भारतीय प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने BitConnect क्रिप्टो फ्रॉड मामले में अहम कार्रवाई करते हुए दो मुख्य सहयोगियों - निकुंज प्रवीनभाई भट्ट (33), सूरत और संजय कणुभाई कोटाडिया (49), मुंबई, को मनी लॉन्ड्रिंग रोधी कानून (PMLA) की धारा 19(1) के तहत गिरफ्तार किया है।
दोनों आरोपियों को विशेष PMLA अदालत, अहमदाबाद में पेश कर चार दिनों की रिमांड मिली है। प्रवर्तन निदेशालय ने इस व्यापक आपराधिक जांच में अब तक कुल ₹2,170 करोड़ से अधिक की संपत्ति को जब्त या फ्रीज कर लिया है, जिसमें निवेश, शेयर, म्यूचुअल फंड, कैश और क्रिप्टोकरेंसी शामिल हैं।
भारतीय प्रवर्तन निदेशालय जांच
बिटकनेक्ट, एक वैश्विक क्रिप्टोकरेंसी प्लेटफॉर्म था, जिसे इसके संस्थापक सतीश कुर्जिभाई कुंभानी और सहअभियुक्तों द्वारा संचालित किया गया था। यह प्लेटफॉर्म “लेंडिंग प्रोग्राम” नाम के निवेश मॉडल के माध्यम से निवेशकों को 40% तक मासिक रिटर्न का लालच देता था, जबकि वास्तविकता में ऐसा कोई भरोसेमंद ट्रेडिंग बॉट मौजूद नहीं था।
ईडी की जांच के अनुसार, इस धोखाधड़ी के दौरान जनता से भ्रामक तरीके से जुटाई गई निधियों को असली व्यापार में निवेश नहीं किया गया, बल्कि उन्हें डिजिटल वॉलेट्स और अन्य अनुपालनहीन खातों के माध्यम से हेरफेर करके संचालित किया गया।
गिरफ्तारी और आरोपियों की भूमिका
निकुंज भट्ट कथित तौर पर इस घोटाले में शामिल रहा और उसे कम से कम 266 बिटकॉइन प्राप्त होने का आरोप है। इनमें से 10.9 बिटकॉइन ED ने अटैच कर लिया है। भट्ट पर आरोप है कि उसने शेष सार्वजनिक क्रिप्टो को थर्ड पार्टी खातों के जरिए Ethereum और USDT में बदलकर कई वॉलेट्स में ट्रांसफर किया।
ED जांच में पाया गया कि संजय कोटाडिया के नाम पर USD 23 लाख (लगभग ₹20.7 करोड़) के लेन-देने के लिंक मौजूद हैं, जिनका उपयोग कथित तौर पर क्रिप्टो ट्रेडिंग में किया गया। इसके अलावा, कोटाडिया को USD 4.5 लाख (लगभग ₹4.05 करोड़) सीधे शैलेश भट्ट से प्राप्त होने का आरोप है।
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दोनों आरोपियों ने पूछताछ के दौरान कथित रूप से गलत या अपूर्ण जानकारी दी और सबूतों को छेड़-छाड़ या नष्ट करने का प्रयास करने की आशंका जताई गई, जिसके चलते अदालत ने उनकी गिरफ्तारी को मंजूरी दी।
किडनैपिंग-ब्लैकमेल का मामला
यह मामला सिर्फ निवेश धोखाधड़ी तक सीमित नहीं रहा। एक दूसरी FIR में शैलेश भट्ट और उसके सहयोगियों पर आरोप है कि उन्होंने पियूष सावालिया और धवल मावनी नामक दो व्यक्तियों का अपहरण किया ताकि वे अपने कथित निवेश राशि की वसूली कर सकें।
ED के अनुसार, इस किडनैपिंग के दौरान आरोपियों ने 2,254 बिटकॉइन, 11,000 लाइटकॉइन और ₹14.5 करोड़ नकद वसूल किए। इस तरह के गंभीर आरोप यह दर्शाते हैं कि क्रिप्टो फ्रॉड न केवल वित्तीय नुकसान का कारण बनता है, बल्कि इससे गंभीर अपराधिक गतिविधियों का दायरा भी बढ़ता है।
ED का कहना है कि जांच अब भी जारी है और एजेंसी अधिक अवैध धन की पहचान, अन्य सहयोगियों की गिरफ्तारी और आपराधिक लाभों के स्रोतों का पता लगाने का प्रयास कर रही है। अदालत ने आरोपियों की अग्रिम हिरासत जारी रखी है और उनसे आगे पूछताछ जारी है।
निष्कर्ष
बिटकनेक्ट घोटाला भारत में अब तक के सबसे बड़े क्रिप्टो फ्रॉड मामलों में से एक माना जाता है। इसमें निवेशकों को तत्काल आकर्षक रिटर्न का लालच देकर फंसाया गया और फिर निधियों का गुप्त रूप से हेरफेर किया गया।
ED की कार्रवाई से यह स्पष्ट होता है कि डिजिटल संपत्ति-आधारित अपराधों के खिलाफ केंद्रीय एजेंसियों की सतर्क जांच और बेबाक भूमिकाएँ हैं, जो न केवल धोखाधड़ी को उजागर करती हैं बल्कि संबंधित आपराधिक नेटवर्क को भी तंग करती हैं।
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