भारत में क्रिप्टोकरेंसी ट्रेडिंग के तेजी से बदलते स्वरूप पर कर विभाग और वित्त मंत्रालय की कड़ी नजर बनी हुई है। शीर्ष कर अधिकारी इस डिजिटल वित्तीय क्रांति के दायरे में आने वाली सभी गतिविधियों की जांच कर रहे हैं ताकि टैक्स अनुपालन सुनिश्चित हो सके और धोखाधड़ी व अवैध लेन-देन पर रोक लग सके।
सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्स (सीबीडीटी) के अध्यक्ष रवि अग्रवाल ने कहा है कि हर दिन क्रिप्टो लेन-देन की प्रकृति बदल रही है। नयी तकनीक और नए उत्पादों, खासकर डेरिवेटिव और संवेदनशील डिजिटल एसेट्स, के उभरने के साथ सरकार को उनके प्रभाव को समझना आवश्यक है। अतः वे नियमित रूप से क्रिप्टो एक्सचेंजों के साथ संवाद कर रहे हैं।
कड़ी टैक्स अनुपालन
भारत में क्रिप्टोकरेंसी को अभी तक कानूनी मुद्रा के रूप में मान्यता नहीं मिली है, लेकिन खरीद-फरोख्त और निवेश वैध है। देश में क्रिप्टो से होने वाले मुनाफे पर 30% टैक्स लगाया जाता है और 1% टैक्स स्रोत पर कटौती (TDS) भी लागू रहती है। इसके अलावा, 18% वस्तु एवं सेवा कर (GST) क्रिप्टो सेवाओं पर लगता है, जिससे कुल कर बोझ और भी बढ़ जाता है।
कर विभाग का मानना है कि यह कड़ी कर नीति काल्पनिक ट्रेडिंग को नियंत्रित करने में सहायक है और लेन-देन की पूर्ण रिकॉर्ड से टैक्स चोरी पर रोक लगेगी। इसके लिए सरकार ने वित्त वर्ष 2026 के बजट में रिपोर्टिंग और अनुपालन को और कठोर बनाया है।
रिपोर्टिंग और डेटा विनिमय पर वैश्विक पहल
सरकार ने घोषणा की है कि वह अप्रैल 2027 से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्रिप्टो लेन-देन डेटा साझा करने के लिए तैयार है। यह कदम ओईसीडी के नेतृत्व वाले क्रिप्टो-एसेट रिपोर्टिंग फ्रेमवर्क (CARF) के तहत किया जा रहा है, जिससे भारत दुनिया भर के टैक्स अधिकारियों के साथ अपनी जानकारी साझा करेगा और पारदर्शिता बढ़ेगी।
तैयारी के हिस्से के रूप में भारत ने बजट में उन संस्थाओं पर दैनिक जुर्माने और कठोर दंड प्रस्तावित किए हैं जो निर्धारित रिपोर्टिंग मानकों का पालन नहीं कर पाते। इससे न केवल घरेलू बाजार में अनुशासन बढ़ेगा, बल्कि विदेशी प्लेटफॉर्म पर हो रहे भारतीय उपयोगकर्ता गतिविधियों पर भी निगरानी मजबूत होगी।
क्रिप्टो एक्सचेंज और अनुपालन की चुनौतियाँ
देश में बाइनेंस, कॉइनडीसीएक्स, कॉइनबेस और जेबपे जैसे वैश्विक और स्थानीय एक्सचेंज भारत में पंजीकृत हैं और वित्तीय सूचना इकाई के तहत काम कर रहे हैं। इन एक्सचेंजों को कड़ी केवाईसी (ग्राहक पहचान) और एंटी-मनी लॉन्ड्रिंग नियमों का पालन करना पड़ता है।
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कई मामलों में लाइव सेल्फी, जीपीएस आधारित सत्यापन और विस्तृत पहचान जांच जैसे उपाय लागू किए गए हैं ताकि धोखाधड़ी और गुमनाम ट्रेडिंग को रोका जा सके। विशेषज्ञ यह मानते हैं कि इन नियमों से शुरुआती दौर में प्लेटफॉर्म्स पर बोझ पड़ सकता है, लेकिन इससे दीर्घकाल में निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा और वैध गतिविधियों के लिए मजबूत आधार बनेगा।
स्थानीय निवेशक और बाजार की प्रतिक्रिया
भारतीय निवेशक इस कड़े कर और अनुपालन वातावरण में मिश्रित प्रतिक्रियाएँ दे रहे हैं। कुछ का मानना है कि उच्च कर दरें और रिपोर्टिंग अनिश्चितता निवेश को हतोत्साहित कर सकती हैं, जबकि अन्य का कहना है कि यह पारदर्शिता और सुरक्षा बढ़ाने वाला कदम है जो बाजार को दीर्घकालिक रूप से स्वस्थ रखेगा।
कुछ विशेषज्ञ सुझाव देते हैं कि भारत को न सिर्फ टैक्स ढांचे को सरल बनाना चाहिए बल्कि स्पष्ट क्रिप्टो कानून और नियामक ढांचा भी बनाने की दिशा में तेजी लानी चाहिए ताकि निवेशक और तकनीकी नवप्रवर्तक देश में ही डिजिटल संपत्ति क्षेत्र में आगे बढ़ सके।
निष्कर्ष
भारत की क्रिप्टो नीतियाँ अब एक स्थिर और पारदर्शी ढांचे की ओर अग्रसर हैं, जिसमें कर अनुपालन, रिपोर्टिंग कठोरता और अंतरराष्ट्रीय डेटा साझा करने जैसी पहलें शामिल हैं। हालांकि पूर्ण नियामक कानूनी ढांचा अभी अंतिम रूप में नहीं आया है, लेकिन बढ़ती निगरानी और कड़े अनुपालन मानकों से वैश्विक मानदंडों के अनुरूप एक संतुलित बाजार की संभावना मजबूत हुई है।
निवेशकों के लिए यह जरूरी है कि वे नवीनतम नियमों के अनुरूप अपनी गतिविधियों को समायोजित करें और सरकारी दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन करें ताकि लेन-देन सुरक्षित, पारदर्शी और कानूनी ढांचे में बना रहे।
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