प्रस्ताव को अनदेखा कर निवेशक अपने धन की रक्षा कर सकते हैं। ऐसे मामलों में तुरंत साइबर क्राइम विभाग से सहायता लेना और रिपोर्ट दर्ज कराना भी बेहद महत्वपूर्ण है।
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