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Rajeev Ranjan Roy
लेखक: Rajeev Ranjan Royस्टाफ लेखक
Pratik Bhuyan
Pratik Bhuyan द्वारा समीक्षितस्टाफ संपादक

भारत-यूरोपीय संघ समझौते से क्रिप्टो नियमों को मिलेगी रफ्तार, डिजिटल संपत्तियों पर साफ नीति की उम्मीद

भारत और यूरोपीय संघ के बीच हुए मुक्त व्यापार समझौते (FTA) से देश में क्रिप्टोकरेंसी और डिजिटल संपत्तियों के लिए स्पष्ट नियमों का रास्ता खुल सकता है।

भारत-यूरोपीय संघ समझौते से क्रिप्टो नियमों को मिलेगी रफ्तार, डिजिटल संपत्तियों पर साफ नीति की उम्मीद
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भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच हुआ ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौता (FTA) अब केवल पारंपरिक व्यापार तक सीमित नहीं रहने वाला है। इसका असर तेजी से उभरते डिजिटल क्षेत्र, खासकर क्रिप्टोकरेंसी और वर्चुअल डिजिटल एसेट्स (VDA) के नियमन पर भी पड़ता दिखाई दे रहा है। जानकारों का मानना है कि इस समझौते के बाद भारत में क्रिप्टो से जुड़े नियमों को लेकर लंबे समय से जारी असमंजस दूर हो सकता है।

यूरोपीय संघ का MiCA मॉडल क्यों अहम है

यूरोपीय संघ पहले ही क्रिप्टो परिसंपत्तियों पर बाज़ार विनियमन (MiCA) लागू कर चुका है। इस ढांचे के तहत:

  • क्रिप्टो एक्सचेंजों और सेवा प्रदाताओं के लिए लाइसेंस अनिवार्य

  • स्टेबलकॉइन जारीकर्ताओं पर रिज़र्व और पारदर्शिता नियम

  • निवेशक सुरक्षा और जोखिम प्रकटीकरण पर विशेष जोर

विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत, EU के इस अनुभव से निवेशक-सुरक्षा और नवाचार के बीच संतुलन बनाने की सीख ले सकता है।

भारत में बढ़ता क्रिप्टो चलन

भारत में भी क्रिप्टोकरेंसी का चलन तेजी से बढ़ा है। वैश्विक रिपोर्टों के मुताबिक, डिजिटल संपत्तियों को अपनाने के मामले में भारत दुनिया के अग्रणी देशों में शामिल है। खासतौर पर युवाओं और तकनीक-प्रेमी निवेशकों के बीच बिटकॉइन, एथेरियम (ETH) और अन्य टोकनों में रुचि लगातार बढ़ रही है।

हालांकि, सरकार और नियामक संस्थाएं अब तक इस क्षेत्र को लेकर सतर्क रुख अपनाए हुए हैं। भारत में क्रिप्टोकरेंसी को अभी कानूनी मुद्रा का दर्जा नहीं दिया गया है, लेकिन इसे ‘वर्चुअल डिजिटल संपत्ति’ के रूप में मान्यता दी जा चुकी है। वर्ष 2022 के बजट में डिजिटल संपत्तियों से होने वाली आय पर 30 प्रतिशत कर और लेन-देन पर एक प्रतिशत टीडीएस लगाने का फैसला इसी दिशा में उठाया गया अहम कदम माना गया था।

भारतीय रिज़र्व बैंक की चिंता

भारतीय रिज़र्व बैंक लगातार क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े जोखिमों को लेकर चेतावनी देता रहा है। केंद्रीय बैंक का मानना है कि अनियंत्रित क्रिप्टो लेन-देन से वित्तीय स्थिरता को खतरा हो सकता है, साथ ही मनी लॉन्ड्रिंग और अवैध गतिविधियों की आशंका भी बनी रहती है। इसी कारण डिजिटल रुपया यानी केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा (CBDC) को सुरक्षित विकल्प के तौर पर आगे बढ़ाया जा रहा है।

हाल के महीनों में सरकार ने क्रिप्टो ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म्स के लिए सख्त केवाईसी नियम भी लागू किए हैं। इनमें लाइव सेल्फी, भौगोलिक स्थान की पुष्टि और लेन-देन की निगरानी जैसे प्रावधान शामिल हैं, ताकि काले धन और आतंक वित्तपोषण पर लगाम लगाई जा सके।

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EU सहयोग से भारत को क्या लाभ हो सकता है

भारत-यूरोपीय संघ समझौते के बाद यह उम्मीद की जा रही है कि डिजिटल वित्त और क्रिप्टो नियमन के क्षेत्र में दोनों पक्षों के बीच सहयोग बढ़ेगा। यूरोपीय संघ के अनुभवों से भारत को एक संतुलित और निवेशक-हितैषी ढांचा तैयार करने में मदद मिल सकती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि भारत वैश्विक मानकों के अनुरूप स्पष्ट नियम बनाता है, तो इससे न केवल घरेलू निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा, बल्कि विदेशी निवेश और तकनीकी नवाचार को भी बढ़ावा मिलेगा। इससे भारत को वैश्विक डिजिटल अर्थव्यवस्था में मजबूत स्थान मिल सकता है।

निष्कर्ष

भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता देश के लिए डिजिटल वित्त के क्षेत्र में एक नया मोड़ साबित हो सकता है। क्रिप्टोकरेंसी को लेकर यदि स्पष्ट, संतुलित और मजबूत नियम बनाए जाते हैं, तो भारत न सिर्फ निवेशकों के लिए सुरक्षित बाजार बन सकता है, बल्कि वैश्विक डिजिटल परिसंपत्ति व्यवस्था में भी अहम भूमिका निभा सकता है।

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