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Rajeev Ranjan Roy
लेखक: Rajeev Ranjan Royस्टाफ लेखक
Pratik Bhuyan
Pratik Bhuyan द्वारा समीक्षितस्टाफ संपादक

भारत 2027 से लागू करेगा OECD का क्रिप्टो रिपोर्टिंग ढांचा

वैश्विक टैक्स पारदर्शिता को मज़बूत करने और डिजिटल संपत्तियों में पारदर्शिता लाने के लिए भारत ने 2027 से क्रिप्टो रिपोर्टिंग के अंतर्राष्ट्रीय मानक अपनाने की घोषणा की।

भारत 2027 से लागू करेगा OECD का क्रिप्टो रिपोर्टिंग ढांचा
घोषणा

भारत सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए घोषणा की है कि अप्रैल 2027 से देश में आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (OECD) का क्रिप्टो-एसेट रिपोर्टिंग फ्रेमवर्क (CARF) लागू किया जाएगा। यह निर्णय न केवल भारत की टैक्स नीति को आधुनिक बनाएगा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय वित्तीय पारदर्शिता की दिशा में भी एक बड़ा योगदान साबित होगा।

पिछले एक दशक में भारत सहित दुनिया भर में क्रिप्टोकरेंसी और अन्य डिजिटल संपत्तियों में निवेश तेजी से बढ़ा है। बिटकॉइन, एथेरियम और कई अन्य वर्चुअल टोकन ने आम निवेशकों से लेकर संस्थागत खिलाड़ियों तक सबका ध्यान खींचा है। लेकिन इस तेज़ी के साथ टैक्स चोरी और वित्तीय पारदर्शिता की कमी की चिंताएं भी बढ़ी हैं।

यही कारण है कि OECD ने CARF नामक ढांचा तैयार किया, जिसके तहत सभी सदस्य देशों को क्रिप्टो लेनदेन की रिपोर्टिंग अनिवार्य करनी होगी। भारत ने इस पहल का समर्थन करते हुए इसे लागू करने की तैयारी शुरू कर दी है।

दो हजार सत्ताईस क्यों?

सरकार का कहना है कि क्रिप्टो रिपोर्टिंग फ्रेमवर्क को लागू करने के लिए तकनीकी ढांचे, नियामक प्रक्रियाओं और डेटा-साझेदारी प्रणालियों को विकसित करना होगा। यह समयसीमा सुनिश्चित करेगी कि बैंकों, एक्सचेंजों और टैक्स विभागों को पर्याप्त तैयारी का मौका मिले। इसके साथ ही निवेशकों और उद्योग जगत को भी नई व्यवस्था को समझने और अपनाने का अवसर मिलेगा।

विशेषज्ञों के अनुसार, CARF लागू होने से सबसे बड़ा लाभ पारदर्शिता का होगा। वर्तमान में क्रिप्टो लेनदेन का बड़ा हिस्सा टैक्स अधिकारियों की नज़र से बाहर रहता है। कई लोग क्रिप्टो से मुनाफा कमाते हैं लेकिन उसकी सही रिपोर्टिंग नहीं करते। 2027 के बाद ऐसा करना लगभग असंभव हो जाएगा।

निवेशकों को भी दीर्घकालिक रूप से लाभ होगा। पारदर्शिता और स्पष्ट नियमों के कारण विदेशी निवेशक भारतीय क्रिप्टो बाजार में अधिक विश्वास दिखाएंगे। इससे नई स्टार्टअप कंपनियों को प्रोत्साहन मिलेगा और रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।

वैश्विक साझेदारी का हिस्सा

भारत G20 और अन्य वैश्विक मंचों पर लंबे समय से डिजिटल अर्थव्यवस्था में जिम्मेदार आचरण की वकालत करता रहा है। CARF को लागू करने का निर्णय इस रुख को और मज़बूत करेगा। OECD का यह फ्रेमवर्क दुनिया भर में कॉमन रिपोर्टिंग स्टैंडर्ड (CRS) की तरह काम करेगा, जो पहले से पारंपरिक बैंक खातों और निवेश साधनों पर लागू है।

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सीएआरएफ (CARF) लागू होने से भारतीय टैक्स अधिकारी विदेशी एक्सचेंजों पर हुए लेनदेन की भी जानकारी प्राप्त कर सकेंगे, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर टैक्स चोरी पर लगाम कसने में मदद मिलेगी।

चुनौतियाँ भी कम नहीं

हालांकि, इस दिशा में चुनौतियाँ भी सामने आएंगी। सबसे बड़ी चुनौती तकनीकी बुनियादी ढांचे की होगी। लाखों-करोड़ों लेनदेन को सुरक्षित रूप से रिकॉर्ड और साझा करने के लिए मजबूत डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित करना होगा। साथ ही, डेटा सुरक्षा और गोपनीयता को लेकर भी गंभीर प्रश्न उठेंगे।

क्रिप्टो उद्योग के कई खिलाड़ी आशंका जता रहे हैं कि अत्यधिक रिपोर्टिंग और अनुपालन बोझ से छोटे निवेशक और स्टार्टअप प्रभावित हो सकते हैं। सरकार को इस संतुलन को साधने के लिए स्पष्ट और व्यवहारिक नीतियां बनानी होंगी।

अर्थशास्त्रियों का मानना है कि भारत का यह कदम देश को वैश्विक वित्तीय प्रणाली में और गहराई से जोड़ देगा। आईटी और फिनटेक सेक्टर में भी नए अवसर पैदा होंगे। हालांकि, विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि यदि नियम अत्यधिक जटिल बनाए गए तो भारत क्रिप्टो उद्यमों के लिए आकर्षक गंतव्य नहीं रह पाएगा।

भविष्य की दिशा

भारत ने CARF को लागू करने की घोषणा कर यह संकेत दे दिया है कि आने वाले समय में क्रिप्टो लेनदेन को शैडो सेक्टर के रूप में नहीं रहने दिया जाएगा। अप्रैल 2027 से यह पूरी तरह औपचारिक अर्थव्यवस्था का हिस्सा बन जाएगा, जिससे टैक्स संग्रह बढ़ेगा, पारदर्शिता आएगी और निवेशकों का भरोसा मजबूत होगा।

सरकार का कहना है कि यह कदम केवल टैक्स चोरी रोकने के लिए नहीं, बल्कि देश में जिम्मेदार निवेश संस्कृति विकसित करने के लिए है। जैसे-जैसे दुनिया डिजिटल संपत्तियों की ओर बढ़ रही है, भारत ने साबित कर दिया है कि वह इस यात्रा में पीछे नहीं रहेगा।

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