भारत में क्रिप्टोकरेंसी निवेशकों के बीच कर और नियामक व्यवस्था को लेकर नाराज़गी बढ़ती जा रही है। एक राष्ट्रीय सर्वे में करीब 5,000 निवेशकों से पूछे गए जवाबों के अनुसार लगभग 66 प्रतिशत ने मौजूदा कर ढांचे को अन्यायपूर्ण बताया है, जबकि एक छोटी संख्या ही इसे संतोषजनक मानती है।
सर्वे रिपोर्ट, जो कोइनस्विच द्वारा तैयार की गई है, दिखाती है कि 88 प्रतिशत से अधिक निवेशक देश की क्रिप्टो कर नीति से अच्छी तरह परिचित हैं, लेकिन दो-तिहाई से ज्यादा का मानना है कि यह ढांचा बाजार की वास्तविकताओं के अनुरूप नहीं है।
मौजूदा कर नीति की भारी बोझ
विशेष रूप से, मौजूदा कर नीति के तहत क्रिप्टो से प्राप्त लाभ पर 30 प्रतिशत कर लगता है और 1 प्रतिशत स्रोत पर कर कटौती (TDS) भी लागू होता है, जबकि नुकसान की भरपाई या उसे आगे के वर्षों में समायोजित करने की कोई व्यवस्था मौजूद नहीं है। इन कड़ियों को निवेशक भारी बोझ मानते हैं और वे कहते हैं कि इस वजह से निवेश की आकर्षकता कम हुई है।
सर्वे में यह भी सामने आया कि कर की वजह से लगभग 59 प्रतिशत निवेशकों ने क्रिप्टो में भागीदारी घटा दी है। इससे पता चलता है कि मौजूदा कर नीति न केवल क्रिप्टोपर निवेशकों की मनोदशा को प्रभावित कर रही है, बल्कि घरेलू बाजार में सक्रियता को भी सीमित कर सकती है।
कर व्यवस्था को समान किया जाए
अधिकांश निवेशक यह चाहते हैं कि क्रिप्टोकरेंसी पर कर की व्यवस्था को स्टॉक या म्यूचुअल फंड जैसे अन्य वित्तीय साधनों के समान किया जाए। सर्वे के अनुसार 61 प्रतिशत निवेशक चाहते हैं कि कर और नियम पारंपरिक शेयर-बाजार प्रणाली के अनुरूप हों, जिससे निवेशकों को बेहतर विश्वसनीयता और नियमों की स्पष्टता मिल सके।
साथ ही निवेशक 30 प्रतिशत कर दर में कटौती, नुकसान की भरपाई की अनुमति और 1 प्रतिशत TDS में कमी की भी मांग कर रहे हैं। इन सुधारों के समर्थक मानते हैं कि इससे निवेशकों की भागीदारी बढ़ेगी तथा घरेलू क्रिप्टो बाजार में तरलता और गतिविधि को समर्थन मिलेगा।
क्या आप जानते हैं: जापानी बॉन्ड संकट के बीच बिटकॉइन में गिरावट, क्रिप्टो मार्केट में $225 अरब का नुकसान
स्पष्ट नियामक ढांचे की आवश्यकता
सर्वे में यह भी उजागर हुआ कि निवेशक केवल कर राहत नहीं चाहते, बल्कि स्पष्ट और समग्र नियामक ढांचे की आवश्यकता बताते हैं। लगभग 80 प्रतिशत उत्तरदाताओं का कहना है कि केवल कर नीतियों में सुधार पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि व्यापक और पूर्वानुमेय नियमों से ही निवेशकों में दीर्घकालिक विश्वास पैदा हो सकता है।
क्रिप्टो उद्योग के विशेषज्ञों का मानना है कि इस समय स्थिति दोराहे पर है। एक ओर डिजिटल परिसंपत्तियों में निवेश लगातार बढ़ रहा है और छोटे शहरों से भी निवेशकों की संख्या में वृद्धि हो रही है, वहीं दूसरी ओर कर की कठोर व्यवस्था निवेशकों को पीछे हटने के लिए प्रेरित कर रही है।
सरकार के सामने आगामी संसदीय बजट 2026-27 एक महत्वपूर्ण अवसर है कि वह इन चिंताओं को ध्यान में रखकर कर ढांचे में सकारात्मक बदलाव लाए। उद्योग, निवेशक और वित्तीय विश्लेषक सभी यह सुझाव दे रहे हैं कि यदि कर दरों और नियमों को सामान्य वित्तीय बाजारों के अनुरूप बनाया जाए, तो भारत का क्रिप्टोपर माहौल और अधिक निवेश-अनुकूल बन सकता है।
निष्कर्ष
क्रिप्टो निवेशकों का मानना है कि मौजूदा कर व्यवस्था उन्हें सीमित कर रही है और बाजार की वृद्धि संभावनाओं को कमजोर कर रही है। सुधार की मांग केवल करों के भार को कम करने तक सीमित नहीं है, बल्कि एक व्यापक, संतुलित और पारदर्शी नियामक ढांचे की ओर भी है।
यदि बजट में इन मुद्दों पर ध्यान दिया जाता है, तो इससे न केवल निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा, बल्कि भारत में क्रिप्टो निवेश की दिशा और विकास दोनों को भी बल मिलेगा।
ऐसी ही और ख़बरों और क्रिप्टो विश्लेषण के लिए हमें X पर फ़ॉलो करें, ताकि कोई भी अपडेट आपसे न छूटे!
