प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 29 जनवरी 2026 को पंजाब, हरियाणा और दिल्ली में एक संगठित अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी और धनशोधन गिरोह के खिलाफ व्यापक तलाशी अभियान चलाया। यह कार्रवाई अमेरिका की संघीय जांच एजेंसी से प्राप्त खुफिया सूचना के आधार पर शुरू की गई।
जांच में सामने आया है कि भारत में संचालित एक नेटवर्क ने बड़ी संख्या में अमेरिकी नागरिकों को झांसा देकर करोड़ों रुपये की रकम क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से अवैध रूप से बाहर भेजी।
ईडी की यह कार्रवाई धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत की जा रही है। मामले की शुरुआत केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा दर्ज प्राथमिकी के आधार पर हुई थी।
फर्जी कॉल सेंटर के जरिए रची गई साजिश
जांच में पता चला है कि आरोपियों ने ‘डिजीकैम्प्स – द फ्यूचर ऑफ डिजिटल’ नाम से एक अवैध कॉल सेंटर चला रखा था, जिसमें करीब 36 कर्मचारी काम कर रहे थे। ये लोग खुद को तकनीकी सहायता प्रतिनिधि या अमेरिकी सरकारी विभागों के अधिकारी बताकर नागरिकों को फोन करते थे।
पीड़ितों को बताया जाता था कि उनके कंप्यूटर या बैंक खातों में गंभीर समस्या है। इसके बाद उनसे गोपनीय जानकारी ली जाती थी और डर या दबाव बनाकर नकद या क्रिप्टोकरेंसी के रूप में भुगतान कराया जाता था।
आईआरएस के नाम पर डराकर वसूली
जांच एजेंसियों के अनुसार, ठग अमेरिकी आंतरिक राजस्व सेवा (आईआरएस) या अन्य सरकारी विभागों का नाम लेकर लोगों को धमकाते थे कि उन पर कर बकाया है या कानूनी कार्रवाई होने वाली है। डर के माहौल में पीड़ितों से तत्काल भुगतान करवाया जाता था। यह राशि बाद में आरोपियों द्वारा नियंत्रित डिजिटल वॉलेट में स्थानांतरित कर दी जाती थी।
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शेल कंपनियों के जरिए धन को वैध दिखाने की कोशिश
ईडी ने पाया है कि ठगी से जुटाई गई रकम को छिपाने के लिए कुछ आभासी कंपनियों का सहारा लिया गया। इनमें ब्लिस इंफ्रा प्रॉपर्टीज एलएलपी और ब्लिस इंफ्रा वेंचर्स एलएलपी जैसी संस्थाओं का नाम सामने आया है। जांच में यह भी सामने आया है कि अवैध कमाई के एक हिस्से को अचल संपत्ति में निवेश कर उसे वैध आय के रूप में दर्शाने की कोशिश की गई।
34 लाख रुपये नकद और डिजिटल उपकरण जब्त
तलाशी अभियान के दौरान ईडी ने 34 लाख रुपये से अधिक नकद राशि, लैपटॉप, मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल भंडारण उपकरण जब्त किए हैं। अधिकारियों के मुताबिक, इन उपकरणों में लेनदेन से जुड़े अहम डिजिटल रिकॉर्ड मिले हैं। अब इनका फॉरेंसिक विश्लेषण किया जा रहा है ताकि गिरोह के अन्य सदस्यों और अंतरराष्ट्रीय कड़ियों का पता लगाया जा सके।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ता साइबर अपराध
अधिकारियों का कहना है कि यह मामला केवल एक राज्य या देश तक सीमित नहीं है, बल्कि साइबर ठगी और क्रिप्टोकरेंसी के दुरुपयोग के बढ़ते वैश्विक नेटवर्क का हिस्सा है। केंद्रीय एजेंसियां इस मामले में अंतरराष्ट्रीय सहयोग के तहत आगे की जांच कर रही हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, डिजिटल तकनीक के विस्तार के साथ साइबर अपराधियों के तरीके भी जटिल होते जा रहे हैं। ऐसे में आम लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है।
कैसे रहें सतर्क?
अनजान नंबर से आए कॉल पर अपनी बैंक या व्यक्तिगत जानकारी साझा न करें।
किसी भी सरकारी विभाग के नाम पर धन की मांग होने पर संबंधित विभाग की आधिकारिक वेबसाइट से पुष्टि करें।
डिजिटल वॉलेट और क्रिप्टो निवेश करते समय पूरी जांच-पड़ताल करें।
संदिग्ध गतिविधि होने पर तुरंत साइबर पुलिस या संबंधित एजेंसी को सूचना दें।
निष्कर्ष
ईडी की यह कार्रवाई स्पष्ट संकेत देती है कि भारत में संचालित साइबर ठगी गिरोह अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय हैं। क्रिप्टोकरेंसी और डिजिटल माध्यमों का दुरुपयोग कर विदेशी नागरिकों को निशाना बनाया जा रहा है। ऐसे मामलों में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के बीच समन्वय बेहद जरूरी है। सख्त जांच और कानूनी कार्रवाई से ही डिजिटल अर्थव्यवस्था को सुरक्षित रखा जा सकता है।
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